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Mau News: रेलवे स्टेशन पर स्टैंड नहीं, शाम से शुरू हो जाती है वसूली
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मऊ जंक्शन पर बाइक पार्किंग स्टैंड के अंदर खड़ी बाइक
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- 10 दिसंबर को पार्किंग स्टैंड बंद कर भाग गया ठेकेदार, इसके बाद भी रोज रात को खड़ी रहती हैं 30 से अधिक बाइक
संवाद न्यूज एजेंसी
मऊ। मऊ जंक्शन के वाहन स्टैंड का ठेका समाप्त हो गया है, इसके बाद भी शाम होते ही बाइक पार्किंग के नाम पर वसूली शुरू हो जाती है। अमर उजाला की टीम ने इसकी पड़ताल की तो वसूली की सच्चाई सामने आई। पार्किंग स्टैंड के बाहर बंदी का बोर्ड लगा था और अंदर करीब 34 बाइकें खड़ी थीं। वहां पर बाकायदा कर्मचारी के सोने के लिए बिस्तर भी था।
यात्री बनकर रिपोर्टर बाइक खड़ी करने पहुंचा तो वहां पर मौजूद व्यक्ति ने रातभर की पार्किंग के लिए 50 रुपये मांगे। हेलमेट जमा करने के लिए अलग से 20 रुपये की मांग की। रिपोर्टर ने बाइक जमा कर रहे व्यक्ति से बात की तो उसने बताया कि तीन बाइकें ऐसी हैं, जो पार्किंग चलने के दौरान ही जमा की गई थीं, लेकिन इन्हें लेने कोई नहीं आया, वो इन्हीं बाइकों की रखवाली कर रहा है। लेकिन अंदर लगी बाइकों की कतार कुछ और ही सच्चाई बयां कर रही थी। मऊ जंक्शन के जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी से अवैध पार्किंग के नाम पर वसूली चल रही है।
मऊ जंक्शन से हर दिन 44 जोड़ी ट्रेनों का आवागमन होता है। यहां से लगभग से 22 हजार से अधिक यात्री आवागमन करते हैं। बड़ी संख्या में लोग बाइक से रेलवे स्टेशन पहुंचते हैं। स्टेशन पर ऐसे अनेक यात्री व व्यवसायी हैं जो काम के सिलसिले में पार्किंग में बाइक खड़ी करके ट्रेन से वाराणसी या अन्य शहरों में जाते हैं। वापस लौट कर बाइक से चले जाते हैं। घोसी से ट्रेन पकड़ने आए आशुतोष गुप्ता और रतनपुरा से आए राजकिशोर ने बताया कि उन्हें वाराणसी जाना है और सुबह लौटना है। पार्किंग स्टैंड में बाइक की रखवाली के लिए 50 रुपये लिए गए हैं। इसी तरह हथिनी से आए विकास कुमार ने बताया कि उन्हें लखनऊ जाना है, बाइक स्टैंड बंद होने की सूचना लगी है, लेकिन अंदर खड़ी करके रखवाली के लिए सामान्य दिनों से अधिक शुल्क लिया गया। इस दौरान बाहर मऊ कोतवाली की गाड़ी खड़ी थी और पुलिसकर्मी बाहर खड़ी बाइकों की जांच कर रहे थे।
रेलवे की ओर से निर्धारित टेंडर से कम वसूली होने के कारण ठेकेदार ने 10 दिसंबर 2025 को टेंडर सरेंडर करके स्टैंड बंद कर दिया था। तीन साल पूरा होने पर 23 अप्रैल 2025 को बाइक पार्किंग स्टैंड का टेंडर समाप्त हो गया। 13 जुलाई 2025 को खुले टेंडर में रेलवे ने एक दिन का 9500 रुपये शुल्क तय किया। एक महीने के लिए 2 लाख 85 हजार रुपये देने पड़ते। अगस्त 2025 से पार्किंग शुरू हुई। टेंडर के शर्त के मुताबिक अगले तीन महीने तक का पैसा रेलवे को जमा करना पड़ता है। बाइक खड़ा करने के लिए शून्य से छह घंटे का 10 रुपये, 12 घंटे का 15 रुपये और 24 घंटे का 20 रुपये शुल्क निर्धारित था। घाटा होने के कारण ठेकेदार ने 10 दिसंबर 2025 को पार्किंग बंद कर दी। रेलवे को बिना सूचना दिए ही चला गया।
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कोट -
