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Mahoba News: कंप्यूटरीकृत खतौनी न मिलने से किसान परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Sun, 25 Jan 2026 11:06 PM IST
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कुलपहाड़ (महोबा)। राजस्व विभाग की लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। कंप्यूटरीकृत खतौनी न मिलने से किसान परेशान हैं। इससे उन्हें किसान सम्मान निधि का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इससे किसानों में नाराजगी है।
कुलपहाड़ मौजे की चकबंदी प्रक्रिया वर्ष 2022 में पूरी हो चुकी है। धारा 52 के प्रकाशन के बाद से प्रत्येक समाधान दिवस में कुलपहाड़ मौजा की खतौनी कंप्यूटर में फीड करने की मांग की जा रही है। खतौनी न मिलने से 40 हजार की आबादी वाले कुलपहाड़ कस्बे के साथ ही ग्राम पंचायत सिरमौर, बम्होरी, अतरपठा, भटेवरा, बागौल, सुगिरा व कुलपहाड़ ग्रामीण के लोग परेशान हैं। शासन स्तर पर कुलपहाड़ को अलग कोड आवंटित नहीं किया गया। इससे कंप्यूटर से एक भी किसान की खतौनी नहीं निकल रही है।
कुलपहाड़ के वरिष्ठ अधिवक्ता मंटू बाबू और अयोध्या सिंह ने बताया कि लगभग 40 हजार किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड रिन्युअल नहीं हो पा रहे। उनके दाखिल खारिज की प्रक्रिया नहीं हो पा रही। खतौनी न होने से किसानों को सम्मान निधि का लाभ नहीं मिल रहा। फसल का बीमा भी नहीं हो पा रहा। भूमि की बिक्री नहीं हो पा रही। इस मामले को एमएलसी जितेंद्र सिंह सेंगर विधान परिषद में उठा चुके हैं। फिर भी राजस्व विभाग के जिम्मेदार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। उधर, एसडीएम डॉ. प्रदीप कुमार का कहना है कि कुलपहाड़ को कोड जारी कराने को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। बताया कि डीएम ने भी इस बावत शासन को कई पत्र लिखे हैं।
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कुलपहाड़ मौजे की चकबंदी प्रक्रिया वर्ष 2022 में पूरी हो चुकी है। धारा 52 के प्रकाशन के बाद से प्रत्येक समाधान दिवस में कुलपहाड़ मौजा की खतौनी कंप्यूटर में फीड करने की मांग की जा रही है। खतौनी न मिलने से 40 हजार की आबादी वाले कुलपहाड़ कस्बे के साथ ही ग्राम पंचायत सिरमौर, बम्होरी, अतरपठा, भटेवरा, बागौल, सुगिरा व कुलपहाड़ ग्रामीण के लोग परेशान हैं। शासन स्तर पर कुलपहाड़ को अलग कोड आवंटित नहीं किया गया। इससे कंप्यूटर से एक भी किसान की खतौनी नहीं निकल रही है।
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कुलपहाड़ के वरिष्ठ अधिवक्ता मंटू बाबू और अयोध्या सिंह ने बताया कि लगभग 40 हजार किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड रिन्युअल नहीं हो पा रहे। उनके दाखिल खारिज की प्रक्रिया नहीं हो पा रही। खतौनी न होने से किसानों को सम्मान निधि का लाभ नहीं मिल रहा। फसल का बीमा भी नहीं हो पा रहा। भूमि की बिक्री नहीं हो पा रही। इस मामले को एमएलसी जितेंद्र सिंह सेंगर विधान परिषद में उठा चुके हैं। फिर भी राजस्व विभाग के जिम्मेदार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। उधर, एसडीएम डॉ. प्रदीप कुमार का कहना है कि कुलपहाड़ को कोड जारी कराने को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। बताया कि डीएम ने भी इस बावत शासन को कई पत्र लिखे हैं।
