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Maharajganj News: अब हम क्या मांग करें, हमारी तो बुढ़ापे की लाठी ही टूट गई
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खनुआ के शेख फरेंदा गांव में गेट का निर्माण करते मजदूर।
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खनुआ के शेख फरेंदा गांव में अमृत सरोवर परिसर का गेट गिरने से 12 वर्षीय बालक की मौत का मामला
बच्चे के पिता का आरोप- पिलर में नहीं लगाया गया था सरिया
महराजगंज। निर्माण कार्यों में की गई एक मासूम की मौत का कारण बन गई। सोनौली कोतवाली क्षेत्र के शेख फरेंदा गांव में शनिवार को अमृत सरोवर परिसर का गेट गिरने से उसके नीचे दबकर 12 वर्षीय बालक की मौत हो गई थी। घटना के बाद से ही पीड़ित परिवार में मातम का माहौल है।
रविवार को अमर उजाला से बातचीत के दौरान मृतक विकास उर्फ विक्की के पिता वीरेंद्र यादव कार्रवाई की मांग के सवाल का जवाब देते हुए रोने लगे। उन्होंने रोते कहा कि सरकार से हम क्या मांग करें...हमारी तो बुढ़ापे की लाठी ही टूट गई। उन्होंने अमृत सरोवर परिसर में हुए विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि अगर पहले ही मजबूती से अमृत सरोवर पर लगे ईंट के पिलर में सरिया या कंक्रीट डाला गया होता तो यह हादसा नहीं होता।
हादसे के बाद जिम्मेदार जागे और पिलर का निर्माण शुरू करा दिया। हालांकि डीएम के निर्देश पर मामले की जांच के लिए तीन सदस्यों की टीम गठित कर दी गई है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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रविवार को मृतक विकास उर्फ विक्की के चाचा जनार्दन ने आरोप लगाया कि अमृत सरोवर परिसर के गेट का निर्माण मानकों के अनुसार नहीं किया गया था। उसमें ना तो सरिया लगाया गया था और न ही उचित मात्रा में सीमेंट व गिट्टी का इस्तेमाल किया गया था। केवल ईंट का पिलर बनवाकर गेट जाम कर दिया गया था। इसी वजह से गेट में मजबूती नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण यह घटना हुई है।
कहने को तो अमृत सरोवर सुविधाएं नदारद
सोनौली कोतवाली क्षेत्र के शेख फरेंदा गांव में 2024-25 में अमृत सरोवर के नाम पर तालाब का सुंदरीकरण कराया गया। लेकिन सुविधाएं केवल कागजों में ही दिख रही हैं। पोखरी के चारों तरफ से तारबाड़ लगा दिया गया है। ना तो कोई पक्का निर्माण है ना लोगों के टहलने के लिए या बैठने के लिए बेंच लगाया गया है। परिसर में लगे बोर्ड पर पौधे रोपने की जानकारी दी गई है लेकिन परिसर में कोई वृक्ष नहीं दिखाई दे रहा है। पोखरे का गाटा संख्या 399 है जिसकी रकबा लगभग एक एकड़ से अधिक है। अमृत सरोवर का सुंदरीकरण मनरेगा के तहत वर्ष 2024-25 में हुआ था।
बताया जा रहा है कि ईंट और लोकल बालू गिरवाकर रविवार को पिलर का निर्माण शुरू कर दिया गया है। इस बार सरिया, सीमेंट, गिट्टी बालू के मिश्रण से पिलर लगाया जा रहा है। पहले ही अगर यही काम हो गया होता तो शायद विक्की की मौत नहीं होती।
ट्रैक्टर की ठोकर से कमजोर हो गया था पिलर
