मथुरा। फरह स्थित जोधपुर झाल वेटलैंड के शीतकालीन पक्षी सर्वेक्षण के दौरान श्राइक पक्षी (कसाई) की पांच अलग-अलग प्रजातियां दर्ज की गई हैं। ये पक्षी मध्य और पूर्वी एशिया से लंबी दूरी तय करके यहां प्रवास पर पहुंच रहे हैं।
सर्वेक्षण के दौरान बे-बैक्ड, लोंग-टेल्ड, ग्रेट-ग्रे, इसेबिलाइन तथा ब्राउन प्रजाति दर्ज की गई हैं। इनमें से तीन प्रजातियां शीतकालीन प्रवासी पक्षी हैं, जो मध्य एशिया और उत्तरी क्षेत्रों से भारत आते हैं। पक्षियों के विशेषज्ञ डाॅ. केपी सिंह के अनुसार श्राइक पक्षियों को पक्षी वर्गीकरण में लैनिडी परिवार में रखा गया है। इस परिवार के अधिकांश पक्षी लेनूअस वंश के अंतर्गत आते हैं। श्राइक मध्यम आकार के पैसराइन पक्षी होते हैं, जो अपनी विशिष्ट शिकार करने की शैली और मांसाहारी प्रवृत्ति के कारण अन्य गीतगायक पक्षियों से अलग माने जाते हैं।
श्राइक पक्षियों को उनकी विशिष्ट शिकार शैली के कारण बुचर बर्ड या कसाई पक्षी भी कहा जाता है। ये पक्षी ऊंचे पेड़, झाड़ियां आदि पर बैठकर कीटों का शिकार करते हैं। इनका शरीर आमतौर पर भूरा या सफेद रंग का होता है और आंखों के पास एक चौड़ी काली पट्टी (मुखौटा जैसा) होती है। ये पक्षी बहुत ही सतर्क होते हैं और ऊंची टहनियों पर बैठकर शिकार की तलाश करते हैं। इनकी आवाज भी तेज होती है और अन्य पक्षियों की नकल भी कर सकते हैं। इनका आकार लगभग 16 से 25 सेंटीमीटर के बीच होता है। ये अपने भोजन को कसाई की तरह टांगने के कारण प्रसिद्ध हैं। वेटलैंड में झाड़ीदार घासस्थल, पारिस्थितिक महत्ता होने से ये पक्षी प्रवास कर रहे हैं।