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UP: क्या आपको पता है यमुना एक्सप्रेस-वे पर क्यों हो रहे हादसे, टायर फटने से 10.0 प्रतिशत; ये भी हैं बड़ी वजह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Mon, 13 Apr 2026 10:00 AM IST
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सार
यमुना एक्सप्रेस-वे पर हर दिन औसतन दो हादसे हो रहे हैं, जिनमें नींद, ओवरस्पीडिंग और लापरवाही मुख्य कारण हैं। करोड़ों खर्च के बावजूद दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे ड्राइविंग अनुशासन और सख्त नियमों की जरूरत साफ दिखती है।
यमुना एक्सप्रेस वे
- फोटो : iStock
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विस्तार
देश के सबसे आधुनिक और तेज माने जाने वाले यमुना एक्सप्रेस वे पर रोजाना करीब दो हादसे हो रहे हैं। आरटीआई में इसका खुलासा हुआ है। हर दिन दो परिवारों के उजड़ने के लिए ओवर स्पीडिंग और थकान के चलते झपकी आना सबसे बड़ी वजह है। पिछले 14 वर्षों में कुल 8,812 दुर्घटनाएं दर्ज हुई हैं। इनमें सबसे अधिक घटनाएं 2025 में हुई हैं। इनमें नींद और झपकी आने से 3700, ओवरस्पीडिंग से 1319 और टायर फटने से 853 हादसे हुए हैं। जबकि सड़क सुधार और सुरक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता केसी जैन ने बताया कि आरटीआई से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार यमुना एक्सप्रेस वे पर अधिकांश दुर्घटनाएं सड़क की खराबी से नहीं, बल्कि चालक की गलती से हो रही हैं। वर्ष 2012 से 2025 के बीच हुई कुल दुर्घटनाओं में लगभग 42 प्रतिशत मामलों में चालक के सो जाने या झपकी आने को मुख्य कारण पाया गया, जबकि 22.7 प्रतिशत दुर्घटनाएं लापरवाही के कारण हुईं और 15 प्रतिशत मामलों में ओवरस्पीड जिम्मेदार रही।
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सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता केसी जैन ने बताया कि आरटीआई से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार यमुना एक्सप्रेस वे पर अधिकांश दुर्घटनाएं सड़क की खराबी से नहीं, बल्कि चालक की गलती से हो रही हैं। वर्ष 2012 से 2025 के बीच हुई कुल दुर्घटनाओं में लगभग 42 प्रतिशत मामलों में चालक के सो जाने या झपकी आने को मुख्य कारण पाया गया, जबकि 22.7 प्रतिशत दुर्घटनाएं लापरवाही के कारण हुईं और 15 प्रतिशत मामलों में ओवरस्पीड जिम्मेदार रही।
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वर्ष 2022 में दुर्घटनाओं की संख्या घटकर 311 तक आ गई थी, लेकिन इसके बाद यह तेजी से बढ़कर 2025 में 659 तक पहुंच गई। इससे भी चिंताजनक बात यह है कि 2025 में हुई दुर्घटनाओं में से 57.7 प्रतिशत केवल लापरवाही के कारण हुईं। माना जा सकता है कि एक्सप्रेस वे पर ड्राइविंग अनुशासन तेजी से कमजोर हो रहा है। गलत तरह से ओवरटेकिंग, अचानक ब्रेक लगाना, लेन बदलने में असावधानी और मोबाइल फोन का उपयोग बड़ा खतरा हैं।
ओवरलोड वाहन कर रहे नियमों की अवहेलना
आरटीआई में जानकारी दी गई है कि वर्ष 2025 में यमुना एक्सप्रेस वे पर कुल 25,731 ओवरलोड वाहन दर्ज किए गए। इनमें से जेवर टोल प्लाजा पर 1315, मथुरा टोल प्लाजा पर 3939 और आगरा टोल प्लाजा पर 20,477 ओवरलोडेड वाहन पाए गए। ओवरलोडेड वाहन में से लगभग 79.58 प्रतिशत केवल आगरा टोल प्लाजा पर पकड़े गए। चिंताजनक यह है कि इन हजारों वाहनों पर क्या कार्रवाई की गई जिसका कोई उल्लेख आरटीआई में नहीं दिया गया है।
