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Mahoba News: जल संचयन में मॉडल कॉलेज बनेगा वीरभूमि महाविद्यालय
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महोबा। शहर का वीरभूमि राजकीय महाविद्यालय जल संचयन के मामले में मॉडल कॉलेज बनेगा। महाविद्यालय परिसर में रेनवाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए काम भी शुरू कर दिया गया है। काम पूरा होते ही कॉलेज परिसर में जल संचयन आसानी हो सकेगा।
जनपद के किसी भी महाविद्यालय में अभी रेनवाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था नहीं है। वीरभूमि राजकीय महाविद्यालय रेनवॉटर हार्वेस्टिंग की सुविधा वाला पहला कॉलेज होगा। वर्षा जल संचयन प्रणाली की स्थापना के लिए साढ़े तीन माह पहले चित्रकूटधाम मंडल बांदा के भूगर्भ जल विभाग के अधिशासी अधिकारी की ओर से कॉलेज को पत्र भेज कर अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगा था। महाविद्यालय प्रशासन की ओर से सहमति व अनापत्ति प्रदान की गई थी। इसके बाद स्थापना की प्रक्रिया शुरू हो गई है। महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. प्रदीप कुमार का कहना है कि रेनवाटर हार्वेस्टिंग की स्थापना का काम चल रहा है। इससे जल संचयन आसानी से हो सकेगा।
भूजल स्तर में होगा सुधार
महोबा। रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के तहत जमीन में गड्ढा खोदकर काफी नीचे तक पाइप लाइन या ईंट-पत्थरों से फिल्टर पानी को जाने की व्यवस्था की जाती है ताकि बारिश का पानी सीधे जमीन में जाए। इससे पानी के नुकसान या दूषित होने की आशंका बेहद कम हो जाती है। बारिश या अन्य तरह का पानी नालियों से तालाबों या नदियों में नहीं मिलता बल्कि सीधे भूगर्भ के जल में जाकर मिलता है जो जलस्तर को बढ़ाता है।
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जनपद के किसी भी महाविद्यालय में अभी रेनवाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था नहीं है। वीरभूमि राजकीय महाविद्यालय रेनवॉटर हार्वेस्टिंग की सुविधा वाला पहला कॉलेज होगा। वर्षा जल संचयन प्रणाली की स्थापना के लिए साढ़े तीन माह पहले चित्रकूटधाम मंडल बांदा के भूगर्भ जल विभाग के अधिशासी अधिकारी की ओर से कॉलेज को पत्र भेज कर अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगा था। महाविद्यालय प्रशासन की ओर से सहमति व अनापत्ति प्रदान की गई थी। इसके बाद स्थापना की प्रक्रिया शुरू हो गई है। महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. प्रदीप कुमार का कहना है कि रेनवाटर हार्वेस्टिंग की स्थापना का काम चल रहा है। इससे जल संचयन आसानी से हो सकेगा।
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भूजल स्तर में होगा सुधार
महोबा। रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के तहत जमीन में गड्ढा खोदकर काफी नीचे तक पाइप लाइन या ईंट-पत्थरों से फिल्टर पानी को जाने की व्यवस्था की जाती है ताकि बारिश का पानी सीधे जमीन में जाए। इससे पानी के नुकसान या दूषित होने की आशंका बेहद कम हो जाती है। बारिश या अन्य तरह का पानी नालियों से तालाबों या नदियों में नहीं मिलता बल्कि सीधे भूगर्भ के जल में जाकर मिलता है जो जलस्तर को बढ़ाता है।
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