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UP: दिव्यांग सर्टिफिकेट या सौदेबाजी? CMO दफ्तर में परसेंट का खेल, भ्रष्ट लिपिक गिरफ्तार; खुलेंगे कई राज
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 25 Mar 2026 02:11 PM IST
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सार
मथुरा के सीएमओ कार्यालय में दिव्यांग प्रमाण पत्र में प्रतिशत बढ़ाने के नाम पर लंबे समय से चल रहे रिश्वतखोरी के खेल का खुलासा हुआ है। एंटी करप्शन टीम ने लिपिक को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया, जिससे पूरे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच हुआ है।
गिरफ्तार लिपिक और एंटी करप्शन टीम की गाड़ियां
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
मथुरा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर वसूली का खेल नया नहीं है। पिछले कई वर्षों से सीएमओ की नाक के नीचे दिव्यांगता प्रतिशत बढ़ाने के नाम पर वसूली का गोरखधंधा चल रहा है। पहले भी कई पीड़ित अवैध वसूली को लेकर सीएमओ समेत अन्य अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन किसी भी पीड़ित की शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया।
मंगलवार को एंटी करप्शन टीम ने दिव्यांग बोर्ड के लिपिक कासगंज निवासी शशिकांत वर्मा को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। सीएमओ कार्यालय के अनुसार शशिकांत वर्मा जुलाई 2023 में कन्नौज से स्थानांतरण होकर यहां आए थे। 2024 में उसे दिव्यांग बोर्ड के पटल का चार्ज मिला। इसके बाद उसने दिव्यांगता प्रतिशत बढ़ाने के नाम पर वसूली का खेल शुरू कर दिया। कई पीड़ितों ने सीएमओ समेत अन्य अधिकारियों से शिकायत भी की, लेकिन अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज कर दिया। इसके चलते उसके हौंसले बुलंद हो गए।
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मंगलवार को एंटी करप्शन टीम ने दिव्यांग बोर्ड के लिपिक कासगंज निवासी शशिकांत वर्मा को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। सीएमओ कार्यालय के अनुसार शशिकांत वर्मा जुलाई 2023 में कन्नौज से स्थानांतरण होकर यहां आए थे। 2024 में उसे दिव्यांग बोर्ड के पटल का चार्ज मिला। इसके बाद उसने दिव्यांगता प्रतिशत बढ़ाने के नाम पर वसूली का खेल शुरू कर दिया। कई पीड़ितों ने सीएमओ समेत अन्य अधिकारियों से शिकायत भी की, लेकिन अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज कर दिया। इसके चलते उसके हौंसले बुलंद हो गए।
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लिपिक के गिरफ्तार होने के बाद सीएमओ कार्यालय समेत पूरे स्वास्थ्य विभाग में अफरा-तफरा है। सीएमओ कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी पूरे गोरखधंधे से अनभिज्ञ नहीं है। यही कारण है कि लिपिक के करीबी कर्मचारी भी पूछताछ की जद में आ सकते हैं। लिपिक की गिरफ्तारी के बाद अब उनके करीब रहने वाले कर्मचारी भी दूरी बनाने लगे हैं। लिपिक की गिरफ्तारी के बाद कई करीबी कर्मचारियों ने तो कार्यालय से गायब हो गए और अपने मोबाइल भी बंद कर लिए।
एक सप्ताह में दो स्वास्थ्य कर्मी चढ़े हत्थे
भ्रष्टाचार और स्वास्थ्य विभाग का पुराना नाता है। एक सप्ताह में दो स्वास्थ्य कर्मियों को रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन टीम द्वारा गिरफ्तारी करना इसका जीता जागता सबूत है। इससे पहले ही पुलिस भर्ती परीक्षा में जिला अस्पताल के ईएमओ रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार हो चुके हैं। लोगों के स्वास्थ्य का ध्यान रखने वाले विभाग के लोग भ्रष्टाचार में पूरी तरह डूब चुके हैं।
भ्रष्टाचार और स्वास्थ्य विभाग का पुराना नाता है। एक सप्ताह में दो स्वास्थ्य कर्मियों को रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन टीम द्वारा गिरफ्तारी करना इसका जीता जागता सबूत है। इससे पहले ही पुलिस भर्ती परीक्षा में जिला अस्पताल के ईएमओ रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार हो चुके हैं। लोगों के स्वास्थ्य का ध्यान रखने वाले विभाग के लोग भ्रष्टाचार में पूरी तरह डूब चुके हैं।
सीएमओ कार्यालय में बिना रिश्वत के कोई कार्य नहीं होता है। मंगलवार को सीएमओ कार्यालय से लिपिक की गिरफ्तारी से पहले 18 मार्च को चौमुहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात ब्लॉक कम्युनिटी प्रोजेक्ट मैनेजर अमित सोनी को एंटी करप्शन टीम ने आशा कार्यकर्ता से दो हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इससे एक साल पहले 6 मई 2025 में पुलिस भर्ती की मेडिकल परीक्षा में रिश्वत लेने के आरोप में जिला अस्पताल के आपातकालीन चिकित्साधिकारी डॉ. हरिनारायण प्रभाकर, उनकी पत्नी प्रभाकर हास्पिटल की संचालक डॉ. शिवानी प्रभाकर और दो अन्य सहयोगियों को एंटी करप्शन टीम ने किया गिरफ्तार किया था।
दिव्यांगता प्रतिशत बढ़ाने को लेकर मांगी जाती है रिश्वत
प्रमाण पत्र में दिव्यांगता प्रतिशत बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा रिश्वत मांगी जाती है। प्रमाण पत्र बनवाने के दौरान एक-एक प्रतिशत बढ़ाने के लिए 5 से 10 हजार रुपये लिए जाते हैं। जो लोग रिश्वत देते हैं उनकी दिव्यांगता प्रतिशत बढ़ा दी जाती है।
प्रमाण पत्र में दिव्यांगता प्रतिशत बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा रिश्वत मांगी जाती है। प्रमाण पत्र बनवाने के दौरान एक-एक प्रतिशत बढ़ाने के लिए 5 से 10 हजार रुपये लिए जाते हैं। जो लोग रिश्वत देते हैं उनकी दिव्यांगता प्रतिशत बढ़ा दी जाती है।
दिव्यांग प्रमाण पत्र में 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता होने पर रोजवेज बस में मुफ्त सफर की सुविधा मिलती है। साथ ही रेलवे में मुफ्त सफर की सुविधा मिलती है। इसके साथ ही 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता पर टिकट में 50 और 75 प्रतिशत की राहत मिलती है। जबकि सौ प्रतिशत दिव्यांगता वालों को मुफ्त सफर के साथ एक सहायक को साथ ले जाने की सुविधा भी मिलती है। इतना ही नहीं दिव्यांगता प्रतिशत के हिसाब से प्रदेश और केंद्र सरकार प्रतिमाह पेंशन भी उपलब्ध कराती है। यही कारण है कि प्रमाण पत्र में दिव्यांगता प्रतिशत बढ़ाने के लिए जिम्मेदार रिश्वत की मांग करते हैं।
वृंदावन में होता है दिव्यांगता का मेडिकल
दिव्यांग प्रमाण पत्र के लिए सीएमओ कार्यालय में सबसे पहले पात्र को आवेदन करना होता है। आवेदन के बाद पात्र व्यक्ति को वृंदावन स्थित सौ शैय्या अस्पताल (वृंदावन) में मेडिकल बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत होना होता है। मेडिकल बोर्ड में शामिल हड्डी, नेत्र, मनोचिकित्सक, ईएनटी और शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विशेषज्ञ शामिल होते हैं। सभी विशेषज्ञों की रिपोर्टलगने के बाद दिव्यांगता का प्रमाण पत्र बनता है।
दिव्यांग प्रमाण पत्र के लिए सीएमओ कार्यालय में सबसे पहले पात्र को आवेदन करना होता है। आवेदन के बाद पात्र व्यक्ति को वृंदावन स्थित सौ शैय्या अस्पताल (वृंदावन) में मेडिकल बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत होना होता है। मेडिकल बोर्ड में शामिल हड्डी, नेत्र, मनोचिकित्सक, ईएनटी और शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विशेषज्ञ शामिल होते हैं। सभी विशेषज्ञों की रिपोर्टलगने के बाद दिव्यांगता का प्रमाण पत्र बनता है।