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UP: चकबंदी प्रक्रिया में भ्रष्टाचार से आहत किसान ने दी जान, एसीओ और लेखपाल की बढ़ी मुश्किल; एफआईआर दर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
Published by: Arun Parashar
Updated Wed, 08 Apr 2026 06:40 PM IST
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सार
किसान ने जान देने से पहले चकबंदी प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का उल्लेख सुसाइड नोट में किया था। मामले में परिजन ने कार्रवाई की मांग की थी। पोस्टमार्टम के बाद शाम को जब शव गांव पहुंचा तो परिजन ने अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया था। वह लोग किसान की मौत के जिम्मेदार अधिकारी कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग पर अड़ गए थे।
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
मैनुपरी के करहल में थाना कुर्रा क्षेत्र की ग्राम पंचायत के गांव दौलतपुर निवासी किसान संग्राम सिंह की खुदकुशी मामले में एसीओ और लेखपाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। किसान ने चकबंदी प्रक्रिया से आहत होकर जान दे दी थी। परिजन कार्रवाई की मांग पर अड़े थे, प्राथमिकी दर्ज होने के बाद गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।
गांव दौलतपुर के 70 वर्षीय किसान संग्राम सिंह ने मूल जोत से चक हटाए जाने से आहत होकर सोमवार रात झोपड़ी में फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी। उन्होंने चकबंदी प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का उल्लेख सुसाइड नोट में किया था। मंगलवार को जानकारी के बाद परिजन ने कार्रवाई की मांग की थी। पोस्टमार्टम के बाद शाम को जब शव गांव पहुंचा तो परिजन ने अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया था। वह लोग किसान की मौत के जिम्मेदार अधिकारी कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग पर अड़ गए थे।
एसडीएम सुनिष्ठा सिंह ने परिवार के लाेगों को अंतिम संस्कार के लिए समझाया, मृतक किसान के पुत्र सुनील कुमार की तहरीर पर पुलिस ने एसीओ नरेंद्र सिंह और लेखपाल विमलेश के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। पुत्र ने बताया कि मौजे में चल रही चकबंदी प्रक्रिया में अनियमितता बरती जा रही है। 6 अप्रैल को चकबंदी कार्यालय पर किसानों ने धरना-प्रदर्शन किया था, जिसमें पिता भी शामिल थे। वहां कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला, पिता इस बात से आहत थे।
एसीओ नरेंद्र कुमार वर्मा और लेखपाल विमलेश पिता को परेशान कर रहे थे, इससे आहत होकर उन्होंने खुदकुशी कर ली। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद परिजन ने बुधवार सुबह गमगीन माहौल में किसान संग्राम सिंह के शव का अंतिम संस्कार किया।
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गांव दौलतपुर के 70 वर्षीय किसान संग्राम सिंह ने मूल जोत से चक हटाए जाने से आहत होकर सोमवार रात झोपड़ी में फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी। उन्होंने चकबंदी प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का उल्लेख सुसाइड नोट में किया था। मंगलवार को जानकारी के बाद परिजन ने कार्रवाई की मांग की थी। पोस्टमार्टम के बाद शाम को जब शव गांव पहुंचा तो परिजन ने अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया था। वह लोग किसान की मौत के जिम्मेदार अधिकारी कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग पर अड़ गए थे।
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एसडीएम सुनिष्ठा सिंह ने परिवार के लाेगों को अंतिम संस्कार के लिए समझाया, मृतक किसान के पुत्र सुनील कुमार की तहरीर पर पुलिस ने एसीओ नरेंद्र सिंह और लेखपाल विमलेश के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। पुत्र ने बताया कि मौजे में चल रही चकबंदी प्रक्रिया में अनियमितता बरती जा रही है। 6 अप्रैल को चकबंदी कार्यालय पर किसानों ने धरना-प्रदर्शन किया था, जिसमें पिता भी शामिल थे। वहां कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला, पिता इस बात से आहत थे।
एसीओ नरेंद्र कुमार वर्मा और लेखपाल विमलेश पिता को परेशान कर रहे थे, इससे आहत होकर उन्होंने खुदकुशी कर ली। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद परिजन ने बुधवार सुबह गमगीन माहौल में किसान संग्राम सिंह के शव का अंतिम संस्कार किया।