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Mau News: बूंदाबांदी से धुले किसानों के अरमान, थम गए थ्रेसर और कंबाइन के पहिए
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बुधवार की सुबह हुई बारिश से भींगी कटी गेंहू की फसल।संवाद
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मार्च और अप्रैल माह में मौसम खराब रहने के बीच मंगलवार की देर रात और बुधवार को हुई बूंदाबांदी से किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया है। अब किसानों को फसल घर लाने के लिए दो से तीन दिन का इंतजार करना पड़ेगा।
मौसम को देखते हुए किसान फसलों को समेटने में जुटे थे, लेकिन बूंदाबांदी से थ्रेसर और कंबाइन के पहिए थम गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी दो से तीन दिनों तक मौसम खराब रहने की संभावना है।
मंगलवार को जिले का अधिकतम तापमान 36 डिग्री और न्यूनतम 23 डिग्री था, जबकि बुधवार को अधिकतम तापमान घटकर 29 डिग्री और न्यूनतम 18 डिग्री दर्ज किया गया।
जनपद में करीब 92,000 हेक्टेयर में गेहूं की बुआई की गई है, जिसमें अभी करीब 50 फीसदी कटाई हुई है। लगातार मौसम खराब रहने से किसान फसल बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
बीते रविवार से मौसम खराब होने के बाद किसान दिन-रात कहीं थ्रेसर तो कहीं कंबाइन से कटाई और मड़ाई में जुटे थे। अब किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं कि मौसम साफ हो जाए।
किसानों का कहना है कि गेहूं की कटाई के दौरान मौसम हर पल दगा दे रहा है। धान की कटाई के समय भी अक्टूबर माह में असमय बारिश से फसल खराब हो गई थी। खेत में पानी भरने से गेहूं की बुआई भी देर से हुई थी।
तेज हवा से आम के बौर को भी नुकसान
तेज हवा और आंधी से आम के बौर को भी नुकसान हो रहा है। कुछ पेड़ों पर बौर लगे हैं, जबकि कुछ पर बौर टिकौरा का रूप ले चुका है। मौसम की मार से इसके खराब होकर रोगग्रस्त होने की संभावना है। वैज्ञानिक पंकज कुमार का कहना है कि बारिश से बौर में फफूंद लग सकती है, जिसका असर आम के उत्पादन पर पड़ सकता है।
पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से आगामी दो से तीन दिनों तक मौसम खराब रहने की संभावना है। किसानों को सतर्क होकर कटाई और मड़ाई करनी चाहिए। यदि गेहूं भीग जाए, तो उसे धूप में सुखाने के बाद ही भंडारण करें। -डॉ. विनय कुमार सिंह, कृषि वैज्ञानिक व प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी
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मौसम को देखते हुए किसान फसलों को समेटने में जुटे थे, लेकिन बूंदाबांदी से थ्रेसर और कंबाइन के पहिए थम गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी दो से तीन दिनों तक मौसम खराब रहने की संभावना है।
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मंगलवार को जिले का अधिकतम तापमान 36 डिग्री और न्यूनतम 23 डिग्री था, जबकि बुधवार को अधिकतम तापमान घटकर 29 डिग्री और न्यूनतम 18 डिग्री दर्ज किया गया।
जनपद में करीब 92,000 हेक्टेयर में गेहूं की बुआई की गई है, जिसमें अभी करीब 50 फीसदी कटाई हुई है। लगातार मौसम खराब रहने से किसान फसल बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
बीते रविवार से मौसम खराब होने के बाद किसान दिन-रात कहीं थ्रेसर तो कहीं कंबाइन से कटाई और मड़ाई में जुटे थे। अब किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं कि मौसम साफ हो जाए।
किसानों का कहना है कि गेहूं की कटाई के दौरान मौसम हर पल दगा दे रहा है। धान की कटाई के समय भी अक्टूबर माह में असमय बारिश से फसल खराब हो गई थी। खेत में पानी भरने से गेहूं की बुआई भी देर से हुई थी।
तेज हवा से आम के बौर को भी नुकसान
तेज हवा और आंधी से आम के बौर को भी नुकसान हो रहा है। कुछ पेड़ों पर बौर लगे हैं, जबकि कुछ पर बौर टिकौरा का रूप ले चुका है। मौसम की मार से इसके खराब होकर रोगग्रस्त होने की संभावना है। वैज्ञानिक पंकज कुमार का कहना है कि बारिश से बौर में फफूंद लग सकती है, जिसका असर आम के उत्पादन पर पड़ सकता है।
पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से आगामी दो से तीन दिनों तक मौसम खराब रहने की संभावना है। किसानों को सतर्क होकर कटाई और मड़ाई करनी चाहिए। यदि गेहूं भीग जाए, तो उसे धूप में सुखाने के बाद ही भंडारण करें। -डॉ. विनय कुमार सिंह, कृषि वैज्ञानिक व प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी