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Mahoba News: बीमा कंपनी को 45 दिन में ब्याज समेत भुगतान का आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Tue, 17 Mar 2026 12:46 AM IST
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महोबा। बीमाधारक के निधन के बाद परिवार ने क्लेम का दावा किया तो बीमा कंपनी ने दावा खारिज कर दिया। कोई रास्ता न देख परेशान परिवार ने न्याय की आस लगाकर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का सहारा लेकर परिवाद दाखिल किया। जिस पर चार साल व 11 माह के बाद आयोग के प्रधान न्यायाधीश ने बीमा कंपनी की ओर से खारिज किए गए मामले को उचित न मानते हुए 45 दिन के अंदर नॉमिनी को ब्याज समेत क्लेम का भुगतान करने के आदेश दिए हैं।
कस्बा चरखारी के सदर बाजार निवासी रविकरन गुप्ता और ऋषि गुप्ता भाई हैं। उनके पिता श्रीराम गुप्ता ने 17 जुलाई 2020 को रिलायंस निप्पोन लाइफ इन्क्रीजिंग इन्कम इंश्योरेंस प्लान क्रय किया था। जिसमें श्रीराम गुप्ता को हर साल 78,130 रुपये किस्त के रूप में अदा करने थे। बताया कि पिता श्रीराम गुप्ता ने जुलाई के पहले सप्ताह में बीमा पॉलिसी के लिए प्रस्ताव किया था। इसके बाद बीमा कंपनी ने अपने अधिकृत अस्पताल ग्लोबल हॉस्पिटल, राठ सड़क महोबा में पिता श्रीराम गुप्ता का मेडिकल कराया था। इसमें उनके पिता श्रीराम गुप्ता पूरी तरह से ठीक पाए गए थे और इसके बाद बीमा कंपनी ने उनका बीमा किया था। पिता ने एक वार्षिक किस्त 78,130 रुपये का भुगतान भी किया था। बीमा पॉलिसी शुरू होने के चार माह बाद नवंबर 2020 को उनके पिता श्रीराम गुप्ता की सीने में दर्द से मौत हो गई। इसकी सूचना बीमा कंपनी को दी गई और क्लेम का भुगतान करने की मांग की गई। भुगतान की धनराशि 8,10,524 रुपये थी।
रविकरन व ऋषि गुप्ता ने बताया कि एक माह बीतने के बाद जब क्लेम की धनराशि का भुगतान नहीं हुआ तो बीमा कंपनी के कार्यालय में संपर्क किया लेकिन उन्हें भुगतान करने से मना कर दिया गया और कोई कारण नहीं बताया गया। न्याय के लिए उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में शिकायत की और नौ फरवरी 2021 को बीमा कंपनी के मुख्य प्रबंधक महाराष्ट्र व शाखा प्रबंधक महोबा के खिलाफ परिवाद दाखिल किया। उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के प्रधान न्यायाधीश राघवेंद्र और न्यायाधीश विनोद कुमार तिवारी ने परिवाद के दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की ओर से प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों को देखा।
न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कंपनी को 45 दिन के अंदर परिवादी रविकरन गुप्ता व ऋषि गुप्ता को नियमों के अनुसार बीमा धनराशि 8,92,561 रुपये अदा करने का आदेश दिया। साथ ही मानसिक कष्ट के एवज में 15 हजार रुपये व वाद व्यय पांच हजार रुपये भी इसी 45 दिन के अंदर अदा करने के आदेश दिए हैं। प्रधान न्यायाधीश की ओर से आदेश में कहा गया कि अगर बीमा कंपनी समय पर भुगतान नहीं करती है तो सात प्रतिशत की जगह नौ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज की दर से भुगतान की तिथि तक का ब्याज भी देना होगा।
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रविकरन व ऋषि गुप्ता ने बताया कि एक माह बीतने के बाद जब क्लेम की धनराशि का भुगतान नहीं हुआ तो बीमा कंपनी के कार्यालय में संपर्क किया लेकिन उन्हें भुगतान करने से मना कर दिया गया और कोई कारण नहीं बताया गया। न्याय के लिए उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में शिकायत की और नौ फरवरी 2021 को बीमा कंपनी के मुख्य प्रबंधक महाराष्ट्र व शाखा प्रबंधक महोबा के खिलाफ परिवाद दाखिल किया। उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के प्रधान न्यायाधीश राघवेंद्र और न्यायाधीश विनोद कुमार तिवारी ने परिवाद के दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की ओर से प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों को देखा।
न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कंपनी को 45 दिन के अंदर परिवादी रविकरन गुप्ता व ऋषि गुप्ता को नियमों के अनुसार बीमा धनराशि 8,92,561 रुपये अदा करने का आदेश दिया। साथ ही मानसिक कष्ट के एवज में 15 हजार रुपये व वाद व्यय पांच हजार रुपये भी इसी 45 दिन के अंदर अदा करने के आदेश दिए हैं। प्रधान न्यायाधीश की ओर से आदेश में कहा गया कि अगर बीमा कंपनी समय पर भुगतान नहीं करती है तो सात प्रतिशत की जगह नौ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज की दर से भुगतान की तिथि तक का ब्याज भी देना होगा।