आरटीआई में जानकारी दी गई है कि वर्ष 2025 में यमुना एक्सप्रेस वे पर कुल 25,731 ओवरलोड वाहन दर्ज किए गए। इनमें से जेवर टोल प्लाजा पर 1315, मथुरा टोल प्लाजा पर 3939 और आगरा टोल प्लाजा पर 20,477 ओवरलोडेड वाहन पाए गए। ओवरलोडेड वाहन में से लगभग 79.58 प्रतिशत केवल आगरा टोल प्लाजा पर पकड़े गए। चिंताजनक यह है कि इन हजारों वाहनों पर क्या कार्रवाई की गई जिसका कोई उल्लेख आरटीआई में नहीं दिया गया है।
131 करोड़ खर्च करने पर भी हादसों की संख्या बढ़ी
केसी जैन ने बताया कि सड़क सुरक्षा सुधार के लिए लगभग 131.50 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। इनमें आईआईटी दिल्ली द्वारा किए गए ऑडिट के आधार पर कई तकनीकी उपाय लागू किए गए। जिनमें स्पीड मॉनिटरिंग, रंबल स्ट्रिप्स, बैरियर सुरक्षा और कोहरे के दौरान चेतावनी प्रणाली शामिल हैं। इससे यह तय है कि केवल इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार पर्याप्त नहीं है। जब तक चालक के व्यवहार में बदलाव नहीं आएगा और नियमों का सख्ती से पालन नहीं कराया जाएगा। इन प्रयासों का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। स्थिति को सुधारने के लिए औसत गति आधारित चालान प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू किया जाना चाहिए। ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई पारदर्शी बनाई जाए। लंबी दूरी के चालकों के लिए अनिवार्य विश्राम नीति लागू की जानी चाहिए।
केसी जैन ने बताया कि सड़क सुरक्षा सुधार के लिए लगभग 131.50 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। इनमें आईआईटी दिल्ली द्वारा किए गए ऑडिट के आधार पर कई तकनीकी उपाय लागू किए गए। जिनमें स्पीड मॉनिटरिंग, रंबल स्ट्रिप्स, बैरियर सुरक्षा और कोहरे के दौरान चेतावनी प्रणाली शामिल हैं। इससे यह तय है कि केवल इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार पर्याप्त नहीं है। जब तक चालक के व्यवहार में बदलाव नहीं आएगा और नियमों का सख्ती से पालन नहीं कराया जाएगा। इन प्रयासों का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। स्थिति को सुधारने के लिए औसत गति आधारित चालान प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू किया जाना चाहिए। ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई पारदर्शी बनाई जाए। लंबी दूरी के चालकों के लिए अनिवार्य विश्राम नीति लागू की जानी चाहिए।
दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण (2012-2025)
कारण प्रतिशत
झपकी/नींद 42.0 प्रतिशत
लापरवाही/अन्य 22.7 प्रतिशत
ओवरस्पीड 15.0 प्रतिशत
टायर फटने से 10.0 प्रतिशत
अन्य (कोहरा, नशा आदि) शेष यानी हर तीन में से दो से अधिक दुर्घटनाएं सीधे तौर पर मानवीय लापरवाही से जुड़ी हैं।
कारण प्रतिशत
झपकी/नींद 42.0 प्रतिशत
लापरवाही/अन्य 22.7 प्रतिशत
ओवरस्पीड 15.0 प्रतिशत
टायर फटने से 10.0 प्रतिशत
अन्य (कोहरा, नशा आदि) शेष यानी हर तीन में से दो से अधिक दुर्घटनाएं सीधे तौर पर मानवीय लापरवाही से जुड़ी हैं।