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Mathura News: गुरु भक्ति में डूबा वृंदावन, धर्म के मार्ग पर चलकर भविष्य संवारने को दिया संदेश
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वात्सल्य ग्राम में साध्वी ऋतंभरा से आशीर्वाद लेते शिष्य।
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वृंदावन। गुरु पूर्णिमा पर बुधवार को वृंदावन धाम गुरु भक्ति में रंगा नजर आया। सुबह से भक्तों का आश्रमों में पहुंचना शुरू हो गया था। प्रमुख आश्रम, मंदिर और संत निवासों में गुरु पूजन के लिए शिष्यों की लंबी कतारें लगी रहीं। पंचकोसीय परिक्रमा मार्ग, छटीकरा रोड, ज्ञान गुदड़ी और वात्सल्य ग्राम सहित विभिन्न स्थानों पर धार्मिक अनुष्ठान, आरती, प्रवचन और भंडारों का आयोजन हुआ। दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए भोजन व ठहरने की व्यवस्था की गई, जबकि भीड़ को देखते हुए पुलिस भी सुरक्षा और यातायात व्यवस्था में मुस्तैद रही।
छटीकरा मार्ग स्थित ठाकुर श्री प्रियाकांतजू मंदिर में गुरु पूर्णिमा महोत्सव पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथावाचक देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज के मंदिर पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने पूजन किया। कोलकाता से आए भक्तों ने आरती उतारी। आशीर्वचन में देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज ने शिष्यों को नशामुक्त, सात्विक और धर्मानुकूल जीवन अपनाने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि धर्म के मार्ग पर चलकर ही व्यक्ति अपना वर्तमान और भविष्य दोनों संवार सकता है। युवाओं का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि अपनी बात मजबूती से रखना आवश्यक है, लेकिन भाषा की मर्यादा बनाए रखना भी जरूरी है। संस्कारों से ही संस्कृति जीवित रहती है। गुरु पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने गुरु प्रसादी ग्रहण की और शाम को संकीर्तन में भजनों का आनंद लिया।
साध्वी ऋतंभरा बोलीं, गुरु के प्रति कृतज्ञता ही सच्ची साधना
वृंदावन। वात्सल्य ग्राम में गुरु पूर्णिमा श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाई गई। वात्सल्य मूर्ति साध्वी ऋतंभरा ने गुरु परंपरा की चरण पादुकाओं का पूजन किया। उनके साधु-साध्वी शिष्यों ने गुरु चरणों का पूजन कर आरती उतारी।
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शिष्यों और साधकों को संबोधित करते हुए साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि गुरु पूर्णिमा गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। जहां कृतज्ञता होती है, वहां शिकायत का स्थान नहीं रहता। सतगुरु ही मनुष्य को बंधनों से मुक्त कर आत्मिक उन्नति के मार्ग पर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि इच्छाएं कभी समाप्त नहीं होतीं। मनुष्य जब तक इच्छाओं और मोह में उलझा रहता है, तब तक शांति नहीं मिलती। मन के शांत होने पर ही चेतना का वास्तविक अनुभव होता है। कार्यक्रम में समविद की छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से गुरु महिमा का गुणगान किया। इस दौरान संजय गुप्ता, स्वामी सत्यशील, साध्वी सुहृदया, साध्वी सत्यप्रिया, साध्वी सत्यश्रुति, स्वामी सत्यश्रेय और स्वामी सत्यश्रवा और उमाशंकर राही मौजूद रहे।
वहीं ज्ञान गुदड़ी स्थित ताड़ वाली कुंज में गुरु पूर्णिमा पर पंडित भक्तमालीजी के निवास पर पंडित जगन्नाथ प्रसाद भक्तमाली के चित्रपट के पूजन के साथ-साथ ही लाली वृन्दावनीजी का पूजन किया गया। पंडित रसिक शर्मा द्वारा गुरु दीक्षा प्रदान की गई। डॉ. अनूप शर्मा ने संचालन किया। पागल बाबा मंदिर में गुरु पूजन कार्यक्रम किया गया। व्यवस्था बल्देव चतुर्वेदी, एसके तिवड़ेवाल, किशोर तोषरीवाल, जितेंद्र लूमटा, रवि झुनझुनवाला, संदीप वैद्य आदि ने संभालीं।
गुरु के बताए मार्ग पर चलेंगे तो मोहमाया के बंधन से मुक्त हो जाएंगे-राधाप्रसाद देव जू महाराज
