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Mathura News: लापरवाही की चार्जिंग...हादसे की वार्निंग
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मथुरा। शहर में इलेक्ट्रिक ऑटो व ई-रिक्शों के साथ-साथ बैटरी चार्जिंग वाली दुकानों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। भीड़भाड़ वाले इलाकों में असुरक्षित तरीके से संचालित दुकानें स्थानीय लोगों के लिए खतरा बनती जा रही हैं। भूतेश्वर, गोवर्धन चौराहा, एसबीआई चौराहे समेत अन्य स्थानों पर बिना सुरक्षा इंतजाम के धड़ल्ले से ये कारोबार चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं।
शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर संचालित इन दुकानों में अग्निशमन यंत्र, उचित वेंटिलेशन और बैटरियों के सुरक्षित भंडारण जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं तक नहीं हैं। ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। इन दुकानों में बड़ी संख्या में लिथियम और लेड-एसिड बैटरियां चार्ज की जाती हैं। कई स्थानों पर एक साथ दर्जनों बैटरियां चार्जिंग पर लगी रहती हैं। बैटरियों के पास ही ज्वलनशील सामान रखा रहता है और बिजली के असुरक्षित तार खुले पड़े रहते हैं। अधिकांश दुकानों में आग बुझाने के उपकरण तक उपलब्ध नहीं हैं। भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में संचालित इन दुकानों के बाहर ई-रिक्शों की कतारें लगने से यातायात भी प्रभावित होता है। लोगों का कहना है कि यदि किसी दुकान में आग लग जाए तो जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है।
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75 से 150 रुपये से चार्ज हो रहीं बैटरियां
मथुरा-वृंदावन में लगभग 27 हजार इलेक्ट्रिक ऑटो व ई-रिक्शा संचालित हो रहे हैं। ऑटो-ई रिक्शा यूनियन के पदाधिकारी राजकुमार कुशवाहा का कहना है कि शहर के विभिन्न स्थानों पर कुछ लोगों ने तिपहिया वाहनों के चार्जिंग की व्यवस्था कर रखी है। ये लोग 75 रुपये से 150 रुपये में बैटरियां चार्जिंग करके देते हैं। अधिकतर दुकानें प्रमुख चौक-चौराहों पर स्थित हैं।
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ओवरचार्जिंग पर पैदा होता है खतरा
ई-रिक्शा और ऑटो में इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन और लेड-एसिड बैटरियों को चार्ज करते समय अत्यधिक गर्मी पैदा होती है। बैटरियों से ज्वलनशील गैसें निकलती हैं। बिना किसी मानक के चल रहीं इन दुकानों में सुरक्षा उपकरण न होना और खुले तारों के बीच ओवरचार्जिंग होना सीधे तौर पर किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है।
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सुरक्षा मानकों का पालन कराना प्राथमिकता है। जल्द ही ऐसे प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कराया जाएगा और नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।- अनुपम मिश्र, सिटी मजिस्ट्रेट
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शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर संचालित इन दुकानों में अग्निशमन यंत्र, उचित वेंटिलेशन और बैटरियों के सुरक्षित भंडारण जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं तक नहीं हैं। ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। इन दुकानों में बड़ी संख्या में लिथियम और लेड-एसिड बैटरियां चार्ज की जाती हैं। कई स्थानों पर एक साथ दर्जनों बैटरियां चार्जिंग पर लगी रहती हैं। बैटरियों के पास ही ज्वलनशील सामान रखा रहता है और बिजली के असुरक्षित तार खुले पड़े रहते हैं। अधिकांश दुकानों में आग बुझाने के उपकरण तक उपलब्ध नहीं हैं। भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में संचालित इन दुकानों के बाहर ई-रिक्शों की कतारें लगने से यातायात भी प्रभावित होता है। लोगों का कहना है कि यदि किसी दुकान में आग लग जाए तो जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है।
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75 से 150 रुपये से चार्ज हो रहीं बैटरियां
मथुरा-वृंदावन में लगभग 27 हजार इलेक्ट्रिक ऑटो व ई-रिक्शा संचालित हो रहे हैं। ऑटो-ई रिक्शा यूनियन के पदाधिकारी राजकुमार कुशवाहा का कहना है कि शहर के विभिन्न स्थानों पर कुछ लोगों ने तिपहिया वाहनों के चार्जिंग की व्यवस्था कर रखी है। ये लोग 75 रुपये से 150 रुपये में बैटरियां चार्जिंग करके देते हैं। अधिकतर दुकानें प्रमुख चौक-चौराहों पर स्थित हैं।
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ओवरचार्जिंग पर पैदा होता है खतरा
ई-रिक्शा और ऑटो में इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन और लेड-एसिड बैटरियों को चार्ज करते समय अत्यधिक गर्मी पैदा होती है। बैटरियों से ज्वलनशील गैसें निकलती हैं। बिना किसी मानक के चल रहीं इन दुकानों में सुरक्षा उपकरण न होना और खुले तारों के बीच ओवरचार्जिंग होना सीधे तौर पर किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है।
सुरक्षा मानकों का पालन कराना प्राथमिकता है। जल्द ही ऐसे प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कराया जाएगा और नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।- अनुपम मिश्र, सिटी मजिस्ट्रेट