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Mau News: कागजों में चल रही मत्स्य आहार मिल, 18 लाख के अनुदान में गड़बड़ी का आरोप
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रानीपुर ब्लॉक क्षेत्र के सरौदा गांव में लघु मत्स्य आहार मिल के नाम पर सरकारी अनुदान में गड़बड़ी का आरोप सामने आया है। आरोप है कि गांव निवासी एक महिला ने 30 लाख रुपये की परियोजना स्वीकृत कराकर 18 लाख रुपये का सरकारी अनुदान प्राप्त किया, लेकिन मौके पर मिल की मशीनरी और यूनिट स्थापित नहीं की गई। स्थानीय लोगों की शिकायत पर मत्स्य विभाग की ओर से तैयार रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए गए हैं।
समाजसेवी भगत सिंह ने 14 अगस्त को जिलाधिकारी को प्रार्थनापत्र देकर मामले की दोबारा जांच और कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि अनुदान लेने के बाद भी मिल के संचालन के लिए आवश्यक मशीनरी और यूनिट स्थापित नहीं की गई। इसके अलावा विद्युत विभाग से वैध कनेक्शन नहीं लिया गया है और न ही डीजल या पेट्रोल इंजन उपलब्ध है। प्रार्थनापत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि मत्स्य आहार की बिक्री के लिए अधिकृत फर्म, जीएसटी पंजीकरण और खरीद-बिक्री से संबंधित वास्तविक अभिलेख भी उपलब्ध नहीं हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी कर अनुदान प्राप्त किया गया। भगत सिंह के अनुसार, मामले की शिकायत मत्स्य विभाग में किए जाने के बाद विभाग ने विस्तृत जांच के बजाय रिपोर्ट में केवल लाभार्थी को आहार मिल संचालित करने के निर्देश दिए जाने का उल्लेख किया। इससे जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने जिलाधिकारी से जांच समिति गठित कर स्थलीय सत्यापन कराने की मांग की है। साथ ही परियोजना की कुल लागत, प्राप्त अनुदान, मशीनरी की उपलब्धता, विद्युत कनेक्शन तथा उत्पादन और बिक्री से संबंधित अभिलेखों की जांच कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने दोषी पाए जाने पर लाभार्थी और संबंधित विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा 18 लाख रुपये के अनुदान की वसूली की मांग की है।
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मशीन मिली, लेकिन चलती हुई नहीं
ग्रामीणों ने इसी मामले की शिकायत आईजीआरएस पर भी की थी। शिकायत के निस्तारण के लिए 10 अगस्त को मुहम्मदाबाद गोहना तहसील के मत्स्य विभाग के प्रभारी ने स्थलीय जांच की। जांच रिपोर्ट के अनुसार, लाभार्थी के घर मशीनरी मिली, लेकिन वह संचालित नहीं थी। मौके पर लाभार्थी का बेटा मौजूद था, जिसे मशीनरी तत्काल चालू कराने के निर्देश दिए गए।
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समाजसेवी भगत सिंह ने 14 अगस्त को जिलाधिकारी को प्रार्थनापत्र देकर मामले की दोबारा जांच और कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि अनुदान लेने के बाद भी मिल के संचालन के लिए आवश्यक मशीनरी और यूनिट स्थापित नहीं की गई। इसके अलावा विद्युत विभाग से वैध कनेक्शन नहीं लिया गया है और न ही डीजल या पेट्रोल इंजन उपलब्ध है। प्रार्थनापत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि मत्स्य आहार की बिक्री के लिए अधिकृत फर्म, जीएसटी पंजीकरण और खरीद-बिक्री से संबंधित वास्तविक अभिलेख भी उपलब्ध नहीं हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी कर अनुदान प्राप्त किया गया। भगत सिंह के अनुसार, मामले की शिकायत मत्स्य विभाग में किए जाने के बाद विभाग ने विस्तृत जांच के बजाय रिपोर्ट में केवल लाभार्थी को आहार मिल संचालित करने के निर्देश दिए जाने का उल्लेख किया। इससे जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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उन्होंने जिलाधिकारी से जांच समिति गठित कर स्थलीय सत्यापन कराने की मांग की है। साथ ही परियोजना की कुल लागत, प्राप्त अनुदान, मशीनरी की उपलब्धता, विद्युत कनेक्शन तथा उत्पादन और बिक्री से संबंधित अभिलेखों की जांच कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने दोषी पाए जाने पर लाभार्थी और संबंधित विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा 18 लाख रुपये के अनुदान की वसूली की मांग की है।
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मशीन मिली, लेकिन चलती हुई नहीं
ग्रामीणों ने इसी मामले की शिकायत आईजीआरएस पर भी की थी। शिकायत के निस्तारण के लिए 10 अगस्त को मुहम्मदाबाद गोहना तहसील के मत्स्य विभाग के प्रभारी ने स्थलीय जांच की। जांच रिपोर्ट के अनुसार, लाभार्थी के घर मशीनरी मिली, लेकिन वह संचालित नहीं थी। मौके पर लाभार्थी का बेटा मौजूद था, जिसे मशीनरी तत्काल चालू कराने के निर्देश दिए गए।