ग्रहों के राजा सूर्य 15 जनवरी को धनु से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। अब वर्ष 2080 तक मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाएगी। इसके बाद फिर ज्योतिषीय गणना के अनुसार मकर संक्रांति की तिथि एक दिन आगे बढ़ जाएगी। यानी सूर्य का राशि परिवर्तन हर वर्ष 16 जनवरी को होगा। इस बार सूर्य का राशि परिवर्तन रात्रि 9.38 बजे हो रहा है। इसके साथ ही खरमास समाप्त होगा और मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।
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Makar Sankranti: अब 55 साल तक 15 जनवरी को ही मनेगी मकर संक्रांति, राशि के अनुसार करें दान; इससे करें परहेज
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Tue, 13 Jan 2026 11:18 AM IST
सार
Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति इस बार 15 जनवरी को मनेगी। ग्रहों के राजा सूर्य 15 जनवरी को धनु से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। मकर संक्रांति के दिन साधारण नदी भी गंगा के समान पुण्यदायिनी हो जाती है।
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मकर संक्रांति 15 जनवरी 2026
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Makar Sankranti
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इस बार वृद्धि योग, शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि और ज्येष्ठा नक्षत्र में गुरुवार (15 जनवरी) को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण की अवधि को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात कहा जाता है। ज्योतिषविद् आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन साधारण नदी भी गंगा के समान पुण्यदायिनी हो जाती है।
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Makar Sankranti
- फोटो : Adobe stock
72 साल में बदलती है तारीख
ज्योतिषविदों के अनुसार हर वर्ष सूर्य के राशि परिवर्तन में लगभग 20 मिनट का विलंब होता है। इस प्रकार तीन वर्षों में यह अंतर एक घंटे का हो जाता है। 72 वर्षों में 24 घंटे का फर्क आ जाता है। सूर्य और चंद्रमा ग्रह मार्गीय होते हैं, ये पीछे नहीं चलते। इसलिए तिथि में एक दिन की वृद्धि हो जाती है। इस लिहाज से वर्ष 2008 में ही 72 वर्ष पूरे हो गए थे। हालांकि छह वर्षों तक सूर्य का राशि परिवर्तन प्रातःकाल में होने से पूर्व काल मानते हुए मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाती रही। इससे पहले सूर्य का राशि परिवर्तन संध्याकाल में होता था। वर्ष 1936 से मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जा रही थी। वहीं 1864 से 1936 तक 13 जनवरी और 1792 से 1864 तक 12 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाती थी।
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ज्योतिषविदों के अनुसार हर वर्ष सूर्य के राशि परिवर्तन में लगभग 20 मिनट का विलंब होता है। इस प्रकार तीन वर्षों में यह अंतर एक घंटे का हो जाता है। 72 वर्षों में 24 घंटे का फर्क आ जाता है। सूर्य और चंद्रमा ग्रह मार्गीय होते हैं, ये पीछे नहीं चलते। इसलिए तिथि में एक दिन की वृद्धि हो जाती है। इस लिहाज से वर्ष 2008 में ही 72 वर्ष पूरे हो गए थे। हालांकि छह वर्षों तक सूर्य का राशि परिवर्तन प्रातःकाल में होने से पूर्व काल मानते हुए मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाती रही। इससे पहले सूर्य का राशि परिवर्तन संध्याकाल में होता था। वर्ष 1936 से मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जा रही थी। वहीं 1864 से 1936 तक 13 जनवरी और 1792 से 1864 तक 12 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाती थी।
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तुलसी का पौधा।
- फोटो : अमर उजाला।
इससे करें परहेज
मकर संक्रांति के दिन नशे से दूर रहें। तामसिक भोजन से परहेज करें। किसी का अपमान न करें। पेड़ों की कटाई न करें और तुलसी की पत्तियां न तोड़ें।
मकर संक्रांति के दिन नशे से दूर रहें। तामसिक भोजन से परहेज करें। किसी का अपमान न करें। पेड़ों की कटाई न करें और तुलसी की पत्तियां न तोड़ें।
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Makar Sankranti Daan 2026
- फोटो : अमर उजाला
राशि के अनुसार करें दान
- मेष - लाल मिर्च, लाल वस्त्र और मसूर दाल।
- वृषभ - सफेद तिल के लड्डू, चावल और चीनी।
- मिथुन - हरी सब्जियां, मौसमी फल और साबुत मूंग।
- कर्क - जरूरतमंदों को सफेद वस्त्र और घी।
- सिंह - गुड़, चिक्की, शहद और मूंगफली।
- कन्या - मूंग दाल की खिचड़ी बनाकर जरूरतमंदों को खिलाएं।
- तुला - सफेद वस्त्र, मखाना, चावल और चीनी।
- वृश्चिक - मूंगफली, गुड़ और लाल रंग के गर्म कपड़े।
- धनु - पीले वस्त्र, केले, बेसन और चने की दाल।
- मकर - काले तिल के लड्डू और कंबल।
- कुंभ - ऊनी कपड़े, सरसों तेल और जूते-चप्पल।
- मीन - पीली सरसों, चने की दाल और मौसमी फल।