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Mainpuri News: 48 वर्ष बाद रामादेवी, 20 वर्ष बाद ऊषा देवी को मिला कब्जा
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
Updated Thu, 18 Jun 2026 11:59 PM IST
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फोटो 32 मिशन समाधान में मौके पर सत्यापन करते जिलाधिकारी। स्त्रोत प्रशासन
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मैनपुरी। मिशन समाधान के तहत जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी भूमि विवादों एवं लंबित पट्टा प्रकरणों की सुनवाई कर मौके पर पैमाइश, सीमांकन, हदबंदी और कब्जा दिला रहे हैं। बृहस्पतिवार को तहसील कुरावली के सुजरई रामनगर एवं बसुरा सुल्तानपुर, तहसील सदर के सूरजपुर मनोना में वर्षों से लंबित भूमि विवादों एवं पट्टा प्रकरणों का मौके पर निस्तारण कराया।
उन्होंने सुजरई रामनगर के निरीक्षण के दौरान संबंधित अभिलेखों, खतौनी, पट्टा रजिस्टर एवं पूर्व में की गई कार्रवाई का परीक्षण किया। जांच में पाया कि ऊषादेवी को लगभग 20 वर्ष पूर्व पट्टे के माध्यम से भूमि आवंटित की गई थी। लेकिन उन्हें वास्तविक कब्जा प्राप्त नहीं हो सका था। उन्होंने राजस्व, पुलिस विभाग की संयुक्त टीम से भूमि की पैमाइश कराई। अभिलेखों के अनुरूप ऊषा देवी को उनकी भूमि पर कब्जा दिलाया।
तहसील सदर के सूरजपुर मनोना में रामादेवी को लगभग 48 वर्ष पूर्व भूमि का पट्टा आवंटित किया गया था। आज तक उस भूमि पर वास्तविक कब्जा प्राप्त नहीं हो सका था। वृद्धावस्था में भी वह अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रही थीं। जिलाधिकारी ने स्वयं मौके पर पहुंचकर राजस्व टीम से भूमि की पैमाइश, सीमांकन कराकर रामादेवी को उनके पट्टे की भूमि पर कब्जा दिलाया।
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बसुरा सुल्तानपुर में भूमि विवाद से संबंधित चार प्रकरणों की मौके पर सुनवाई की गई। दोनों पक्षों, राजस्व अधिकारियों एवं पुलिस टीम की मौजूदगी में अभिलेखों का परीक्षण कराकर भूमि की पैमाइश के बाद वास्तविक सीमाएं निर्धारित की गईं। जेसीबी से मौके पर हदबंदी एवं मेड़बंदी कराई गई।
उन्होंने सुजरई रामनगर के निरीक्षण के दौरान संबंधित अभिलेखों, खतौनी, पट्टा रजिस्टर एवं पूर्व में की गई कार्रवाई का परीक्षण किया। जांच में पाया कि ऊषादेवी को लगभग 20 वर्ष पूर्व पट्टे के माध्यम से भूमि आवंटित की गई थी। लेकिन उन्हें वास्तविक कब्जा प्राप्त नहीं हो सका था। उन्होंने राजस्व, पुलिस विभाग की संयुक्त टीम से भूमि की पैमाइश कराई। अभिलेखों के अनुरूप ऊषा देवी को उनकी भूमि पर कब्जा दिलाया।
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तहसील सदर के सूरजपुर मनोना में रामादेवी को लगभग 48 वर्ष पूर्व भूमि का पट्टा आवंटित किया गया था। आज तक उस भूमि पर वास्तविक कब्जा प्राप्त नहीं हो सका था। वृद्धावस्था में भी वह अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रही थीं। जिलाधिकारी ने स्वयं मौके पर पहुंचकर राजस्व टीम से भूमि की पैमाइश, सीमांकन कराकर रामादेवी को उनके पट्टे की भूमि पर कब्जा दिलाया।
बसुरा सुल्तानपुर में भूमि विवाद से संबंधित चार प्रकरणों की मौके पर सुनवाई की गई। दोनों पक्षों, राजस्व अधिकारियों एवं पुलिस टीम की मौजूदगी में अभिलेखों का परीक्षण कराकर भूमि की पैमाइश के बाद वास्तविक सीमाएं निर्धारित की गईं। जेसीबी से मौके पर हदबंदी एवं मेड़बंदी कराई गई।