वृंदावन। पंचकोसीय परिक्रमा मार्ग स्थित ललित कुंज आश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव पूरे वैदिक विधि-विधान के साथ मनाया गया। सुबह से ही देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं और शिष्यों की भीड़ आश्रम में जुटने लगी। हरिदासीय संप्रदाय के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी राधा प्रसाद देव जू महाराज के सान्निध्य में विशेष पूजन और धार्मिक अनुष्ठान हुए। आरती के बाद शिष्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गुरुदेव का पूजन किया। पुष्पमालाएं, अंगवस्त्र, चंदन, फल और मिष्ठान अर्पित कर आशीर्वाद लिया।
महाराज ने कहा कि गुरु के ज्ञान ही जीवन की नैया को पार लगाता है। मोहमाया के बंधन से मुक्त कराता है। पूरे आश्रम में गुरु वंदना और जयघोष गूंजते रहे। आश्रम के महंत मोहिनी बिहारी शरण महाराज ने कहा कि सनातन परंपरा में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। गुरु ही व्यक्ति को अज्ञान से निकालकर ज्ञान के प्रकाश तक पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि ललित कुंज आश्रम गुरु-शिष्य परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।
चरणाश्रम में मनाया गया गुरु पूर्णिमा महोत्सव
वृंदावन। नगर के परिक्रमा मार्ग स्थित चरणाश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा के साथ मनाया गया।आश्रम के महंत महामंडलेश्वर सत्यानन्द सरस्वती अधिकारी गुरु महाराज का शिष्यों द्वारा विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया। डाॅ.सत्यानंद सरस्वती अधिकारी गुरु महाराज ने कहा कि गुरु और भक्त का संबंध बेहद विशेष और पवित्र होता है। इसी मजबूत संबंध की नींव पर एक आदर्श और अच्छे समाज का निर्माण होता है। गुरु का ज्ञान ही शिष्य के जीवन के अंधकार को मिटाकर उसे सही मार्ग दिखाता है।
वहीं हनुमान टेकरी आश्रम में भी गुरु पूर्णिमा की भारी धूम देखने को मिली। आश्रम के महंत शिवबालक दास महाराज एवं अधिकारी महंत दशरथ दास महाराज का शिष्यों ने पूजन कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर अधिकारी महंत दशरथ दास महाराज ने बताया कि गुरु पूर्णिमा का दिन आत्मनिरीक्षण और गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। सनातन संस्कृति में गुरु को भगवान से भी उच्च दर्जा दिया गया है, क्योंकि गुरु ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। संवाद
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छटीकरा मार्ग स्थित ठाकुर श्री प्रियाकांतजू मंदिर में गुरु पूर्णिमा महोत्सव पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथावाचक देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज के मंदिर पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने पूजन किया। कोलकाता से आए भक्तों ने आरती उतारी। आशीर्वचन में देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज ने शिष्यों को नशामुक्त, सात्विक और धर्मानुकूल जीवन अपनाने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि धर्म के मार्ग पर चलकर ही व्यक्ति अपना वर्तमान और भविष्य दोनों संवार सकता है। युवाओं का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि अपनी बात मजबूती से रखना आवश्यक है, लेकिन भाषा की मर्यादा बनाए रखना भी जरूरी है। संस्कारों से ही संस्कृति जीवित रहती है। गुरु पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने गुरु प्रसादी ग्रहण की और शाम को संकीर्तन में भजनों का आनंद लिया।
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साध्वी ऋतंभरा बोलीं, गुरु के प्रति कृतज्ञता ही सच्ची साधना
वृंदावन। वात्सल्य ग्राम में गुरु पूर्णिमा श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाई गई। वात्सल्य मूर्ति साध्वी ऋतंभरा ने गुरु परंपरा की चरण पादुकाओं का पूजन किया। उनके साधु-साध्वी शिष्यों ने गुरु चरणों का पूजन कर आरती उतारी।
