ब्याज दर की मार: नेपाल में ऋण मिलना हुआ मुश्किल, पचास इंडस्ट्रीज में लगे ताले
सीमावर्ती जिला रूपनदेही और नवलपरासी जिले में पचास इंडस्ट्रीज बंद होने से हजारों की संख्या में लोगों के पास रोजी रोटिक संकट खड़ा हो गया है। जिसमें ज्यादातर भारतीय शामिल हैं।
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नेपाल की अर्थव्यवस्था पर बैंकों की नीति और कुछ राजनीतिक करण का बुरा असर पड़ा है। नेपाल में ऋण मिलना मुश्किल हो रहा है। अगर मिला तो ब्याज इतना है कि उद्योगपति ब्याज लेने से कतरा रहे हैं। जिसके कारण सीमावर्ती क्षेत्र के छोटे और बड़े करीब पचास इंडस्ट्रीज बंद हो चुके हैं।
उद्योगपतियों का कहना है कि अगर ऐसा ही रहा तो सारे उद्योग धंधे बंद कर हमें भी बाहर कमाने जाना पड़ सकता है। पूर्व मंत्री गुलजारी यादव ने बताया कि इस वित्त वर्ष की शुरुआत में तत्कालीन सरकार ने बढ़-चढ़ कर यह एलान किया था कि नेपाल की आर्थिक वृद्धि दर इस साल आठ फीसदी रहेगी। लेकिन छमाही समीक्षा के बाद यह अनुमान गिरा कर चार फीसदी कर दिया गया। नेपाल में वित्त वर्ष 16 जुलाई से शुरू होता है। जिसके बाद भी बैंकों के व्याज दर में कमी नहीं हुई।
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रूपनदेही जिले के अर्थशास्त्री दीपेश पोखरेल ने बताया कि सरकार ने चालू खाते का घाटा नियंत्रित रखने और विदेशी मुद्रा कोष में वृद्धि के लिए ब्याज दर बढ़ाने की नीति अपनाई। उस कारण देश में उपभोक्ता मांग घट गई। उसका असर जीडीपी वृद्धि दर के घटने के रूप में सामने आ रहा है। इसके पहले 2015-16 में नेपाल में आर्थिक वृद्धि दर 1.9 फीसदी रही थी, जो (अगर 2019-20 के कोरोना काल को छोड़ दें तो) सबसे कम वृद्धि दर का अब तक का रिकॉर्ड है।
उधोग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष ठाकुर प्रसाद श्रेष्ठ ने बताया कि सरकार के नीतियों के कारण रूपनदेही, नवलपरासी जिले के करीब पचास छोटी बड़ी इंडस्ट्रीज बंद है। जिसमे प्रमुख स्टील, सीमेंट, बेकरी, दूध मिल्क फूड्स, फ्लोर एवं कुछ प्लास्टिक इंडस्ट्रीज शामिल हैं।
रूपनदेही उद्योग संघ के महासचिव कृष्ण प्रसाद धिमीरे ने बताया कि यह दुखद है कि सरकार की पक्षपातपूर्ण और गलत नीतियों के कारण उद्योग बंद हो गए हैं।
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हजारों कर्मचारियों और मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट
सीमावर्ती जिला रूपनदेही और नवलपरासी जिले में पचास इंडस्ट्रीज बंद होने से हजारों की संख्या में लोगों के पास रोजी रोटिक संकट खड़ा हो गया है। जिसमें ज्यादातर भारतीय शामिल हैं। सीमावर्ती क्षेत्र सोनौली, नौतनवां, भगवानपुर, बरगदवा, ठूठीबारी से सैकड़ों मजदूर प्रतिदिन साइकिल से नेपाल के फैक्ट्री में मजदूरी करने जाते थे। मजदूर श्याम लाल, रिजवान, प्रदीप, हरिशंकर, दयालु, केदारनाथ, हरिराम, शददाम, शाकिर निवासी खोरिया ने बताया कि कई वर्षों से सीमेंट फैक्ट्री में काम करते थे, लेकिन अब दो महीने से बंद है।
