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Mau News: हाई बीपी, शुगर से 18 से 35 साल तक के युवाओं की किडनी हो रही फेल, 46 दिन में पहुंचे 45 मरीज

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 18 Feb 2026 12:31 AM IST
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High blood pressure and diabetes are causing kidney failure in young people aged 18 to 35, with 45 patients arriving in 46 days.
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युवाओं में हाई बीपी, शुगर बढ़ने से किडनी फेल होने की समस्या ज्यादा बढ़ गई है। बिगड़ते खानपान की वजह से समस्या लगातार बढ़ रही है। 18 साल से 35 की उम्र के युवा किडनी फेलियर की समस्या से जूझ रहे हैं।
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जिला अस्पताल में प्रतिदिन 24 मरीजों की डायलिसिस हो रही है, इनमें 10 मरीज 18 से 35 साल तक के युवा हैं। यही स्थिति मेडिकल कॉलेज में है, यहां 35 फीसदी मरीजों की उम्र 16 से 30 वर्ष के बीच की है।
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बीते 46 दिन में ही सरकारी दोनों अस्पतालों के अलावा तीन बड़े निजी अस्पतालों के डायलिसिस यूनिट में 46 युवा मरीज पहुंचे हैं जिनकी डायलिसिस शुरू हुई है।

इसके पीछे डॉक्टर बिगड़ते खानपान और कम पानी पीने को मुख्य कारण बता रहे हैं। एक निजी अस्पताल के किडनी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर दुर्गेश पुष्कर ने बताया कि किडनी फेलियर मरीजों में युवाओं की संख्या भी हर साल बढ़ रही है।
युवाओं की बदली दिनचर्या और खानपान के साथ इलाज में लापरवाही उन्हें इस गंभीर बीमारियों का शिकार बना रही है। बताया कि किडनी खराब होने से एरिथ्रोपोइटिन हार्मोन बनना कम हो जाता है, जिससे हीमोग्लोबिन नहीं बन पाता है।
जिसकी वजह से किडनी फेल होने की संभावना बढ़ती है। एल्डोस्टेरोन हार्मोन को हमारी किडनी नियंत्रित करती है, अगर किडनी खराब होनी शुरू हो जाएगी तो एल्डोस्टेरोन हार्मोन अनियंत्रित हो जाता है। जिसकी वजह से व्यक्ति का ब्लडप्रेशर बढ़ने लगता है।
जिसके चलते किडनी फेल हो रही है। जिला अस्पताल में संचालित डायलिसिस यूनिट में रोजाना 24 मरीजों की डायलिसिस हो रही है, इनमें रोजाना करीब 10 मरीज 35 साल तक के आ रहे हैं।
इसी तरह से कल्पनाथ राय मेडिकल कॉलेज में इस समय हर दिन 12 से अधिक युवाओं की डायलिसिस हो रही है। बीते 46 दिन यानी जनवरी से सोमवार तक आंकड़ा देखें तो जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और तीन बड़े निजी अस्पताल के डायलिसिस यूनिट में 45 नए मरीज जिनकी उम्र 16 से 35 वर्ष के भीतर हैं वह डायलिसिस कराना शुरू किया गया है। इसमें जिला अस्पताल में 11 तो मेडिकल कॉलेज में 16 मरीज हैं।

लगातार पेनकिलर खाना है खतरनाक
कल्पानाथ राय मेडिकल कॉलेज के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. रिषभ जायसवाल ने बताया कि बिना डॉक्टर की सलाह के लगातार पेनकिलर (दर्द निवारक दवाएं) खाना किडनी फेलियर का एक प्रमुख कारण बनता जा रहा है। यह दवाएं गुर्दों में रक्त का प्रवाह कम कर देती हैं, जिससे समय के साथ वे सुकड़ सकती हैं, पुरानी किडनी की बीमारी हो सकती है, या गंभीर मामलों में अचानक किडनी फेल हो सकती है। बताया कि दर्द निवारक दवाओं के लंबे समय तक उपयोग से किडनी के आंतरिक ऊतक नष्ट हो जाते हैं। ये दवाएं प्रोस्टाग्लैंडिंस के उत्पादन में हस्तक्षेप करती हैं, जो किडनी के रक्त वाहिकाओं को चौड़ा रखने में मदद करते हैं।

केस एक : नगर के सहादतपुरा निवासी युवक जिसकी उम्र महज 21 साल है, उसने बताया कि उसकी चार साल पहले किडनी फेल हो गई। उसे सुबह के समय उल्टी आती थी। पहले तो उसने नजरअंदाज किया। मगर बाद में पता चला कि उसकी किडनी फेल हो गई। चार साल से वह डायलिसिस पर है। सप्ताह में दो दिन डायलिसिस करानी पड़ती है। उसने बताया कि अक्सर सिर दर्द, बदन दर्द हो या किसी तरह के दर्द पर बिना चिकित्सक के सलाह के वह पेनकिलर का सेवन कर लेता था।
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केस दो : रानीपुर थाना क्षेत्र से सप्ताह के सोमवार और बुधवार को जिला अस्पताल में डायलिसिस करानी वाल 19 साल की युवती ने बताया कि 2024 में उसकी किडनी फेल हुई है। उसे पहले कोई दिक्कत नहीं थी। बाद में समस्या बढ़ने पर जांच कराई तो किडनी में दिक्कत आई। जिसके बाद किडनी फेल हो गई।वह एक साल से वह डायलिसिस करा रहा है।

केस तीन : कल्पनाथ राय मेडिकल कॉलेज में डायलिसिस कराने वाले 23 साल के युवक कई दिनों से उसकी सांस फूलने और यूरीन पास न होने की समस्या थी। छह माह पहले जांच कराने पर उसकी किडनी फेल होना मिली, बताया कि जांच में हाई बीपी होना मिला। जिसके चलते अब वह सप्ताह में दो दिन डायलिसिस कराने को मजबूर है।

केस चार: निजी अस्पताल के डायलिसिस यूनिट में डायलिसिस कराने वाले 29 साल के युवक ने बताया कि वह चाट का ठेला लगाता है। चार वर्ष पहले शुगर, बीपी के चलते उसकी किडनी फेल होने से वह डायलिसिस पर है। बीपी, शुगर के इलाज में लापरवाही से हर माह की 80 फीसदी कमाई उसके डायलिसिस में खर्च होती हैं।

किडनी खराब होने के लक्षण

- जल्दी थकावट महसूस करना

- बार-बार पेशाब आना

- पेशाब झागदार होना

- पैर पर सूजन आना

- आंखों के नीचे सूजन आना

- भूख में कमी आना

- उल्टी आना

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किडनी खराब होने से बचाव

- नियमित व्यायाम करें

- नमक का प्रयोग कम करें

- दर्द निवारक गोलियों का ज्यादा सेवन न करें

- शुगर को नियंत्रित रखें

- चिकित्सक से परामर्श लेकर दवाई लें
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