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Maharajganj News: जांच न पड़ताल शुद्धता के नाम पर धड़ल्ले से बिक रहा आरओ का पानी
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आरओ प्लांट में भी नहीं रखा जा रहा है सफाई का ध्यान
जनवरी में दो प्लांटों से लिए गए थे जांच के लिए नमूने, अभी तक नहीं मिली रिपोर्ट
महराजगंज। शुद्ध पेयजल के दावे के साथ जनपद में धड़ल्ले से जार वाले पानी की बिक्री की जा रही है। टैंपो पर पानी की टंकी रखकर घर-घर और ज्यादातर दुकानों पर पानी पहुंचाया जा रहा है। जबकि इनके शुद्धता के दावे संदिग्ध हैं। यह कारोबार बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहा है। कई आरओ प्लांटों में पर्याप्त सफाई भी नहीं रहती है। विभाग भी मामले में गंभीरता नहीं बरत रहा है। जनवरी में दो प्लांटों से जांच के लिए नमूने लिए गए थे लेकिन अभी तक इनकी रिपोर्ट नहीं मिली है।
जनपद में शहरी इलाकों और कुछ गांवों में भी पाइप लाइन से पेयजल आपूर्ति की जा रही है। नगर पालिका शुद्ध पेयजल आपूर्ति का दावा करता है लेकिन लोग इस दावे पर यकीन नहीं कर पाते हैं। नतीजे के तौर पर जार वाले पानी का कारोबार जनपद में बढ़ता ही जा रहा है। शहरों में यह कारोबार तेजी से फलफूल रहा है। एक अनुमान के मुताबिक नगर पालिका के 25 मोहल्लों में 60 हजार की आबादी निवास करती है। इसमें नगर क्षेत्र में ही करीब 15 से 18 हजार लोग जार वाला पानी ही खरीदते हैं। एक जार के पानी के लिए प्रतिमाह लोग 450 से 600 रुपये तक भुगतान करते हैं।
जबकि जिस पानी की टंकी को टैंपो पर रखकर दुकानों और घरों में पानी पहुंचाया जाता है, उसकी नियमित सफाई तक नहीं होती है। कुछ दुकानदारों ने बताया कि आपूर्ति करने वाले जार भी गंदा रहता है।
जिले में दो बड़े प्लांट संचालित होते हैं। इसके अलावा 15 से ज्यादा प्लांट लगे हैं। छोटे प्लांटों में साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता है। शहर के अलावा आसपास के लोग भी आरओ का पानी खरीदकर पीते हैं। रविवार को पड़ताल के दौरान शहर में एक ऑटो दिखा जिस पर एक टंकी रखी गई थी। बाहर से टंकी साफ नहीं दिख रही थी। शहर में धड़ल्ले से आरओ प्लांट संचालित किया जा रहा है। इसके लिए कोई लाइसेंस लेने का नियम भी नहीं बनाया गया है।
जनपद में दो पानी की इकाइयां हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग ने जनवरी माह में दोनों इकाइयों से पानी के नमूने लिए थे। लेकिन अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं आई है। विभाग के अनुसार, रिपोर्ट आने के बाद की आगे की कार्रवाई की जाएगी। पिछले साल चार जांच के नमूने लिए गए थे।
गंदे पानी से सेहत हो सकती है खराब
जिला अस्पताल के डॉ. पवन कुमार सिंह ने बताया कि गंदा पानी पीने से दस्त (डायरिया), उल्टी, पेचिश और पेट में दर्द हो सकता है। दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी हो सकती है। दूषित पानी में वायरस बैक्टिया होते हैं, जो सेहत खराब कर देते हैं। इसके चलते शुद्ध पानी का ही सेवन करना चाहिए।
घर, कार्यालय व दुकान पर दिख रहा जार का पानी
नगर समेत ग्रामीण क्षेत्रों में मिनरल वाटर की मांग बढ़ी है। वजह आरओ प्लांट संचालक 15 से 20 रुपये में लोगों के घर तक पानी पहुंचाते हैं। आलम यह है कि सरकारी कार्यालय हो, विद्यालय, डॉक्टर की क्लीनिक व छोटी बड़ी दुकानों पर आरओ का जार का पानी मिल जाएगा। कारण बाजार में मिनरल वाटर के एक लीटर की बोतल 20 रुपये व दो लीटर 30 रुपये में मिलती है। ऐसे में 20-30 रुपये में 20 लीटर शुद्ध पानी को फायदे का सौदा मानकर लोग इसे खरीद रहे हैं।
