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आंधी का कहर: उड़ गए टिनशेड-होर्डिंग्स, बिजली हुई गुल, फसलें भी हो गई खराब; देखें वीडियो
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 19 Mar 2026 12:23 PM IST
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सार
तेज आंधी और बूंदाबांदी से मथुरा में होर्डिंग्स, टिनशेड और पेड़ उखड़ गए, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ। बिजली आपूर्ति ठप रही और गेहूं-सरसों की फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ गया है।
राष्ट्रपति के आगमन पर सजाए गए चौराहे आंधी में बिगड़े।
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विस्तार
मथुरा में शाम करीब आठ बजे से धूल भरी आंधी के साथ ही बूंदाबांदी के साथ मौसम ने करवट बदली।आंधी से शहर से लेकर देहात तक होर्डिंग्स, टिनशेड उड़ गए। कई स्थानों पर पेड़, कच्चे घर भी गिरे हैं। करीब 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली आंधी से जन-जीवन प्रभावित हुआ। बिजली भी गुल हो गई, जोकि देर रात को सुचारू हो सकी। गेहूं और सरसों की फसलों को भी नुकसान पहुंचा है।
बुधवार रात करीब आठ बजे हवा की गति 40 से 45 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई। इससे धूल भरी आंधी चलने से दृश्यता कम हो गई और सड़कों पर आवागमन प्रभावित हुआ। हालांकि, आंधी के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को गर्मी से मामूली राहत मिली है, लेकिन बिजली आपूर्ति बाधित होने से परेशानी का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर देर रात तक विद्युतापूर्ति सुचारु नहीं हो सकी थी।
आंधी में कई स्थानों पर होर्डिंग, पेड़ और टिनशेड उखड़ गए। वहीं देहात में कच्चे घरों को नुकसान पहुंचा। छप्पर भी उड़ गए। गेहूं और सरसों की फसलें खेतों में पककर लगभग तैयार हैं। कई स्थानों पर सरसों की कटाई का काम शुरू हो चुका है, तो कहीं फसलें कटकर खलिहान में पड़ी हैं। ऐसे समय में आंधी के कारण गेहूं की खड़ी फसल गिरने का डर बना हुआ है। किसानों का कहना है कि यदि आंधी के साथ बारिश या ओले गिरे तो दाना काला पड़ सकता है। पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है। विशेषकर सरसों की कटी हुई फसल के भीगने से भारी नुकसान की आशंका है।
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बुधवार रात करीब आठ बजे हवा की गति 40 से 45 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई। इससे धूल भरी आंधी चलने से दृश्यता कम हो गई और सड़कों पर आवागमन प्रभावित हुआ। हालांकि, आंधी के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को गर्मी से मामूली राहत मिली है, लेकिन बिजली आपूर्ति बाधित होने से परेशानी का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर देर रात तक विद्युतापूर्ति सुचारु नहीं हो सकी थी।
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आंधी में कई स्थानों पर होर्डिंग, पेड़ और टिनशेड उखड़ गए। वहीं देहात में कच्चे घरों को नुकसान पहुंचा। छप्पर भी उड़ गए। गेहूं और सरसों की फसलें खेतों में पककर लगभग तैयार हैं। कई स्थानों पर सरसों की कटाई का काम शुरू हो चुका है, तो कहीं फसलें कटकर खलिहान में पड़ी हैं। ऐसे समय में आंधी के कारण गेहूं की खड़ी फसल गिरने का डर बना हुआ है। किसानों का कहना है कि यदि आंधी के साथ बारिश या ओले गिरे तो दाना काला पड़ सकता है। पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है। विशेषकर सरसों की कटी हुई फसल के भीगने से भारी नुकसान की आशंका है।