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Holashtak 2026: होलाष्टक 24 फरवरी से हो रहे शुरू, आठ दिन तक ये शुभ कार्य होते हैं वर्जित; जान लें
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 23 Feb 2026 12:56 PM IST
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सार
होली का त्योहार आने वाला है। हिंदू धर्म में होली का बहुत ही ज्यादा महत्व होता है। हर साल हमारे देश में होली का पर्व बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। इससे पूर्व होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू हो रहे हैं। इन दिनों में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।
होलाष्टक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
होलाष्टक के चलते शहर में आठ दिन तक मांगलिक कार्य नहीं होंगे। होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च तक रहेगा। कोठी फोड़ा मंदिर के छैल बिहारी शास्त्री के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से पूर्णिमा तक आठ दिन होलाष्टक होते हैं।
ये दिन होली से ठीक आठ दिन पहले आरंभ होते हैं इसलिए कई स्थानों पर इन्हें होलियां भी कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन आठ दिन में किसी भी प्रकार के शुभ और मांगलिक कामों को नहीं किया जाता है। होलिका दहन के साथ होलाष्टक का समापन हो जाता है।
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ये दिन होली से ठीक आठ दिन पहले आरंभ होते हैं इसलिए कई स्थानों पर इन्हें होलियां भी कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन आठ दिन में किसी भी प्रकार के शुभ और मांगलिक कामों को नहीं किया जाता है। होलिका दहन के साथ होलाष्टक का समापन हो जाता है।
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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन आठ दिनों में ही भक्त प्रह्लाद को उनके पिता हिरण्यकश्यप ने यातनाएं दी थीं। आठवें दिन उन्हें होलिका की गोद में भस्म होने के लिए बिठाया गया था। इस समय को तपस्या, भक्ति और पूजा-पाठ के लिए उत्तम माना जाता है लेकिन किसी नई और सुखद शुरुआत के लिए वर्जित रखा गया है। इसी वजह से विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या व्यापार उद्घाटन जैसे जरूरी काम नहीं होते हैं।
होलाष्टक में नहीं करने चाहिए ये काम
कहा जाता है कि होलाष्टक में कभी भी विवाह, मुंडन, नामकरण, सगाई समेत 16 संस्कार नहीं करने चाहिए। इसके अलावा फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से लेकर पूर्णिमा के मध्य किसी भी दिन नए मकान का निर्माण कार्य प्रारंभ न कराएं और न ही गृह प्रवेश करें।
कहा जाता है कि होलाष्टक में कभी भी विवाह, मुंडन, नामकरण, सगाई समेत 16 संस्कार नहीं करने चाहिए। इसके अलावा फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से लेकर पूर्णिमा के मध्य किसी भी दिन नए मकान का निर्माण कार्य प्रारंभ न कराएं और न ही गृह प्रवेश करें।
मान्यता के अनुसार, होलाष्टक के समय में नए मकान, वाहन, प्लॉट या दूसरे प्रॉपर्टी की खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है। होलाष्टक के समय में कोई भी यज्ञ, हवन आदि कार्यक्रम नहीं करना चाहिए। आप चाहें तो ये कार्य होली के बाद या उससे पहले कर सकते हैं।
मान्यताओं के अनुसार, होलाष्टक के समय में नौकरी परिवर्तन से बचना चाहिए। यदि नई जॉब ज्वाइन करनी है, तो उसे होलाष्टक के पहले या बाद में करें। ये भी कहा जाता है कि होलाष्टक के समय में कोई भी नया बिजनेस शुरु करने से बचना चाहिए। नए बिजनेस की शुरुआत के लिए ये समय अच्छा नहीं माना जाता है।
