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Mathura News: किसान के नाम पर लाखों रुपये का लोन हड़पा
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वृंदावन। बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार कर किसान के नाम पर लाखों रुपये का लोन हड़पने का मामला सामने आया है। पीड़ित किसान ने न्यायालय के आदेश पर वृंदावन कोतवाली में रमणरेती क्षेत्र स्थित एक बैक शाखा के अज्ञात अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।
छाता के तरौली जूनूबी गांव निवासी मानसिंह ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मथुरा के आदेश पर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई है। इसमें उन्होंने बताया कि अपनी कृषि भूमि की खतौनी निकलवाई तो उन्हें पता चला कि उनकी जमीन पर रमणरेती स्थित एक बैंक शाखा द्वारा अप्रैल 2018 में 3-3 लाख रुपये का लोन दर्ज है। इससे पहले बैंक ने उन्हें 24 दिसंबर 2014 को 1,53,608 रुपये का लोन बकाया होने का नोटिस भी भेजा था जिसमें ब्याज सहित 2,72,579.93 रुपये की मांग की गई थी। पीड़ित मानसिंह का आरोप है कि उन्होंने साल 2014 या 2018 में बैंक की इस शाखा से कभी कोई लोन नहीं लिया और न ही किसी धनराशि ली। जब उन्होंने बैंक से इस संबंध में दस्तावेज मांगे, तो बैंक शाखा प्रबंधन ने यह कहकर जानकारी देने से मना कर दिया कि आवेदन पर किए गए हस्ताक्षर खाताधारक के मूल हस्ताक्षरों से मेल नहीं खाते हैं इसलिए सूचना नहीं दी जा सकती।
बैंक के इस जवाब से यह साफ हो गया कि फर्जी हस्ताक्षर बनाकर बैंक अधिकारियों, कर्मचारियों और दलालों की मिलीभगत से लोन राशि की हेराफेरी की गई है। मामले की शिकायत पुलिस और एसएसपी से किए जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद पीड़ित ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। सीओ सदर वरुण मिश्रा ने बताया कि अदालत के आदेश पर पीड़ित की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
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छाता के तरौली जूनूबी गांव निवासी मानसिंह ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मथुरा के आदेश पर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई है। इसमें उन्होंने बताया कि अपनी कृषि भूमि की खतौनी निकलवाई तो उन्हें पता चला कि उनकी जमीन पर रमणरेती स्थित एक बैंक शाखा द्वारा अप्रैल 2018 में 3-3 लाख रुपये का लोन दर्ज है। इससे पहले बैंक ने उन्हें 24 दिसंबर 2014 को 1,53,608 रुपये का लोन बकाया होने का नोटिस भी भेजा था जिसमें ब्याज सहित 2,72,579.93 रुपये की मांग की गई थी। पीड़ित मानसिंह का आरोप है कि उन्होंने साल 2014 या 2018 में बैंक की इस शाखा से कभी कोई लोन नहीं लिया और न ही किसी धनराशि ली। जब उन्होंने बैंक से इस संबंध में दस्तावेज मांगे, तो बैंक शाखा प्रबंधन ने यह कहकर जानकारी देने से मना कर दिया कि आवेदन पर किए गए हस्ताक्षर खाताधारक के मूल हस्ताक्षरों से मेल नहीं खाते हैं इसलिए सूचना नहीं दी जा सकती।
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बैंक के इस जवाब से यह साफ हो गया कि फर्जी हस्ताक्षर बनाकर बैंक अधिकारियों, कर्मचारियों और दलालों की मिलीभगत से लोन राशि की हेराफेरी की गई है। मामले की शिकायत पुलिस और एसएसपी से किए जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद पीड़ित ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। सीओ सदर वरुण मिश्रा ने बताया कि अदालत के आदेश पर पीड़ित की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
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