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Maharajganj News: मंदिरों में मां चंद्रघंटा के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु, किया पूजन-अर्चन

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 22 Mar 2026 01:39 AM IST
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Devotees flocked to the temples to have darshan of Maa Chandraghanta and performed puja and worship.
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नवरात्र के तीसरे दिन भी लेहड़ा दुर्गा मंदिर पर दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु
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फरेंदा। चैत्र रामनवमी के तीसरे दिन जिले के देवी मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ लग रही है। श्रद्धालुओं ने मंदिरों में मां चंद्रघंटा के दर्शन कर पूजन-अर्चन किया। मंदिरों में सुबह चार बजे से ही भक्तों की लंबी कतार लग रही है। लोग मां के दर्शन कर सुख समृद्धि की कामना कर रहे है। मंदिरों में मां के जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो रहा है।
फरेंदा क्षेत्र का प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां लेहड़ा देवी मंदिर, नगर की दुर्गा मंदिर, नौतनवां की मां बनैलिया देवी, सोनाड़ी देवी, कुड़िया देवी मंदिर, बोकड़ा देवी सहित अन्य देवी मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन किया। दर्शन के पश्चात प्रसाद ग्रहण किया। लेहड़ा दुर्गा मंदिर पर आरती, कीर्तन के साथ देवी पचरा भी भक्त करा रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन अलर्ट है। जगह-जगह पुलिस टीम लगी हुई है। किसी भी प्रकार की समस्या से निपटने के लिए स्वयंसेवी संस्थाएं भी लगी हुई हैं। लेहड़ा मंदिर के पुजारी संतोष कुमार पांडेय ने बताया कि भक्तों की सुरक्षा को लेकर पुलिस के साथ मंदिर प्रशासन भी सतर्क है। मंदिर के कपाट पूरी रात खुले रहे।
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रूदल ने की थी फरेंदा दुर्गा मंदिर की स्थापना
फरेंदा। कस्बा में स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर में चैत्र रामनवमी व शारदीय नवरात्र में भक्तों की भीड़ लगती है। काले पत्थर से निर्मित इस इकलौती मूर्ति की स्थापना आल्हा के भाई रुदल ने की थी। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां आने वाले सभी भक्तों की मुराद अवश्य पूरी होती है। जनश्रुतियों के अनुसार, महोबा के राजा आल्हा के छोटे भाई रूदल महोबा से बनवसिया स्थित बनारस स्टेट के राजा सैयद से मिलने जा रहे थे। रात होने के चलते उन्होंने सैनिकों के साथ आनंदनगर में ही पड़ाव डाल दिया। सोते समय मां जगदंबा ने रूदल को यहां पर अपने होने का स्वप्न दिखाया। सुबह रूदल ने मां दुर्गा की प्रतिमा का स्थापना की। रूदल नाम से ही राजस्व अभिलेख में यहां का नाम रूदलापुर सेखुई हो गया है। यहां पर एक टोला भी रूदलापुर के नाम से है। कालातंर में प्राकृतिक प्रकोप से यह मंदिर ध्वस्त हो गया था। सेठ आनंदराम जयपुरिया को 1932 में कस्बे के गणेश शुगर मिल की स्थापना कराने के दौरान खुदाई में एक मूर्ति मिली थी। इसके बाद जयपुरिया ने मंदिर का निर्माण कराया था। संवाद
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