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Maharajganj News: 3.5 हेक्टेयर जमीन पर भी दुकानें बनवाकर किराया वसूल रहे मुतवल्ली
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खूनीपुर मस्जिद के नाम शेष बचे रकबे पर दुकान।
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राजस्व अभिलेखों में अभी भी खूनीपुर मस्जिद के नाम दर्ज है 3.5 हेक्टेयर जमीन
2022 में निर्माण की शिकायत पर एसडीएम ने दिया था आदेश
महराजगंज। जनपद के खुटहां मुड़िला में सैकड़ों एकड़ वक्फ संपत्ति का शेष हिस्सा भी महफूज नहीं है। राजस्व अभिलेखों में खूनीपुर मस्जिद साहबगंज के नाम दर्ज 3.49 हेक्टेयर जमीन पर मौजूदा मुतवल्ली शकील अहमद के भाई जमील अहमद ने दुकानों का निर्माण करा दिया है। दुकानों का किराया वसूलकर उनके कारिंदे उन तक पहुंचाते हैं।
जानकारी के अनुसार, दुकानों का निर्माण होने के दौरान वक्फ संपत्ति पर निर्माण कराए जाने की शिकायत पर 13 जून 2022 को तत्कालीन एसडीएम ने सदर तहसीलदार व पनियरा थाने के प्रभारी निरीक्षक को निर्देश पत्र भी जारी किया था। बावजूद इसके निर्माण पूरा करा लिया गया।
खुटहांव पोस्ट खुटहां बाजार के मो. अमीन अंसारी ने बताया कि उन्होंने वक्फ मिल्कियत के स्वामित्व हस्तांतरण व बिक्री को लेकर स्थानीय अधिकारियों से लेकर वक्फ बोर्ड तक करीब 12 बार शिकायती पत्र दिया। इसके बावजूद प्रशासन और वक्फ बोर्ड सिर्फ पत्राचार करते रहे। कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा सकी। यहां तक कि मौजूदा समय में जो 3.49 हेक्टेयर जमीन खूनीपुर मस्जिद के नाम पर शेष बची है इस पर दुकान निर्माण के वक्त शिकायत भी की गई।
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तत्कालीन एसडीएम ने 13 जून को सदर तहसीलदार व प्रभारी निरीक्षक थाना पनियरा को निर्देश पत्र जारी किया कि वक्फ की जमीन पर निर्माण कार्य न होने दिया जाए, बावजूद इसके अभिलेखीय हेरफेर के जरिये 3.49 हेक्टेयर पर मौजूदा मुतवल्ली शकील के भाई जमील ने दुकानों का निर्माण पूरा करा लिया। आज भी इन दुकानों का किराया वसूल किया जाता है।
कौड़ियों में बिकी जमीन तो मिलते गए खरीदार
सदर तहसील क्षेत्र के खुटहां-मुड़िला में वक्फ की संपत्तियां मुतवल्ली व उनके लोगों ने अपने नाम चढ़वा कर कौड़ियों के भाव बेचीं। इसी वजह से वक्फ की मिल्कियत को खरीदार मिलते गए। स्थानीय जुम्मन अंसारी से दान मिली 775 बीघा जमीन 150 से अधिक लोगों ने खरीदी हैं। वक्फ की जमीन किसी व्यक्ति विशेष के नाम न तो स्थानांतरित हो सकती है और न ही बिक सकती है। लेकिन अभिलेखों में हेराफेरी कर मुतवल्ली ने पहले जमीन अपने परिजनों के नाम कराई। इसके बाद औने-पौने दाम पर बिक्री कर दी गई। मामला चर्चा में आने व वक्फ संशोधन 2025 से बढ़े प्रशासनिक अधिकार की चर्चा के बीच खरीदार अधिवक्ताओं के चक्कर लगाने लगे हैं।
वर्जन
खुटहां-मुड़िला में 775 बीघा जमीन व बाग क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्ति रहे जुम्मन अंसारी ने दान किया था जो जुम्मन के बाद वक्फ की मिल्कियत के रूप में खूनीपुर मस्जिद गोरखपुर के नाम दर्ज हुई। अभिलेखों में हेरफेर कर वक्फ संपत्तियां बेची गईं। इसकी शिकायत अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, जिला प्रशासन व वक्फ बोर्ड तक कई बार किया गया लेकिन किसी ने वक्फ की मिल्कियत बचाने की दिशा में सहयोग नहीं किया। वक्फ संशोधन 2025 के बाद विभाग वक्फ संपत्तियों को उम्मीद पोर्टल पर सूचीबद्ध कर रहा था। तब मैंने पूरे मामले को एक बार फिर डीएमओ के समक्ष पिछले माह रखा। विभाग से आश्वासन मिला है।
-मो. अमीन अंसारी, निवासी खुटहां बाजार
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खुटहां बाजार निवासी अधिवक्ता मो. अमीन की तरफ से 775 बीघे वक्फ संपत्ति में हेराफेरी व बिक्री के संदर्भित शिकायत व साक्ष्य इत्यादि उपलब्ध कराया गया। इस पूरे प्रकरण की जानकारी विभागीय आख्या के साथ वक्फ ट्रिब्यूनल भेजा गया है। निर्देश मिलते ही इस प्रकरण में कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