ग्राम प्रधान रामबचन उर्फ महेंद्र यादव ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024 -25 में अमृत सरोवर का सुंदरीकरण हुआ था। मनरेगा योजना से गेट का भी निर्माण हुआ था। उस समय मानक के हिसाब से निर्माण कराया गया था। ट्रैक्टर की ठोकर से कमजोर हो गया था। ट्रैक्टर मालिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने जा रहा था लेकिन उसने मरम्मत करा दिया था।
बच्चे के पिता का आरोप- पिलर में नहीं लगाया गया था सरिया
महराजगंज। निर्माण कार्यों में की गई एक मासूम की मौत का कारण बन गई। सोनौली कोतवाली क्षेत्र के शेख फरेंदा गांव में शनिवार को अमृत सरोवर परिसर का गेट गिरने से उसके नीचे दबकर 12 वर्षीय बालक की मौत हो गई थी। घटना के बाद से ही पीड़ित परिवार में मातम का माहौल है।
रविवार को अमर उजाला से बातचीत के दौरान मृतक विकास उर्फ विक्की के पिता वीरेंद्र यादव कार्रवाई की मांग के सवाल का जवाब देते हुए रोने लगे। उन्होंने रोते कहा कि सरकार से हम क्या मांग करें...हमारी तो बुढ़ापे की लाठी ही टूट गई। उन्होंने अमृत सरोवर परिसर में हुए विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि अगर पहले ही मजबूती से अमृत सरोवर पर लगे ईंट के पिलर में सरिया या कंक्रीट डाला गया होता तो यह हादसा नहीं होता।
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हादसे के बाद जिम्मेदार जागे और पिलर का निर्माण शुरू करा दिया। हालांकि डीएम के निर्देश पर मामले की जांच के लिए तीन सदस्यों की टीम गठित कर दी गई है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
रविवार को मृतक विकास उर्फ विक्की के चाचा जनार्दन ने आरोप लगाया कि अमृत सरोवर परिसर के गेट का निर्माण मानकों के अनुसार नहीं किया गया था। उसमें ना तो सरिया लगाया गया था और न ही उचित मात्रा में सीमेंट व गिट्टी का इस्तेमाल किया गया था। केवल ईंट का पिलर बनवाकर गेट जाम कर दिया गया था। इसी वजह से गेट में मजबूती नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण यह घटना हुई है।
कहने को तो अमृत सरोवर सुविधाएं नदारद
सोनौली कोतवाली क्षेत्र के शेख फरेंदा गांव में 2024-25 में अमृत सरोवर के नाम पर तालाब का सुंदरीकरण कराया गया। लेकिन सुविधाएं केवल कागजों में ही दिख रही हैं। पोखरी के चारों तरफ से तारबाड़ लगा दिया गया है। ना तो कोई पक्का निर्माण है ना लोगों के टहलने के लिए या बैठने के लिए बेंच लगाया गया है। परिसर में लगे बोर्ड पर पौधे रोपने की जानकारी दी गई है लेकिन परिसर में कोई वृक्ष नहीं दिखाई दे रहा है। पोखरे का गाटा संख्या 399 है जिसकी रकबा लगभग एक एकड़ से अधिक है। अमृत सरोवर का सुंदरीकरण मनरेगा के तहत वर्ष 2024-25 में हुआ था।
बताया जा रहा है कि ईंट और लोकल बालू गिरवाकर रविवार को पिलर का निर्माण शुरू कर दिया गया है। इस बार सरिया, सीमेंट, गिट्टी बालू के मिश्रण से पिलर लगाया जा रहा है। पहले ही अगर यही काम हो गया होता तो शायद विक्की की मौत नहीं होती।
ट्रैक्टर की ठोकर से कमजोर हो गया था पिलर
ग्राम प्रधान रामबचन उर्फ महेंद्र यादव ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024 -25 में अमृत सरोवर का सुंदरीकरण हुआ था। मनरेगा योजना से गेट का भी निर्माण हुआ था। उस समय मानक के हिसाब से निर्माण कराया गया था। ट्रैक्टर की ठोकर से कमजोर हो गया था। ट्रैक्टर मालिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने जा रहा था लेकिन उसने मरम्मत करा दिया था।