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Mathura News: मुड़िया संतों ने निकाली शोभायात्रा
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गोवर्धन। ढप-ढोल, हारमोनियम और मृदंग की धुनों के बीच मुड़िया संतों की ऐसी शोभायात्रा निकली कि मानो भक्ति की रसधार बह रही हो। गोवर्धन में हरिनाम संकीर्तन के बीच गुरु भक्ति में तल्लीन होकर पहली मुड़िया शोभायात्रा राधाश्याम सुंदर मंदिर से निकाली गई।
बुधवार सुबह 10 बजे महंत रामकृष्ण दास महाराज के निर्देशन में गुरु सनातन गोस्वामी के डोला के साथ शोभायात्रा निकली। चकलेश्वर स्थित सनातन गोस्वामी की भजन कुटीर पर नमन करने के बाद मुड़िया संतों ने मुंडन कराया। इसके बाद हरिनाम संकीर्तन के साथ नृत्य करते हुए निकले। वहीं दूसरी शोभायात्रा सायंकालीन बेला में महाप्रभु जी मंदिर से महंत गोपाल दास महाराज के निर्देशन में निकाली गई। शोभायात्रा से पूर्व श्रीपाद रघुनाथ दास गोस्वामी गद्दी राधाकुंड के निशान-चिह्न गोवर्धन पहुंचे। सूचक कीर्तन के बाद शोभायात्रा निकली।
मुड़िया संत गोपाल दास महाराज ने बताया कि पश्चिम बंगाल से लगभग पांच सौ वर्ष पूर्व आकर सनातन गोस्वामी पाद ने श्री चैतन्य महाप्रभु के निर्देश पर भगवान श्रीकृष्ण की लीला स्थलियों की खोज की थी। प्रभु भक्ति में गोवर्धन में चक्लेश्वर सनातन गोस्वामी के गोलोकवास के बाद उनके अनुयायियों, भक्तों और ब्रजवासियों ने सिर मुड़वाकर नगर भ्रमण करते हुए मानसी गंगा की परिक्रमा की थी। तभी से इसका नाम मुड़िया पूर्णिमा पड़ गया।
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गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन करते हुए पांच सौ वर्षों से यह शोभायात्रा भक्ति और आस्था का जीवंत उदाहरण बन गई है। मुड़िया शोभायात्रा मानसी गंगा की परिक्रमा करते हुए प्राचीन ऐतिहासिक स्थल चकलेश्वर महाप्रभु जी की बैठक, दसविसा हरिदेव जी के मंदिर होते हुए दानघाटी मंदिर, डीग अड्डा, बड़ा बाजार, हाथी दरवाजा होते हुए पुनः शुभारंभ स्थल पर ही संपन्न हुई। यात्रा में जगह-जगह आरती उतारकर पुष्प वर्षा की गई।
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बुधवार सुबह 10 बजे महंत रामकृष्ण दास महाराज के निर्देशन में गुरु सनातन गोस्वामी के डोला के साथ शोभायात्रा निकली। चकलेश्वर स्थित सनातन गोस्वामी की भजन कुटीर पर नमन करने के बाद मुड़िया संतों ने मुंडन कराया। इसके बाद हरिनाम संकीर्तन के साथ नृत्य करते हुए निकले। वहीं दूसरी शोभायात्रा सायंकालीन बेला में महाप्रभु जी मंदिर से महंत गोपाल दास महाराज के निर्देशन में निकाली गई। शोभायात्रा से पूर्व श्रीपाद रघुनाथ दास गोस्वामी गद्दी राधाकुंड के निशान-चिह्न गोवर्धन पहुंचे। सूचक कीर्तन के बाद शोभायात्रा निकली।
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मुड़िया संत गोपाल दास महाराज ने बताया कि पश्चिम बंगाल से लगभग पांच सौ वर्ष पूर्व आकर सनातन गोस्वामी पाद ने श्री चैतन्य महाप्रभु के निर्देश पर भगवान श्रीकृष्ण की लीला स्थलियों की खोज की थी। प्रभु भक्ति में गोवर्धन में चक्लेश्वर सनातन गोस्वामी के गोलोकवास के बाद उनके अनुयायियों, भक्तों और ब्रजवासियों ने सिर मुड़वाकर नगर भ्रमण करते हुए मानसी गंगा की परिक्रमा की थी। तभी से इसका नाम मुड़िया पूर्णिमा पड़ गया।
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गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन करते हुए पांच सौ वर्षों से यह शोभायात्रा भक्ति और आस्था का जीवंत उदाहरण बन गई है। मुड़िया शोभायात्रा मानसी गंगा की परिक्रमा करते हुए प्राचीन ऐतिहासिक स्थल चकलेश्वर महाप्रभु जी की बैठक, दसविसा हरिदेव जी के मंदिर होते हुए दानघाटी मंदिर, डीग अड्डा, बड़ा बाजार, हाथी दरवाजा होते हुए पुनः शुभारंभ स्थल पर ही संपन्न हुई। यात्रा में जगह-जगह आरती उतारकर पुष्प वर्षा की गई।