- तन्मय पांडेय, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, महराजगंज
2022 में निर्माण की शिकायत पर एसडीएम ने दिया था आदेश
महराजगंज। जनपद के खुटहां मुड़िला में सैकड़ों एकड़ वक्फ संपत्ति का शेष हिस्सा भी महफूज नहीं है। राजस्व अभिलेखों में खूनीपुर मस्जिद साहबगंज के नाम दर्ज 3.49 हेक्टेयर जमीन पर मौजूदा मुतवल्ली शकील अहमद के भाई जमील अहमद ने दुकानों का निर्माण करा दिया है। दुकानों का किराया वसूलकर उनके कारिंदे उन तक पहुंचाते हैं।
जानकारी के अनुसार, दुकानों का निर्माण होने के दौरान वक्फ संपत्ति पर निर्माण कराए जाने की शिकायत पर 13 जून 2022 को तत्कालीन एसडीएम ने सदर तहसीलदार व पनियरा थाने के प्रभारी निरीक्षक को निर्देश पत्र भी जारी किया था। बावजूद इसके निर्माण पूरा करा लिया गया।
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खुटहांव पोस्ट खुटहां बाजार के मो. अमीन अंसारी ने बताया कि उन्होंने वक्फ मिल्कियत के स्वामित्व हस्तांतरण व बिक्री को लेकर स्थानीय अधिकारियों से लेकर वक्फ बोर्ड तक करीब 12 बार शिकायती पत्र दिया। इसके बावजूद प्रशासन और वक्फ बोर्ड सिर्फ पत्राचार करते रहे। कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा सकी। यहां तक कि मौजूदा समय में जो 3.49 हेक्टेयर जमीन खूनीपुर मस्जिद के नाम पर शेष बची है इस पर दुकान निर्माण के वक्त शिकायत भी की गई।
तत्कालीन एसडीएम ने 13 जून को सदर तहसीलदार व प्रभारी निरीक्षक थाना पनियरा को निर्देश पत्र जारी किया कि वक्फ की जमीन पर निर्माण कार्य न होने दिया जाए, बावजूद इसके अभिलेखीय हेरफेर के जरिये 3.49 हेक्टेयर पर मौजूदा मुतवल्ली शकील के भाई जमील ने दुकानों का निर्माण पूरा करा लिया। आज भी इन दुकानों का किराया वसूल किया जाता है।
कौड़ियों में बिकी जमीन तो मिलते गए खरीदार
सदर तहसील क्षेत्र के खुटहां-मुड़िला में वक्फ की संपत्तियां मुतवल्ली व उनके लोगों ने अपने नाम चढ़वा कर कौड़ियों के भाव बेचीं। इसी वजह से वक्फ की मिल्कियत को खरीदार मिलते गए। स्थानीय जुम्मन अंसारी से दान मिली 775 बीघा जमीन 150 से अधिक लोगों ने खरीदी हैं। वक्फ की जमीन किसी व्यक्ति विशेष के नाम न तो स्थानांतरित हो सकती है और न ही बिक सकती है। लेकिन अभिलेखों में हेराफेरी कर मुतवल्ली ने पहले जमीन अपने परिजनों के नाम कराई। इसके बाद औने-पौने दाम पर बिक्री कर दी गई। मामला चर्चा में आने व वक्फ संशोधन 2025 से बढ़े प्रशासनिक अधिकार की चर्चा के बीच खरीदार अधिवक्ताओं के चक्कर लगाने लगे हैं।
वर्जन
खुटहां-मुड़िला में 775 बीघा जमीन व बाग क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्ति रहे जुम्मन अंसारी ने दान किया था जो जुम्मन के बाद वक्फ की मिल्कियत के रूप में खूनीपुर मस्जिद गोरखपुर के नाम दर्ज हुई। अभिलेखों में हेरफेर कर वक्फ संपत्तियां बेची गईं। इसकी शिकायत अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, जिला प्रशासन व वक्फ बोर्ड तक कई बार किया गया लेकिन किसी ने वक्फ की मिल्कियत बचाने की दिशा में सहयोग नहीं किया। वक्फ संशोधन 2025 के बाद विभाग वक्फ संपत्तियों को उम्मीद पोर्टल पर सूचीबद्ध कर रहा था। तब मैंने पूरे मामले को एक बार फिर डीएमओ के समक्ष पिछले माह रखा। विभाग से आश्वासन मिला है।
-मो. अमीन अंसारी, निवासी खुटहां बाजार
खुटहां बाजार निवासी अधिवक्ता मो. अमीन की तरफ से 775 बीघे वक्फ संपत्ति में हेराफेरी व बिक्री के संदर्भित शिकायत व साक्ष्य इत्यादि उपलब्ध कराया गया। इस पूरे प्रकरण की जानकारी विभागीय आख्या के साथ वक्फ ट्रिब्यूनल भेजा गया है। निर्देश मिलते ही इस प्रकरण में कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
- तन्मय पांडेय, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, महराजगंज