नहीं होती कोई जांच
खाद्य सुरक्षा विभाग जार वाले पानी की जांच नहीं करता है। विभाग केवल पैकेट बंद और बोतल वाले पानी की जांच करता है। जांच और लाइसेंस की बाध्यता न होने के कारण लोग आज के समय में धड़ल्ले से आरओ प्लांट लगा रहे हैं। लोग शुद्ध पानी के नाम पर खरीद भी रहे हैं।
यह हैं आरओ प्लांट के नियम
आरओ प्लांट का संचालन करने वालों को बीआईएस, फूड सेफ्टी विभाग के सर्टिफिकेट के साथ ही भूगर्भ जल विभाग की एनओसी का होना अनिवार्य है। साथ ही फ्लो और वाटर मीटर, रूफ टॉफ हार्वेस्टिंग सिस्टम के अलावा पानी की होने वाली जांच की कुल रिपोर्ट देनी होती है। वहीं पैक्ड वाटर की सप्लाई करने वालों को उक्त के अलावा प्रदेश सरकार का वाटर टेस्टिंग सर्टिफिकेट देना होता है। जिम्मेदार अफसर प्लांट संचालकों पर कार्रवाई की जहमत नहीं उठा रहे हैं। जिससे आमजन के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है।
वर्जन
दुकान के लिए जार का पानी मंगाता हूं। आजकल टोटी का पानी कोई नहीं पीना चाहता है। जिस जार में पानी दिया जाता है वह साफ भी नहीं रहता है।
-रवि गोयनका
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दुकान के लिए लोग जार का पानी मंगाते हैं। इसमें शुद्धता की कोई गारंटी नहीं रहती है। इसके लिए कोई मानक भी नहीं है।
-निखिल टिबड़ेवाल
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समय-समय पर पानी की इकाइयों की जांच की जाती है। खुले जार के पानी की जांच नहीं की जाती है।
-केके उपाध्याय, खाद्य सुरक्षा अधिकारी
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जनवरी में दो प्लांटों से लिए गए थे जांच के लिए नमूने, अभी तक नहीं मिली रिपोर्ट
महराजगंज। शुद्ध पेयजल के दावे के साथ जनपद में धड़ल्ले से जार वाले पानी की बिक्री की जा रही है। टैंपो पर पानी की टंकी रखकर घर-घर और ज्यादातर दुकानों पर पानी पहुंचाया जा रहा है। जबकि इनके शुद्धता के दावे संदिग्ध हैं। यह कारोबार बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहा है। कई आरओ प्लांटों में पर्याप्त सफाई भी नहीं रहती है। विभाग भी मामले में गंभीरता नहीं बरत रहा है। जनवरी में दो प्लांटों से जांच के लिए नमूने लिए गए थे लेकिन अभी तक इनकी रिपोर्ट नहीं मिली है।
जनपद में शहरी इलाकों और कुछ गांवों में भी पाइप लाइन से पेयजल आपूर्ति की जा रही है। नगर पालिका शुद्ध पेयजल आपूर्ति का दावा करता है लेकिन लोग इस दावे पर यकीन नहीं कर पाते हैं। नतीजे के तौर पर जार वाले पानी का कारोबार जनपद में बढ़ता ही जा रहा है। शहरों में यह कारोबार तेजी से फलफूल रहा है। एक अनुमान के मुताबिक नगर पालिका के 25 मोहल्लों में 60 हजार की आबादी निवास करती है। इसमें नगर क्षेत्र में ही करीब 15 से 18 हजार लोग जार वाला पानी ही खरीदते हैं। एक जार के पानी के लिए प्रतिमाह लोग 450 से 600 रुपये तक भुगतान करते हैं।
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जबकि जिस पानी की टंकी को टैंपो पर रखकर दुकानों और घरों में पानी पहुंचाया जाता है, उसकी नियमित सफाई तक नहीं होती है। कुछ दुकानदारों ने बताया कि आपूर्ति करने वाले जार भी गंदा रहता है।
