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Maharajganj News: सहालग में मिलावटी दूध खपाने की तैयारी, धंधेबाजों के एजेंट ले रहे ऑर्डर
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फरेंदा मार्ग पर बन रहा पनीर।
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महराजगंज। सहालग नजदीक आते ही मिलावटी दूध के धंधेबाजों ने सक्रियता बढ़ा दी है। ऑर्डर के अनुसार बाहर से मिलावटी खोया, पनीर मंगाने की तैयारी की जा रही है। धंधेबाजों का नेटवर्क पूरे जिले में सक्रिय है। नेटवर्क जरिये सस्ते रेट का लालच देकर दूध से लेकर खोआ, पनीर की बुकिंग की जा रही है। मिलावट के इस खेल में खुद को सुरक्षित रखने के लिए धंधेबाज तैयार सामान को अपने पास नहीं रखते हैं। धंधेबाज बुकिंग की तिथि पर सीधे ग्राहक को सामान भेज देते हैं।
सूत्र बता रहे हैं कि धंधेबाजों सीधे काम करने की बजाए अपने एजेंटों के माध्यम से बुकिंग ले रहे हैं। खोआ कानपुर की मंडी से और पनीर गोरखपुर की मंडी के मंगाया जा रहा है। आवश्यकतानुसार स्थानीय स्तर पर भी मिलावटी दूध से सामान तैयार कर लिया जाता है। शहर से दूर वन क्षेत्र के गांवों में मिलावटी पनीर धंधेबाज बनाते हैं। इन क्षेत्रों में किसी की नजर नहीं पड़ती है। आम तौर पर यहां पहुंचना भी मुश्किल होता है।
इन दिनों पनीर की बुकिंग 330 से 350 रुपये प्रति किलो की दर से करने की सामने आ रही है। जबकि जानकार बताते हैं कि एक किलो पनीर के लिए 300 रुपये से अधिक का दूध लग जाता है। प्रोसेसिंग चार्ज अलग से जोड़ने पर पनीर की न्यूनतम लागत 300 से 350 रुपये प्रतिकिलो तक पहुंच जाती है।
सूत्र बता रहे हैं कि सहालग के शुरुआत में ही करीब सात टन पनीर की बुकिंग हो चुकी है। जबकि पांच टन खोआ और करीब चार हजार लीटर दूध की बुकिंग की बात सामने आ रही है। इस बुकिंग को पूरा करने के लिए मिलावट करने का खेल जारी है। सहालग को देखते हुए धंधेबाजाें ने अपने हिसाब से व्यवस्था बना ली है। विभाग की कार्रवाई से बचने के लिए धंधेबाजों ने नेटवर्क मजबूत कर लिया है।
एक पैकेट पाउडर से तैयार कर रहे आठ लीटर दूध : दूध की बिक्री करने वाले एक युवक ने बताया कि सहालग में मांग अधिक हो जाती है। ऐसे में पाउडर वाले दूध को मिलाकर काम चलाना पड़ता है। एक पैकेट पाउडर के दूध से कम से कम आठ से नौ लीटर दूध आसानी से बन जाता है। इसे मिलाकर मांग पूरी की दी जाती है। घरों में गाय का दूध 50 तो भैंस का 60 रुपये प्रति लीटर दिया जाता है। पानी के अलावा कुछ नहीं मिलाया जाता है। रेट भी समय के हिसाब से घटता बढ़ता है।
दूध और पनीर में फैट कम मिला था : खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, बीते वर्ष दूध के 11 नमूने लिए गए थे। इसमें नौ की रिपोर्ट अधोमानक मिली। इस मामले में 1,96,000 रुपये जुर्माना लगाया गया था। जांच रिपोर्ट में बताया गया कि दूध में फैट कम मिला था।
इससे सेहत को कुछ खास नुकसान नहीं होता है। पनीर के 24 नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। इनमें आठ अधोमानक मिले। रिपोर्ट में फैट कम होने की जानकारी मिली थी।
किडनी और हृदय को पहुंचाता है नुकसान : जिला अस्पताल में आयुष अनुभाग के डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि पनीर मिलावट है तो लीवर, किडनी और हृदय को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए लोगों को मिलावटी पनीर या दूध का सेवन करने से बचना चाहिए। लीवर से संबंधित मरीजों को प्रोटीन की जरूरत होती है। ऐसे में मरीजों को पनीर या अंडा का सेवन करना पड़ता है। शाकाहारी मरीज को पनीर खाना पड़ता है। 100 ग्राम शुद्ध पनीर में 25 ग्राम प्रोटीन और करीब 20 ग्राम फैट होता है। इसके अलावा 4.5 ग्राम काब्रोहाइड्रेड व कैलशियम 4.5 मिलीग्राम होता है। इससे हड्डी का विकास होने के साथ इसे मजबूती मिलती है।