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शिष्यों और साधकों को संबोधित करते हुए साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि गुरु पूर्णिमा गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। जहां कृतज्ञता होती है, वहां शिकायत का स्थान नहीं रहता। सतगुरु ही मनुष्य को बंधनों से मुक्त कर आत्मिक उन्नति के मार्ग पर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि इच्छाएं कभी समाप्त नहीं होतीं। मनुष्य जब तक इच्छाओं और मोह में उलझा रहता है, तब तक शांति नहीं मिलती। मन के शांत होने पर ही चेतना का वास्तविक अनुभव होता है। कार्यक्रम में समविद की छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से गुरु महिमा का गुणगान किया। इस दौरान संजय गुप्ता, स्वामी सत्यशील, साध्वी सुहृदया, साध्वी सत्यप्रिया, साध्वी सत्यश्रुति, स्वामी सत्यश्रेय और स्वामी सत्यश्रवा और उमाशंकर राही मौजूद रहे।
वहीं ज्ञान गुदड़ी स्थित ताड़ वाली कुंज में गुरु पूर्णिमा पर पंडित भक्तमालीजी के निवास पर पंडित जगन्नाथ प्रसाद भक्तमाली के चित्रपट के पूजन के साथ-साथ ही लाली वृन्दावनीजी का पूजन किया गया। पंडित रसिक शर्मा द्वारा गुरु दीक्षा प्रदान की गई। डॉ. अनूप शर्मा ने संचालन किया। पागल बाबा मंदिर में गुरु पूजन कार्यक्रम किया गया। व्यवस्था बल्देव चतुर्वेदी, एसके तिवड़ेवाल, किशोर तोषरीवाल, जितेंद्र लूमटा, रवि झुनझुनवाला, संदीप वैद्य आदि ने संभालीं।
गुरु के बताए मार्ग पर चलेंगे तो मोहमाया के बंधन से मुक्त हो जाएंगे-राधाप्रसाद देव जू महाराज
वृंदावन। पंचकोसीय परिक्रमा मार्ग स्थित ललित कुंज आश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव पूरे वैदिक विधि-विधान के साथ मनाया गया। सुबह से ही देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं और शिष्यों की भीड़ आश्रम में जुटने लगी। हरिदासीय संप्रदाय के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी राधा प्रसाद देव जू महाराज के सान्निध्य में विशेष पूजन और धार्मिक अनुष्ठान हुए। आरती के बाद शिष्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गुरुदेव का पूजन किया। पुष्पमालाएं, अंगवस्त्र, चंदन, फल और मिष्ठान अर्पित कर आशीर्वाद लिया।
महाराज ने कहा कि गुरु के ज्ञान ही जीवन की नैया को पार लगाता है। मोहमाया के बंधन से मुक्त कराता है। पूरे आश्रम में गुरु वंदना और जयघोष गूंजते रहे। आश्रम के महंत मोहिनी बिहारी शरण महाराज ने कहा कि सनातन परंपरा में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। गुरु ही व्यक्ति को अज्ञान से निकालकर ज्ञान के प्रकाश तक पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि ललित कुंज आश्रम गुरु-शिष्य परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।
चरणाश्रम में मनाया गया गुरु पूर्णिमा महोत्सव
वृंदावन। नगर के परिक्रमा मार्ग स्थित चरणाश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा के साथ मनाया गया।आश्रम के महंत महामंडलेश्वर सत्यानन्द सरस्वती अधिकारी गुरु महाराज का शिष्यों द्वारा विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया। डाॅ.सत्यानंद सरस्वती अधिकारी गुरु महाराज ने कहा कि गुरु और भक्त का संबंध बेहद विशेष और पवित्र होता है। इसी मजबूत संबंध की नींव पर एक आदर्श और अच्छे समाज का निर्माण होता है। गुरु का ज्ञान ही शिष्य के जीवन के अंधकार को मिटाकर उसे सही मार्ग दिखाता है।
वहीं हनुमान टेकरी आश्रम में भी गुरु पूर्णिमा की भारी धूम देखने को मिली। आश्रम के महंत शिवबालक दास महाराज एवं अधिकारी महंत दशरथ दास महाराज का शिष्यों ने पूजन कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर अधिकारी महंत दशरथ दास महाराज ने बताया कि गुरु पूर्णिमा का दिन आत्मनिरीक्षण और गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। सनातन संस्कृति में गुरु को भगवान से भी उच्च दर्जा दिया गया है, क्योंकि गुरु ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। संवाद