जिले में दो बड़े प्लांट संचालित होते हैं। इसके अलावा 15 से ज्यादा प्लांट लगे हैं। छोटे प्लांटों में साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता है। शहर के अलावा आसपास के लोग भी आरओ का पानी खरीदकर पीते हैं। रविवार को पड़ताल के दौरान शहर में एक ऑटो दिखा जिस पर एक टंकी रखी गई थी। बाहर से टंकी साफ नहीं दिख रही थी। शहर में धड़ल्ले से आरओ प्लांट संचालित किया जा रहा है। इसके लिए कोई लाइसेंस लेने का नियम भी नहीं बनाया गया है।
जनपद में दो पानी की इकाइयां हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग ने जनवरी माह में दोनों इकाइयों से पानी के नमूने लिए थे। लेकिन अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं आई है। विभाग के अनुसार, रिपोर्ट आने के बाद की आगे की कार्रवाई की जाएगी। पिछले साल चार जांच के नमूने लिए गए थे।
गंदे पानी से सेहत हो सकती है खराब
जिला अस्पताल के डॉ. पवन कुमार सिंह ने बताया कि गंदा पानी पीने से दस्त (डायरिया), उल्टी, पेचिश और पेट में दर्द हो सकता है। दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी हो सकती है। दूषित पानी में वायरस बैक्टिया होते हैं, जो सेहत खराब कर देते हैं। इसके चलते शुद्ध पानी का ही सेवन करना चाहिए।
घर, कार्यालय व दुकान पर दिख रहा जार का पानी
नगर समेत ग्रामीण क्षेत्रों में मिनरल वाटर की मांग बढ़ी है। वजह आरओ प्लांट संचालक 15 से 20 रुपये में लोगों के घर तक पानी पहुंचाते हैं। आलम यह है कि सरकारी कार्यालय हो, विद्यालय, डॉक्टर की क्लीनिक व छोटी बड़ी दुकानों पर आरओ का जार का पानी मिल जाएगा। कारण बाजार में मिनरल वाटर के एक लीटर की बोतल 20 रुपये व दो लीटर 30 रुपये में मिलती है। ऐसे में 20-30 रुपये में 20 लीटर शुद्ध पानी को फायदे का सौदा मानकर लोग इसे खरीद रहे हैं।
नहीं होती कोई जांच
खाद्य सुरक्षा विभाग जार वाले पानी की जांच नहीं करता है। विभाग केवल पैकेट बंद और बोतल वाले पानी की जांच करता है। जांच और लाइसेंस की बाध्यता न होने के कारण लोग आज के समय में धड़ल्ले से आरओ प्लांट लगा रहे हैं। लोग शुद्ध पानी के नाम पर खरीद भी रहे हैं।
यह हैं आरओ प्लांट के नियम
आरओ प्लांट का संचालन करने वालों को बीआईएस, फूड सेफ्टी विभाग के सर्टिफिकेट के साथ ही भूगर्भ जल विभाग की एनओसी का होना अनिवार्य है। साथ ही फ्लो और वाटर मीटर, रूफ टॉफ हार्वेस्टिंग सिस्टम के अलावा पानी की होने वाली जांच की कुल रिपोर्ट देनी होती है। वहीं पैक्ड वाटर की सप्लाई करने वालों को उक्त के अलावा प्रदेश सरकार का वाटर टेस्टिंग सर्टिफिकेट देना होता है। जिम्मेदार अफसर प्लांट संचालकों पर कार्रवाई की जहमत नहीं उठा रहे हैं। जिससे आमजन के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है।
वर्जन
दुकान के लिए जार का पानी मंगाता हूं। आजकल टोटी का पानी कोई नहीं पीना चाहता है। जिस जार में पानी दिया जाता है वह साफ भी नहीं रहता है।
-रवि गोयनका
दुकान के लिए लोग जार का पानी मंगाते हैं। इसमें शुद्धता की कोई गारंटी नहीं रहती है। इसके लिए कोई मानक भी नहीं है।
-निखिल टिबड़ेवाल
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समय-समय पर पानी की इकाइयों की जांच की जाती है। खुले जार के पानी की जांच नहीं की जाती है।
-केके उपाध्याय, खाद्य सुरक्षा अधिकारी