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गैस संकट का असर: इस्कॉन मंदिर में भक्तों के प्रसाद में हुई कटौती, बदल दिया पूरा मेन्यू; जानें अब क्या मिल रहा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 24 Mar 2026 11:48 AM IST
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सार
गैस की कमी के कारण वृंदावन के इस्कॉन मंदिर में अब कोयले की भट्ठी पर प्रसाद बनाया जा रहा है और मेन्यू में बदलाव करना पड़ा है। पहले जहां कई व्यंजन मिलते थे, अब भक्तों को सीमित भोजन दिया जा रहा है, हालांकि ठाकुर जी के भोग में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
इस्कॉन मंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
अमेरिका- ईरान के बीच चल रहे युद्ध से उत्पन्न ईंधन संकट का असर मंदिरों की रसोई पर भी पड़ने लगा है। गैस की कमी के कारण इस्कॉन मंदिर की रसोई में 2 कोयले की भट्ठी शुरू कर दी गई हैं। मंदिर में भक्तों को सुबह शाम मिलने वाला मंदिर के प्रसाद का भी मेन्यू में बदलाव किया गया है। मंदिर में सैकड़ों भक्तों के लिए भोजन तैयार किया जाता था लेकिन अब सुबह खिचड़ी और दोपहर में एक सब्जी और पूड़ी बनाई जा रही है। हालांकि ठाकुर जी के भोग में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
इस्कॉन मंदिर की रसोई में गैस चूल्हे पर भोजन प्रसाद पकाया जाता था, लेकिन अब कोयले की भट्ठी पर प्रसाद तैयार किया जा रहा है। पहले रोजाना 10 व्यावसायिक सिलिंडर आते थे, लेकिन अब दो सिलिंडर से काम चलाया जा रहा है, जोकि नाकाफी है। इस कारण मंदिर में हर रोज 2000 श्रद्धालुओं के लिए बनने वाले प्रसाद के मेन्यू में भी बदलाव करना पड़ा है। सुबह के भक्तों को मिलने वाली चपाती, दो तरह की सब्जी, दाल, चावल, के स्थान पर खिचड़ी, दलिया दिया जा रहा है। दोपहर के भोजन में चावल, दाल, दो प्रकार की सब्जी और रोटी-पूड़ी दी जाती थी, लेकिन अब दाल रोटी और एक सब्जी बनती दी जा रही है।
मंदिर के रेस्टोरेंट के भोजन पर भी असर पड़ा है। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के रेस्टोरेंट में भी मनमुताबिक भोजन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। रेस्टोरेंट में पूड़ी-सब्जी, रायता, रोटी, मटर पनीर की सब्जी, मिक्स वेज की सब्जी उपलब्ध हो पा रही है। इस्कॉन के मीडिया प्रभारी रवि लोचन दास ने बताया कि मंदिर में भोजन तैयार करने के लिए कोयले का स्टॉक किया गया है, ताकि भट्ठी पर ठाकुरजी एवं भक्तों के लिए भोजन तैयार किया जा सके।
एलपीजी सिलेंडर मांग के अनुरूप नहीं मिल पा रहे हैं। भक्तों की थाली में अनेक प्रकार के व्यंजन होते थे, उसमें भी बदलाव किया गया है। उन्होंने बताया कि सुबह 9 बजे फुल प्रसाद होता था और दोपहर में 3 बजे भी फुल प्रसाद दिया जाता था। उसमें बदलाव करके सुबह प्रसाद में केवल खिचड़ी दी जा रही है और दोपहर में 3 बजे रोटी-सब्जी और दाल दी जा रही है। ठाकुर जी की रसोई में भोजन के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है।
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इस्कॉन मंदिर की रसोई में गैस चूल्हे पर भोजन प्रसाद पकाया जाता था, लेकिन अब कोयले की भट्ठी पर प्रसाद तैयार किया जा रहा है। पहले रोजाना 10 व्यावसायिक सिलिंडर आते थे, लेकिन अब दो सिलिंडर से काम चलाया जा रहा है, जोकि नाकाफी है। इस कारण मंदिर में हर रोज 2000 श्रद्धालुओं के लिए बनने वाले प्रसाद के मेन्यू में भी बदलाव करना पड़ा है। सुबह के भक्तों को मिलने वाली चपाती, दो तरह की सब्जी, दाल, चावल, के स्थान पर खिचड़ी, दलिया दिया जा रहा है। दोपहर के भोजन में चावल, दाल, दो प्रकार की सब्जी और रोटी-पूड़ी दी जाती थी, लेकिन अब दाल रोटी और एक सब्जी बनती दी जा रही है।
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मंदिर के रेस्टोरेंट के भोजन पर भी असर पड़ा है। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के रेस्टोरेंट में भी मनमुताबिक भोजन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। रेस्टोरेंट में पूड़ी-सब्जी, रायता, रोटी, मटर पनीर की सब्जी, मिक्स वेज की सब्जी उपलब्ध हो पा रही है। इस्कॉन के मीडिया प्रभारी रवि लोचन दास ने बताया कि मंदिर में भोजन तैयार करने के लिए कोयले का स्टॉक किया गया है, ताकि भट्ठी पर ठाकुरजी एवं भक्तों के लिए भोजन तैयार किया जा सके।
एलपीजी सिलेंडर मांग के अनुरूप नहीं मिल पा रहे हैं। भक्तों की थाली में अनेक प्रकार के व्यंजन होते थे, उसमें भी बदलाव किया गया है। उन्होंने बताया कि सुबह 9 बजे फुल प्रसाद होता था और दोपहर में 3 बजे भी फुल प्रसाद दिया जाता था। उसमें बदलाव करके सुबह प्रसाद में केवल खिचड़ी दी जा रही है और दोपहर में 3 बजे रोटी-सब्जी और दाल दी जा रही है। ठाकुर जी की रसोई में भोजन के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है।