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सूत्र बता रहे हैं कि धंधेबाजों सीधे काम करने की बजाए अपने एजेंटों के माध्यम से बुकिंग ले रहे हैं। खोआ कानपुर की मंडी से और पनीर गोरखपुर की मंडी के मंगाया जा रहा है। आवश्यकतानुसार स्थानीय स्तर पर भी मिलावटी दूध से सामान तैयार कर लिया जाता है। शहर से दूर वन क्षेत्र के गांवों में मिलावटी पनीर धंधेबाज बनाते हैं। इन क्षेत्रों में किसी की नजर नहीं पड़ती है। आम तौर पर यहां पहुंचना भी मुश्किल होता है।
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इन दिनों पनीर की बुकिंग 330 से 350 रुपये प्रति किलो की दर से करने की सामने आ रही है। जबकि जानकार बताते हैं कि एक किलो पनीर के लिए 300 रुपये से अधिक का दूध लग जाता है। प्रोसेसिंग चार्ज अलग से जोड़ने पर पनीर की न्यूनतम लागत 300 से 350 रुपये प्रतिकिलो तक पहुंच जाती है।
सूत्र बता रहे हैं कि सहालग के शुरुआत में ही करीब सात टन पनीर की बुकिंग हो चुकी है। जबकि पांच टन खोआ और करीब चार हजार लीटर दूध की बुकिंग की बात सामने आ रही है। इस बुकिंग को पूरा करने के लिए मिलावट करने का खेल जारी है। सहालग को देखते हुए धंधेबाजाें ने अपने हिसाब से व्यवस्था बना ली है। विभाग की कार्रवाई से बचने के लिए धंधेबाजों ने नेटवर्क मजबूत कर लिया है।
एक पैकेट पाउडर से तैयार कर रहे आठ लीटर दूध : दूध की बिक्री करने वाले एक युवक ने बताया कि सहालग में मांग अधिक हो जाती है। ऐसे में पाउडर वाले दूध को मिलाकर काम चलाना पड़ता है। एक पैकेट पाउडर के दूध से कम से कम आठ से नौ लीटर दूध आसानी से बन जाता है। इसे मिलाकर मांग पूरी की दी जाती है। घरों में गाय का दूध 50 तो भैंस का 60 रुपये प्रति लीटर दिया जाता है। पानी के अलावा कुछ नहीं मिलाया जाता है। रेट भी समय के हिसाब से घटता बढ़ता है।
दूध और पनीर में फैट कम मिला था : खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, बीते वर्ष दूध के 11 नमूने लिए गए थे। इसमें नौ की रिपोर्ट अधोमानक मिली। इस मामले में 1,96,000 रुपये जुर्माना लगाया गया था। जांच रिपोर्ट में बताया गया कि दूध में फैट कम मिला था।
इससे सेहत को कुछ खास नुकसान नहीं होता है। पनीर के 24 नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। इनमें आठ अधोमानक मिले। रिपोर्ट में फैट कम होने की जानकारी मिली थी।
किडनी और हृदय को पहुंचाता है नुकसान : जिला अस्पताल में आयुष अनुभाग के डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि पनीर मिलावट है तो लीवर, किडनी और हृदय को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए लोगों को मिलावटी पनीर या दूध का सेवन करने से बचना चाहिए। लीवर से संबंधित मरीजों को प्रोटीन की जरूरत होती है। ऐसे में मरीजों को पनीर या अंडा का सेवन करना पड़ता है। शाकाहारी मरीज को पनीर खाना पड़ता है। 100 ग्राम शुद्ध पनीर में 25 ग्राम प्रोटीन और करीब 20 ग्राम फैट होता है। इसके अलावा 4.5 ग्राम काब्रोहाइड्रेड व कैलशियम 4.5 मिलीग्राम होता है। इससे हड्डी का विकास होने के साथ इसे मजबूती मिलती है।
