UP: स्मार्ट प्रीपेड मीटर विवाद पर नियामक आयोग सख्त, संविदा कार्मिकों की छटनी पर सात दिन में मांगी रिपोर्ट
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम में संविदा कर्मचारियों की लगातार छंटनी पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने चिंता जताई। अध्यक्ष ने कहा कि इससे विद्युत आपूर्ति प्रभावित हो रही है और राजस्व नुकसान बढ़ रहा है। नियामक आयोग ने निगम प्रबंधन से सात दिन में रिपोर्ट मांगी है।
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प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर विद्युत नियामक आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी बिजली कंपनियों को नोटिस जारी किया है। कंपनियों के प्रबंध निदेशकों को 15 दिन के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदेश में अब तक 74,48,263 स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से 69,64,944 उपभोक्ताओं के मीटर बिना पूर्व सूचना प्रीपेड मोड में बदल दिए गए। इनमें 5,84,269 उपभोक्ताओं पर करीब 1753 करोड़ रुपये का नेगेटिव बैलेंस दर्ज हुआ। इसके बाद 13 से 18 मार्च के बीच चलाए गए ऑटोमेटिक डिस्कनेक्शन अभियान में 5,79,066 उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन स्वतः काट दिए गए। रिचार्ज के बाद भी कई घंटों तक बिजली आपूर्ति बहाल न होने से प्रदेशभर में असंतोष और कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हुई।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग से शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि बिजली कंपनियों ने स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस विनियमावली 2019 का उल्लंघन किया है। परिषद का कहना है कि रिचार्ज के तुरंत बाद बिजली आपूर्ति बहाल होनी चाहिए, जबकि कई मामलों में घंटों की देरी हुई। नियमों के अनुसार दो घंटे से अधिक देरी होने पर उपभोक्ताओं को प्रतिदिन 50 रुपये मुआवजा दिया जाना चाहिए और दोषी बिजली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
आयोग ने कंपनियों से 1 फरवरी से 20 मार्च 2026 तक कनेक्शन बहाली, देरी के कारण और मुआवजा दावों का पूरा ब्योरा मांगा है। वर्मा ने टेंडर लागत में वृद्धि और निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के आरोपों की उच्चस्तरीय जांच की मांग भी की है।
संविदा कर्मचारी की छांटने का मुद्दा उठाया
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की जन सुनवाई के संविदा कर्मचारी की छांटने का मुद्दा उठाया। इस पर नियामक आयोग ने निगम प्रबन्धन से सात दिन में जवाब मांगा है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष केंद्र एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने सुनवाई में कहा कि संविदा कर्मियों की लगातार छटनी से पूरे प्रदेश की विद्युत व्यवस्था बदहाल हो रही है।
परिषद ने प्रमुखता से यह मुद्दा उठाया कि प्रबंधन द्वारा लिए जा रहे निर्णय जानबूझकर विद्युत आपूर्ति बाधित करने की श्रेणी में आते हैं, जो हड़ताल जैसी स्थिति उत्पन्न करते हैं। ऐसे में इस प्रकार के प्रबंधन के खिलाफ एस्मा लागू किया जाना चाहिए।
बरेली में जब यह मुद्दा उठाया गया था तो इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन चेंबर ऑफ कॉमर्स राइस मिल एसोसिएशन सहित सभी उपभोक्ता प्रतिनिधियों ने उपभोक्ता परिषद की बात का समर्थन किया था और कहा था बरेली में 300 इंडस्ट्री पर एक लाइनमैन है कैसे विद्युत आपूर्ति चलेगी सबको बाहर कर दोगे तो विद्युत आपूर्ति हड़ताल से भी बदतर हो जाएगी
उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम द्वारा कॉन्ट्रैक्ट मैनपावर पर 417 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, इसके बावजूद भी फील्ड स्तर के कर्मचारियों की लगातार छटनी की जा रही है, जिससे विद्युत आपूर्ति बहाली में अत्यधिक विलंब हो रहा है और राजस्व का नुकसान बढ़ रहा है।