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Womens Day: पुरुषों की तुलना में 4 गुना ज्यादा काम फिर भी महिलाओं को सिद्ध करनी पड़ती है काबिलियत
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Aman Vishwakarma
Updated Sun, 08 Mar 2026 10:30 AM IST
सार
Varanasi News: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अमर उजाला की ओर से आयोजित संवाद में महिलाओं ने अपनी राय रखी। कई सवालों के जवाब दिए तो कई गंभीर सवाल भी उठाएं। उन्होंने कहा कि समाज में आज भी जो बराबरी का दर्जा नहीं है, वह तभी मिलेगा जब साक्षरता बढ़ेगी।
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संवाद कार्यक्रम में माैजूद महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
Women's Day: महिलाओं को सशक्त करने से ज्यादा जरूरी समाज को शिक्षित करना है। समाज में अभी भी महिलाओं को पूरी तरह से बराबरी का दर्जा नहीं मिला है। विकसित भारत का मतलब विकसित नारी से है। इसके लिए समाज में जागरूकता जरूरी है। साथ ही हम महिलाएं पुरुषों की तुलना में 4 गुना अधिक काम कर सकती हैं। फिर भी हमें अपनी काबिलियत सिद्ध करनी पड़ती है। यह बातें शनिवार को अमर उजाला चांदपुर कार्यालय में आयोजित संवाद में महिलाओं ने कहीं।
अलग-अलग क्षेत्रों से उच्च पदों पर तैनात महिलाओं ने रोजमर्रा के जीवन में उनके सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में बताया। साथ ही उन समस्याओं से कैसे निकलना है, इसके बारे में भी चर्चा की। महिलाओं ने कहा कि हमारे अंदर के मनोबल को बढ़ाने की जरूरत है।
हमारे अंदर प्राकृतिक रूप से जो शक्तियां ईश्वर ने दे रखी हैं, उसे समझना पड़ेगा। जब हम खुद को मजबूत मानेंगे तो सामने आने वाली सभी चुनौतियों का सामना कर सकेंगे। पुरुषों की तुलना में महिलाएं चार गुना ज्यादा सक्षम हैं किसी भी काम को करने में। महिलाओं ने कहा कि समाज में आज भी जो बराबरी का दर्जा नहीं है, वह तभी मिलेगा जब साक्षरता बढ़ेगी। समाज में शिक्षित होने से ज्यादा महिलाओं को समझना जरूरी है।
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मानसी दहिया।
- फोटो : अमर उजाला
महिला सशक्तीकरण की सिर्फ चर्चा है। हमेशा हम बाहरी पहलुओं को देखते हैं। हमारी क्षमता और प्रतिभा को हम जब तक खुद नहीं समझेंगे, तब तक सशक्त नहीं होंगे। समाज में अगर महिला काम कर रही है तो परिवार संभालने के लिए हमेशा उसे ही काम छोड़ने का दबाव दिया जाता है। इस सोच में बदलाव चाहिए।
पिछड़े इलाके की लड़कियां इंजीनियरिंग या डॉक्टर की पढ़ाई नहीं कर पा रही हैं, क्योंकि समाज में उनके लिए जगह नहीं बन पा रही है। हम महिलाएं पुरुषों की तुलना में 4 फीसदी अधिक काम कर सकती हैं। फिर भी हमें अपनी काबिलियत सिद्ध करनी पड़ती है। महिलाओं का इमोशनल टूल बहुत अच्छा होता है। इसका सही इस्तेमाल होना चाहिए। - मानसी दहिया, आईपीएस
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प्रो. मनीषा मेहरोत्रा।
- फोटो : अमर उजाला
समाज में अगर किसी के साथ भी कुछ गलत हो रहा है तो वह हमारी जिम्मेदारी है। समाज में 80 फीसदी लोग सामान्य शिक्षित या अशिक्षित हैं। 20 फीसदी विशेष वर्ग के लोग हैं। सबसे अधिक समस्या इसी वर्ग में है। इस वर्ग को समस्या उत्पन्न करना आता है। आज हमारा समाज जिस तरह से संस्कारविहीन होता दिख रहा है, यह आने वाले 10 वर्षों में पैंडेमिक होगा। - प्रो. मनीषा मेहरोत्रा, बीएचयू
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आरती शर्मा।
- फोटो : अमर उजाला
महिलाओं की आधारभूत समस्याओं का समाधान होना चाहिए। कुछ बच्चियों को तो शिक्षा मिल पा रही है, संसाधन भी मिल रहे हैं, लेकिन जो सड़क पर गुजारा करती हैं, उनके लिए भी व्यवस्था होनी चाहिए। छोटी समस्याओं पर काम होगा तभी हम समाज में सुधार कर पाएंगे। - आरती शर्मा, सनबीम भगवानपुर
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सविता यादव।
- फोटो : अमर उजाला
कोई भी महिला या पुरुष जब किसी भी पद पर होता है, उसमें परिवार का योगदान होता है। हमारी जिम्मेदारी है कि हम जिस पद पर हैं उसका पूरी निष्ठा से निर्वहन करें। महिलाओं में एक-दूसरे के प्रति जलन की भावना होती है। हमें बदलाव अपने घर से ही करना होगा। बच्चों को भी सही परवरिश देनी होगी, जिससे वे आगे चलकर चीजों को समझ सकें। - सविता यादव, अपर नगर आयुक्त
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