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Mainpuri News: दम तोड़ रही हैं कोविड काल की व्यवस्थाएं
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फोटो 3 आरटीपीसीआर लैब पर लटकता ताला, हटा दिया गया है नाम। संवाद
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मैनपुरी। जिले में सर्दी-जुकाम के मरीजों की संख्या तेजी के साथ बढ़ी है। पांच साल पहले कोविड काल मेंं जिले में स्थापित की गईं व्यवस्थाएं भी दम तोड़़ती नजर आ रही हैं। 60 प्रतिशत कर्मचारियों के पद समाप्त हो चुके हैं। जांच से लेकर ऑक्सीजन सप्लाई तक की व्यवस्थाएं प्रभावित हैं। पिछले कुछ दिनों से सर्दी जुकाम के मरीज बढ़े हैं। लोग कई दिनों तक खांसी से पीड़ित हैं। गले चॉक हो रहे हैं। कोविड काल में जिला अस्पताल में स्थापित की गई रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन-पोलीमरेज चेन रिएक्शन (आरटी-पीसीआर) लैब में वर्तमान में कोविड जांच बंद करा दी गई है। यहां केवल सामान्य जांच ही कराई जा रही हैं। यहां कोरोना काल में तैनात किए गए 60 प्रतिशत कर्मचारियों का हटा दिया गया है, अन्य व्यवस्थाएं भी अधूरी दिख रही हैं। कोरोना महामारी के दौरान जिले में बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित मिले थे। कोरोना अटैक हुआ तो जिले में जांच तक की व्यवस्था नहीं थी। 5 दिसंबर 2021 को महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल में रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन-पोलीमरेज चेन रिएक्शन (आरटी-पीसीआर) लैब की स्थापना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्चुअल माध्यम से की थी। इस लैब में आधुनिक मशीनों के साथ 17 कर्मचारियों की तैनाती की गई थी। वर्तमान स्थिति यह है कि लैब में तैनात 60 प्रतिशत कर्मचारियों को बाहर कर दिया गया है। यही नहीं यहां आरटी पीसीआर लैब का नाम तक मिटा दिया गया है।
आगरा और सैफई भेजे गए थे नमूने
कोरोना का पहला मरीज वर्ष 2020 के अप्रैल के पहले सप्ताह में मिला था। जिले में पांच दिसंबर 2021 तक कोरोना जांच की व्यवस्था नहीं हो सकी थी। 20 महीने तक आगरा और सैफई नमूने भेजकर कोरोना की जांच कराई गई थी। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के लापरवाही महामारी के समय चुनौती बन सकता है।
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वार्ड ब्याॅय भर रहे प्लांट से सिलिंडर, हादसा हुआ तो कौन होगा जिम्मेदार
ऑक्सीजन प्लांट के लिए जिस इंजीनियर की तैनाती की गई थी। उसकी संविदा एक साल पहले ही समाप्त हो चुकी है। विभाग मानकों को ताक पर रखकर वार्ड ब्याॅय कर्मचारियों से ऑक्सीजन प्लांट से सिलिंडर भरवा रहा है। यदि किसी दिन हादसा हुआ तो अस्पताल के आस-पास की आबादी भी चपेट में आ सकती है।
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सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं। शासन के आदेश पर कोविड काल के कुछ कर्मचारी हटाए गए हैं जो शेष बचे हैं, उन्हें काम के आधार पर सीएचसी और जिला अस्पताल में तैनाती दी गई है। किसी भी प्रकार के संकट के लिए स्वास्थ्य विभाग तैयार है। ऑक्सीजन सिलिंडर भरने के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिलाया गया है।
- डॉ. आरसी गुप्ता, सीएमओ
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आगरा और सैफई भेजे गए थे नमूने
कोरोना का पहला मरीज वर्ष 2020 के अप्रैल के पहले सप्ताह में मिला था। जिले में पांच दिसंबर 2021 तक कोरोना जांच की व्यवस्था नहीं हो सकी थी। 20 महीने तक आगरा और सैफई नमूने भेजकर कोरोना की जांच कराई गई थी। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के लापरवाही महामारी के समय चुनौती बन सकता है।
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वार्ड ब्याॅय भर रहे प्लांट से सिलिंडर, हादसा हुआ तो कौन होगा जिम्मेदार
ऑक्सीजन प्लांट के लिए जिस इंजीनियर की तैनाती की गई थी। उसकी संविदा एक साल पहले ही समाप्त हो चुकी है। विभाग मानकों को ताक पर रखकर वार्ड ब्याॅय कर्मचारियों से ऑक्सीजन प्लांट से सिलिंडर भरवा रहा है। यदि किसी दिन हादसा हुआ तो अस्पताल के आस-पास की आबादी भी चपेट में आ सकती है।
सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं। शासन के आदेश पर कोविड काल के कुछ कर्मचारी हटाए गए हैं जो शेष बचे हैं, उन्हें काम के आधार पर सीएचसी और जिला अस्पताल में तैनाती दी गई है। किसी भी प्रकार के संकट के लिए स्वास्थ्य विभाग तैयार है। ऑक्सीजन सिलिंडर भरने के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिलाया गया है।
- डॉ. आरसी गुप्ता, सीएमओ