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UP: आईओसीएल के सेवानिवृत्त कर्मचारी से 44 लाख रुपये की ठगी, ठगों ने दिखाया ऐसा डर...घरवालों को भी न बता सके सच
Thu, 02 Jul 2026 02:01 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jul 2026 02:01 PM IST
सार
मथुरा में साइबर ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर एक सेवानिवृत्त कर्मचारी को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया और 44 लाख रुपये ठग लिए। वहीं केवाईसी अपडेट के बहाने एक महिला बैंक कर्मचारी से भी 7 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी कर ली, जिसकी पुलिस जांच कर रही है।
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साइबर ठग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
हैलो...मैं दिल्ली से सीबीआई अधिकारी बोल रहा हूं...आपके खिलाफ बेंगलुरु के एक थाने में हनी ट्रैप में प्राथमिकी दर्ज हुई है, आरबीआई द्वारा आपके बैंक खातों की जांच होगी। मुंबई की केनरा बैंक में तीन करोड़ का लेनदेन भी आपके नाम से हुआ है। यह कहते हुए साइबर ठगों ने सेवानिवृत्त आईओसीएल कर्मचारी को फोन किया और उनके बैंक खातों की जानकारी प्राप्त कर ली। इसके बाद उनके खाते से 44 लाख रुपये अपने खाते में ट्रांसफर कर लिए। चार माह बाद पीड़ित ने साइबर पुलिस से मदद की गुहार लगाई है।
हाईवे के चंद्रलोक कॉलोनी निवासी गोपाल प्रसाद आईओसीएल से सेवानिवृत्त हैं। दर्ज कराई प्राथमिकी में उन्होंने बताया कि सात मार्च 2026 को उन्हें एक फोन कॉल आई। फोनकर्ता ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए दावा किया। इसके बाद पुलिस इंस्पेक्टर बताने वाली एक महिला ने भी उनसे संपर्क कर फोन पर धमकाया कि यदि उन्होंने किसी को इस बारे में बताया तो परिवार के लोगों को सीबीआई जांच में फंसा दिया जाएगा।
आरोप है कि फोनकर्ता महिला ने जांच के नाम पर उनके विभिन्न बैंक खातों से 10 मार्च को 22 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। इसके बाद 13 मार्च को 22 लाख रुपये और ट्रांसफर करा लिए। महिला ने जांच पूरी होने के बाद रकम वापस करने का दावा किया। कुछ दिन बीतने के बाद जब रकम वापस नहीं आई तो उन्हें ठगी का संदेह हुआ। चार माह बाद गोपाल प्रसाद ने परिजन को घटना की जानकारी दी। इसके बाद ऑनलाइन राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। 28 जून को साइबर थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस अधीक्षक अपराध श्वेता यादव ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।
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महिला बैंक कर्मचारी से ठगे सात लाख
साइबर ठगों ने महिला बैंक कर्मचारी को अपने जाल में फंसाकर सात लाख रुपये की ठगी कर ली। कोतवाली के द्वारिकापुरी निवासी राजवाला ने दर्ज कराई प्राथमिकी में बताया कि बीती 25 जून को उनके मोबाइल पर एक व्यक्ति का फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को यूको बैंक का कर्मचारी दीपक बताया। उसने पीड़िता को झांसा दिया कि उनके पेंशन खाते की केवाईसी अपडेट की जानी है। बातों में उलझाकर पीड़िता से ओटीपी पूछ लिया। तीन खातों में सेंध लगाकर सात लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए।
ये बरतें सावधानी
डराने वाले कॉल से घबराएं नहीं (डिजिटल अरेस्ट से बचें)। पुलिस को बेझिझक इसकी शिकायत दर्ज कराएं। अगर ठगी हो जाए तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 कॉल करें। जितनी जल्दी आप कॉल करेंगे, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ज्यादा होगी। ठगी की गृह मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर जाकर भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सोशल मीडिया पर निजी जानकारियां (जैसे फोन नंबर, घर का पता, जन्मतिथि) सार्वजनिक न करें। यदि कोई दोस्त या रिश्तेदार सोशल मीडिया पर अचानक आपातकाल का बहाना बनाकर पैसों की मांग करे तो तुरंत पैसे न भेजें। पहले उन्हें सीधे फोन कॉल करके असलियत जान लें।
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हाईवे के चंद्रलोक कॉलोनी निवासी गोपाल प्रसाद आईओसीएल से सेवानिवृत्त हैं। दर्ज कराई प्राथमिकी में उन्होंने बताया कि सात मार्च 2026 को उन्हें एक फोन कॉल आई। फोनकर्ता ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए दावा किया। इसके बाद पुलिस इंस्पेक्टर बताने वाली एक महिला ने भी उनसे संपर्क कर फोन पर धमकाया कि यदि उन्होंने किसी को इस बारे में बताया तो परिवार के लोगों को सीबीआई जांच में फंसा दिया जाएगा।
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आरोप है कि फोनकर्ता महिला ने जांच के नाम पर उनके विभिन्न बैंक खातों से 10 मार्च को 22 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। इसके बाद 13 मार्च को 22 लाख रुपये और ट्रांसफर करा लिए। महिला ने जांच पूरी होने के बाद रकम वापस करने का दावा किया। कुछ दिन बीतने के बाद जब रकम वापस नहीं आई तो उन्हें ठगी का संदेह हुआ। चार माह बाद गोपाल प्रसाद ने परिजन को घटना की जानकारी दी। इसके बाद ऑनलाइन राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। 28 जून को साइबर थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस अधीक्षक अपराध श्वेता यादव ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।
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महिला बैंक कर्मचारी से ठगे सात लाख
साइबर ठगों ने महिला बैंक कर्मचारी को अपने जाल में फंसाकर सात लाख रुपये की ठगी कर ली। कोतवाली के द्वारिकापुरी निवासी राजवाला ने दर्ज कराई प्राथमिकी में बताया कि बीती 25 जून को उनके मोबाइल पर एक व्यक्ति का फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को यूको बैंक का कर्मचारी दीपक बताया। उसने पीड़िता को झांसा दिया कि उनके पेंशन खाते की केवाईसी अपडेट की जानी है। बातों में उलझाकर पीड़िता से ओटीपी पूछ लिया। तीन खातों में सेंध लगाकर सात लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए।
ये बरतें सावधानी
डराने वाले कॉल से घबराएं नहीं (डिजिटल अरेस्ट से बचें)। पुलिस को बेझिझक इसकी शिकायत दर्ज कराएं। अगर ठगी हो जाए तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 कॉल करें। जितनी जल्दी आप कॉल करेंगे, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ज्यादा होगी। ठगी की गृह मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर जाकर भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सोशल मीडिया पर निजी जानकारियां (जैसे फोन नंबर, घर का पता, जन्मतिथि) सार्वजनिक न करें। यदि कोई दोस्त या रिश्तेदार सोशल मीडिया पर अचानक आपातकाल का बहाना बनाकर पैसों की मांग करे तो तुरंत पैसे न भेजें। पहले उन्हें सीधे फोन कॉल करके असलियत जान लें।