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Mathura News: बेलवन से केलिकुंज तक उमड़ा आस्था का सैलाब, संत प्रेमानंद महाराज ने दीक्षित परिकरों को दिया आशीर्वाद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jul 2026 01:05 AM IST
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Saint Premanand Maharaj blessed his initiated disciples
वृंदावन। गुरु पूर्णिमा पर बेलवन स्थित आश्रम में श्रद्धा, भक्ति और गुरु महिमा का संगम देखने को मिला। देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं और दीक्षित परिकरों ने सद्गुरु संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। महाराज के आश्रम पहुंचते ही परिकरों ने उनके मार्ग पर फूलों की चादर बिछाकर भव्य स्वागत किया। पूरे परिसर में गुरु वंदना, हरिनाम संकीर्तन और जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
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सुबह संत प्रेमानंद महाराज ने अपने दीक्षित परिकरों से स्नेहपूर्वक मुलाकात कर उन्हें आशीर्वाद दिया। गुरु के दर्शन करते ही अनेक श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और उन्होंने गुरु चरणों में नमन कर आध्यात्मिक उन्नति की कामना की।
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अपने आशीर्वचन में संत प्रेमानंद महाराज ने कहा कि सबसे बड़ी गुरु पूजा गुरु के वास्तविक स्वरूप को समझना है। उन्होंने कहा कि सांसारिक माता-पिता, भाई-बंधुओं से हमारा संबंध अलग होता है जबकि गुरु साक्षात परब्रह्म का स्वरूप हैं। उन्होंने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा, गुरु साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः। जो साधक गुरु को ब्रह्मस्वरूप मानता है, वही गुरु कृपा का वास्तविक अधिकारी बनता है।
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उन्होंने कहा कि भगवान श्रीहरि अपने शरणागत जीवों के कल्याण के लिए स्वयं गुरु रूप धारण करते हैं। गुरु ही अज्ञान रूपी अंधकार को ज्ञान के प्रकाश से दूर करते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु जीव के ज्ञान चक्षु खोलकर उसे ईश्वर प्राप्ति का मार्ग दिखाते हैं।

संत प्रेमानंद महाराज ने कहा कि अपने प्रभु और गुरुदेव की आज्ञा का पालन करना ही वास्तविक गुरु पूजा है। भगवान का नाम ही प्रेम का मूल है। इसलिए साधक को निरंतर नाम-स्मरण में लगे रहना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे भगवान से यही प्रार्थना करें कि उनका मन सदा प्रभु के चरणों और उनके पवित्र नाम में स्थिर रहे। उन्होंने कहा कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ और क्षणभंगुर है, इसलिए प्रत्येक पल को भक्ति, नाम-स्मरण और गुरु की सेवा में लगाना ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
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