29 दिसंबर 2025 को टेंडर खुला था, इसके बोली लगाई गई है। इसी सप्ताह में पार्किंग स्टैंड शुरू होगा। पार्किंग बंद होने के बाद भी रखवाली के नाम पर वसूली की शिकायत नहीं मिली है। इसकी जांच कराई जाएगी।
- अशोक कुमार
- जनसंपर्क अधिकारी, वाराणसी
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संवाद न्यूज एजेंसी
मऊ। मऊ जंक्शन के वाहन स्टैंड का ठेका समाप्त हो गया है, इसके बाद भी शाम होते ही बाइक पार्किंग के नाम पर वसूली शुरू हो जाती है। अमर उजाला की टीम ने इसकी पड़ताल की तो वसूली की सच्चाई सामने आई। पार्किंग स्टैंड के बाहर बंदी का बोर्ड लगा था और अंदर करीब 34 बाइकें खड़ी थीं। वहां पर बाकायदा कर्मचारी के सोने के लिए बिस्तर भी था।
यात्री बनकर रिपोर्टर बाइक खड़ी करने पहुंचा तो वहां पर मौजूद व्यक्ति ने रातभर की पार्किंग के लिए 50 रुपये मांगे। हेलमेट जमा करने के लिए अलग से 20 रुपये की मांग की। रिपोर्टर ने बाइक जमा कर रहे व्यक्ति से बात की तो उसने बताया कि तीन बाइकें ऐसी हैं, जो पार्किंग चलने के दौरान ही जमा की गई थीं, लेकिन इन्हें लेने कोई नहीं आया, वो इन्हीं बाइकों की रखवाली कर रहा है। लेकिन अंदर लगी बाइकों की कतार कुछ और ही सच्चाई बयां कर रही थी। मऊ जंक्शन के जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी से अवैध पार्किंग के नाम पर वसूली चल रही है।
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मऊ जंक्शन से हर दिन 44 जोड़ी ट्रेनों का आवागमन होता है। यहां से लगभग से 22 हजार से अधिक यात्री आवागमन करते हैं। बड़ी संख्या में लोग बाइक से रेलवे स्टेशन पहुंचते हैं। स्टेशन पर ऐसे अनेक यात्री व व्यवसायी हैं जो काम के सिलसिले में पार्किंग में बाइक खड़ी करके ट्रेन से वाराणसी या अन्य शहरों में जाते हैं। वापस लौट कर बाइक से चले जाते हैं। घोसी से ट्रेन पकड़ने आए आशुतोष गुप्ता और रतनपुरा से आए राजकिशोर ने बताया कि उन्हें वाराणसी जाना है और सुबह लौटना है। पार्किंग स्टैंड में बाइक की रखवाली के लिए 50 रुपये लिए गए हैं। इसी तरह हथिनी से आए विकास कुमार ने बताया कि उन्हें लखनऊ जाना है, बाइक स्टैंड बंद होने की सूचना लगी है, लेकिन अंदर खड़ी करके रखवाली के लिए सामान्य दिनों से अधिक शुल्क लिया गया। इस दौरान बाहर मऊ कोतवाली की गाड़ी खड़ी थी और पुलिसकर्मी बाहर खड़ी बाइकों की जांच कर रहे थे।
रेलवे की ओर से निर्धारित टेंडर से कम वसूली होने के कारण ठेकेदार ने 10 दिसंबर 2025 को टेंडर सरेंडर करके स्टैंड बंद कर दिया था। तीन साल पूरा होने पर 23 अप्रैल 2025 को बाइक पार्किंग स्टैंड का टेंडर समाप्त हो गया। 13 जुलाई 2025 को खुले टेंडर में रेलवे ने एक दिन का 9500 रुपये शुल्क तय किया। एक महीने के लिए 2 लाख 85 हजार रुपये देने पड़ते। अगस्त 2025 से पार्किंग शुरू हुई। टेंडर के शर्त के मुताबिक अगले तीन महीने तक का पैसा रेलवे को जमा करना पड़ता है। बाइक खड़ा करने के लिए शून्य से छह घंटे का 10 रुपये, 12 घंटे का 15 रुपये और 24 घंटे का 20 रुपये शुल्क निर्धारित था। घाटा होने के कारण ठेकेदार ने 10 दिसंबर 2025 को पार्किंग बंद कर दी। रेलवे को बिना सूचना दिए ही चला गया।
कोट -
29 दिसंबर 2025 को टेंडर खुला था, इसके बोली लगाई गई है। इसी सप्ताह में पार्किंग स्टैंड शुरू होगा। पार्किंग बंद होने के बाद भी रखवाली के नाम पर वसूली की शिकायत नहीं मिली है। इसकी जांच कराई जाएगी।
- अशोक कुमार
- जनसंपर्क अधिकारी, वाराणसी