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Maharajganj News: मेडिकल स्टोर की आड़ में चला रहे अस्पताल, धंधेबाजों की कमाई में मरीज गंवा रहे जान

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 01 Apr 2026 02:33 AM IST
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Hospitals are operating under the guise of medical stores, patients are losing their lives to the profit of the businessmen.
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मेडिकल स्टोर संचालक को केवल दवा बेचने का अधिकार
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नियम को दरकिनार कर कर रहे इलाज
महराजगंज। जिले में मेडिकल स्टोर की आड़ में कई झोलाछाप क्लीनिक चला रहे हैं। वह छोटी-मोटी बीमारियों का बकायदा इलाज भी कर रहे हैं। मर्ज जब बढ़ जाता है तो किसी दूसरे जगह मामले को रेफर कर देते हैं। इससे आए दिन मरीजों की मौत के मामले सामने आ रहे हैं। शहर स्थित एक मेडिकल स्टोर पर इंजेक्शन लगाने के बाद 17 वर्ष की किशोरी की मौत के बाद गैर प्रशिक्षित लोगों के द्वारा इलाज करने का मामला फिर चर्चा में आ गया है। ऐसा पहली बार नहीं है पहले भी कई मामले प्रकाश में आ चुके हैं। प्रशासन कुछ दिन सख्ती बरतता है फिर सबकुछ पुराने ढर्रे पर आ जाता है।
जिले में लोगों की जिंदगी से झोलाछाप और कई मेडिकल स्टोर संचालक खेल रहे हैं। सूत्रों की माने तो मेडिकल स्टोर की आड़ में कई संचालक बकायदा क्लीनिक संचालित कर रहे हैं। मामूली परेशानी होने पर लोग सीधे मेडिकल स्टोर पहुंच जाते हैं। मेडिकल स्टोर संचालक बकायदा उनकी सूई-दवाई करता है। ऐसे में लापरवाही के चलते लोगों की मौत तक के मामले सामने आ चुके हैं। नियम के अनुसार मेडिकल स्टोर संचालक का काम केवल दवा बिक्री का है। वह इलाज नहीं कर सकते। इसके बाद भी कई मेडिकल स्टोर संचालक नियमों को दरकिनार कर रुपयों की लालच में क्लीनिक संचालित कर रहे हैं।
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विभाग की कार्यशैली पर सवाल
अधिवक्ता आलोक मिश्रा का कहना है कि अल्पज्ञान लेकर मरीजों को मौत के मुंह में डालने वालों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी पर यह धंधा चल रहा है। वहीं किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष रामाशीष का कहना है कि मेडिकल स्टोर की आड़ में क्लीनिक चलाने वालों पर स्वास्थ्य विभाग को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। ताकि कोई असमय मौत के मुंह में न जाए।
जांच में उलझ जाते हैं परिजन
मेडिकल स्टोर संचालकों की लापरवाही से जब किसी की मौत का मामला सामने आता है तो स्वास्थ्य विभाग क्लीनिक या मेडिकल स्टोर को सील कर जांच का खेल खेलती है। कई बार जांच के नाम पर परिजनों को दौड़ाया जाता है। पीड़ित पुलिस और विभाग का दौड़ लगाते-लगाते जब थक जाता है तो वह अपने काम में व्यस्त हो जाता है। इसके बाद मामला मैनेज हो जाता है और मेडिकल स्टोर का दोबारा संचालन होने लगता है।
केस -1
11 फरवरी को कोठीभार थाना क्षेत्र के ग्रामसभा कटहरी बाजार में शीतलापुर निवासी सुभावली देवी की एक मेडिकल स्टोर में इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई थी। घटना के बाद संचालक फरार हो गया था।
केस दो
29 मार्च की शाम सदर कोतवाली क्षेत्र के अमरुतिया गांव के पासी टोला के रामसवार की 17 वर्षीय बेटी मोनिका को हल्का बुखार होने पर गांव के मेडिकल स्टोर ले जाया गया। यहां संचालक ने इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगने के आधे घंटे के बाद लड़की को चक्कर आने लगे और जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
वर्जन
टीम गठित कर किशोरी की मौत मामले की जांच की जा रही है। अभियान चलाकर अवैध मेडिकल स्टोर संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-नवनाथ प्रसाद, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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मेडिकल स्टोर संचालक केवल दवा बेच सकते हैं। वह किसी का इलाज नहीं कर सकते हैं। इस तरह की शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाती है।
-नवीन कुमार, ड्रग इंस्पेक्टर
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तो मेडिकल स्टोर संचालक के पिता ने लगाया था इंजेक्शन
29 मार्च की शाम सदर कोतवाली क्षेत्र के अमरुतिया गांव के पासी टोला के रामसवार की बेटी मोनिका (17) की मौत मामले में परिजनों का आरोप है कि पिता-पुत्र दोनों मेडिकल स्टोर संचालित करते थे। उस दिन बुखार होने पर वह मेडिकल स्टोर में ले गए तो मेडिकल स्टोर संचालक के पिता ने इंजेक्शन लगाया। इसके बाद मोनिका की तबीयत बिगड़ने लगी। जिला अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। उधर पुलिस आरोपी पिता पुत्र के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
वर्जन
पिता-पुत्र के ऊपर मुकदमा दर्ज है। दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अंकुर गौतम, सीओ सदर
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