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Mau News: डेढ़ साल से ब्लैकलिस्ट 66 स्कूली वाहनों से ढोए जा रहे बच्चे
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परिवहन शुल्क लेने के बावजूद लापरवाह स्कूल संचालक बच्चों की जान खतरे में डाल रहे हैं। बीते डेढ़ साल से एआरटीओ द्वारा ब्लैकलिस्ट किए गए 66 स्कूली वाहनों से बच्चों को ढोया जा रहा है। इससे परिवहन विभाग की कार्रवाई सवालों के घेरे में है।
नए शिक्षा सत्र के शुरू होने में नौ दिन शेष हैं, लेकिन अधिकांश स्कूल संचालकों ने अब तक वाहनों का फिटनेस नहीं कराया है। 16 मार्च तक जिले में 156 स्कूली वाहनों का फिटनेस फेल हो गया था।
नोटिस भेजने के बाद 44 वाहनों का फिटनेस कराया गया, जबकि 112 वाहनों का फिटनेस अब भी नहीं हुआ है। ऐसे वाहनों को परिवहन विभाग ने बीते सप्ताह ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
इन वाहनों की सूची सभी थानों को भेजी जा रही है, ताकि सड़कों पर चलते पाए जाने पर उन्हें सीज किया जा सके। एक से 15 अप्रैल तक एआरटीओ द्वारा विशेष चेकिंग अभियान चलाया जाएगा, जो केवल स्कूली वाहनों पर केंद्रित होगा।
सड़क पर जांच के साथ-साथ टीमें स्कूलों में भी पहुंचेंगी और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों को सीज करेंगी। हाल ही में कासगंज और आगरा में फिटनेस फेल स्कूली वाहनों से हादसे हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद स्कूल संचालक सतर्क नहीं हो रहे हैं।
यही फिटनेस फेल वाहन रोजाना नौनिहालों को घर से स्कूल तक पहुंचा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और गंभीर है। यहां नौनिहालों को ऑटो और ई-रिक्शा में क्षमता से अधिक बैठाकर ढोया जा रहा है। सात सीटर मैजिक और पांच सीटर ऑटो में 12 से 15 बच्चों को बैठाकर स्कूल लाया-ले जाया जा रहा है।
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नए शिक्षा सत्र के शुरू होने में नौ दिन शेष हैं, लेकिन अधिकांश स्कूल संचालकों ने अब तक वाहनों का फिटनेस नहीं कराया है। 16 मार्च तक जिले में 156 स्कूली वाहनों का फिटनेस फेल हो गया था।
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नोटिस भेजने के बाद 44 वाहनों का फिटनेस कराया गया, जबकि 112 वाहनों का फिटनेस अब भी नहीं हुआ है। ऐसे वाहनों को परिवहन विभाग ने बीते सप्ताह ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
इन वाहनों की सूची सभी थानों को भेजी जा रही है, ताकि सड़कों पर चलते पाए जाने पर उन्हें सीज किया जा सके। एक से 15 अप्रैल तक एआरटीओ द्वारा विशेष चेकिंग अभियान चलाया जाएगा, जो केवल स्कूली वाहनों पर केंद्रित होगा।
सड़क पर जांच के साथ-साथ टीमें स्कूलों में भी पहुंचेंगी और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों को सीज करेंगी। हाल ही में कासगंज और आगरा में फिटनेस फेल स्कूली वाहनों से हादसे हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद स्कूल संचालक सतर्क नहीं हो रहे हैं।
यही फिटनेस फेल वाहन रोजाना नौनिहालों को घर से स्कूल तक पहुंचा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और गंभीर है। यहां नौनिहालों को ऑटो और ई-रिक्शा में क्षमता से अधिक बैठाकर ढोया जा रहा है। सात सीटर मैजिक और पांच सीटर ऑटो में 12 से 15 बच्चों को बैठाकर स्कूल लाया-ले जाया जा रहा है।