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UP: किसान करें ड्रैगन फ्रूट की खेती, यूपी सरकार दे रही 1.62 लाख रुपये, दिल के मरीजों के लिए वरदान है ये फल

Fri, 31 Jul 2026 02:34 PM IST
Dhirendra Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: Dhirendra Singh Updated Fri, 31 Jul 2026 02:34 PM IST
सार

मथुरा में गिरते भूजल स्तर के बीच उद्यान विभाग किसानों को कम पानी में अधिक मुनाफे वाली ड्रैगन फ्रूट यानी कमलम की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। सरकार की ओर से किसानों को ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए 1.62 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक की सब्सिडी दी जाएगी।

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Dragon Fruit Farming to Expand in Mathura Farmers to Get 1.62 Lakh Subsidy per Hectare
ड्रैगन फ्रूट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मथुरा में पेयजल संकट से जूझ रहे किसानों को उद्यान विभाग कम सिंचाई में अधिक मुनाफे वाली कमलम (ड्रैगन फ्रूट) की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इसके लिए सरकार की ओर से इसके लिए किसानों को 1.62 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की सब्सिडी दी जाएगी।
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जनपद में गिरते भूजल स्तर के बीच उद्यान विभाग द्वारा किसानों को कमलम (ड्रैगन फ्रूट) की व्यावसायिक खेती के लिए प्रेरित कर रहा है। उद्यान विभाग के अनुसार ड्रैगन फ्रूट एक ऐसी बागवानी फसल है, जिसमें पारंपरिक फसलों की तुलना में काफी कम सिंचाई की आवश्यकता होती है। एक बार पौधे रोपित होने के बाद यह कई वर्षों तक उत्पादन देते हैं। इससे किसानों को करीब 25 साल तक लगातार आय प्राप्त होती है। बाजार में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है और इसका मूल्य भी सामान्य फलों की अधिक मिलता है। वर्तमान में नौहझील ब्लॉक के गांव शंकर गढ़ी में किसान गोपाल सिंह और मनीष के द्वारा यह खेती की जा रही है।

 
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खाने में यह फल स्ट्रॉबेरी और लीची की तरह मीठा स्वाद देता है। यह फल जितना स्वादिष्ट है, उतना ही स्वास्थ्य वर्धक भी। इंसान के शरीर में ड्रैगन फ्रूट एक दवा का काम करता है। ड्रैगन फ्रूट के पौधे का औसतन जीवन 25-30 वर्ष होता है। ऐसे में किसान को एक ही बार निवेश करना होता है। जिला उद्यान अधिकारी डॉ. प्रशांत कुमार सिंह ने बताया कि जल संरक्षण के साथ किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से इस योजना को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही उद्यान विभाग ने खजूर, स्ट्रॉबेरी और ड्रैगन फ्रूट की खेती कराने की योजना शुरू की है। विभाग का लक्ष्य जिले में ड्रैगन फ्रूट का रकबा बढ़ाकर किसानों को लाभकारी खेती से जोड़ना है।

 
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अच्छी आय की उम्मीद
किसान मनीष सिंह ने बताया कि पांच बीघे में ड्रैगन फ्रूट की खेती पिछले वर्ष ही शुरू की है। इस बार सभी पौधों पर फल आ रहे हैं। दिल्ली आगरा के अलावा मथुरा में भी मंडी में खरीद होती है। इस बार लागत निकलने और बेहतर आय की उम्मीद है। 

टपक सिंचाई पद्धति से होगी सिंचाई
इस पद्धति में पाइप और ड्रिपर की सहायता से फसलों की जड़ों तक बूंद-बूंद करके पानी पहुंचाया जाता है। इससे पानी की बर्बादी कम होती है, सिंचाई की लागत घटती है और पौधों को आवश्यक मात्रा में नमी मिलती रहती है। ड्रैगन फ्रूट की खेती में टपक सिंचाई पद्धति अपनाने से 40 से 60 प्रतिशत तक पानी की बचत की जा सकती है।
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