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Mau News: हजरत अली असगर की याद में निकला झूला, अकीदतमंदों की आंखें हुईं नम
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नगर के मलिकटोला में निकले झूला जुलूस में मातम करते अकीदतमंद। स्रोत- स्वयं
- फोटो : 1
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मुहर्रम की पांचवीं तारीख को नगर के मलिक टोला में इमाम हुसैन के छह माह के मासूम बेटे हजरत अली असगर की शहादत की याद में अकीदत और एहतराम के साथ झूला (गहवारा) उठाया गया।
ताजियादार सैय्यद अली अंसर के सहन से शुरू हुए इस जुलूस में कर्बला के मासूम शहीद को याद कर अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं और पूरा माहौल गमगीन हो गया।
झूले के जुलूस में अंजुमन के सदस्यों ने पुरदर्द नौहाख्वानी और सीनाजनी (मातम) कर कर्बला के शहीदों को नजराना-ए-अकीदत पेश किया।
जुलूस के बाद आयोजित मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना मुहर्रम अली ने कर्बला के ऐतिहासिक और हृदयविदारक वाकये पर रोशनी डाली। मौलाना ने बताया कि कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन के छह महीने के मासूम बेटे अली असगर तीन दिनों से प्यासे थे।
प्यास से तड़पते बच्चे को अपने हाथों पर लेकर इमाम हुसैन यजीदी फौज के सामने पानी की गुहार लगाने पहुंचे थे। लेकिन बेरहम यजीदी फौज के हरमला ने पानी देने के बजाय एक तीर से मासूम का गला छेद दिया और बच्चा पिता की गोद में ही शहीद हो गया।
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उन्होंने कहा कि उसी अजीम शहादत की याद में हर साल हजरत अली असगर का गहवारा (झूला) निकाला जाता है। जुलूस ताजियादार सैय्यद अली अंसर के सहन से निकला। शिया मस्जिद होते हुए अपने पारंपरिक मार्गों से गुजरकर स्थानीय इमामबाड़े में पहुंचा, जहां यह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के बीच बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
जुलूस और मजलिस में मुख्य रूप से ताजियादार व मुतवल्ली आसिफ रिजवी, हमजा रिजवी, मंसूर, शुजात अली, आजम, अयान आदि मौजूद रहे।
ताजियादार सैय्यद अली अंसर के सहन से शुरू हुए इस जुलूस में कर्बला के मासूम शहीद को याद कर अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं और पूरा माहौल गमगीन हो गया।
झूले के जुलूस में अंजुमन के सदस्यों ने पुरदर्द नौहाख्वानी और सीनाजनी (मातम) कर कर्बला के शहीदों को नजराना-ए-अकीदत पेश किया।
जुलूस के बाद आयोजित मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना मुहर्रम अली ने कर्बला के ऐतिहासिक और हृदयविदारक वाकये पर रोशनी डाली। मौलाना ने बताया कि कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन के छह महीने के मासूम बेटे अली असगर तीन दिनों से प्यासे थे।
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प्यास से तड़पते बच्चे को अपने हाथों पर लेकर इमाम हुसैन यजीदी फौज के सामने पानी की गुहार लगाने पहुंचे थे। लेकिन बेरहम यजीदी फौज के हरमला ने पानी देने के बजाय एक तीर से मासूम का गला छेद दिया और बच्चा पिता की गोद में ही शहीद हो गया।
उन्होंने कहा कि उसी अजीम शहादत की याद में हर साल हजरत अली असगर का गहवारा (झूला) निकाला जाता है। जुलूस ताजियादार सैय्यद अली अंसर के सहन से निकला। शिया मस्जिद होते हुए अपने पारंपरिक मार्गों से गुजरकर स्थानीय इमामबाड़े में पहुंचा, जहां यह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के बीच बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
जुलूस और मजलिस में मुख्य रूप से ताजियादार व मुतवल्ली आसिफ रिजवी, हमजा रिजवी, मंसूर, शुजात अली, आजम, अयान आदि मौजूद रहे।