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Mau News: गैर इरादतन हत्या में सगे भाइयों सहित तीन को दस-दस साल का कारावास
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जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय कुमार यादव ने गैर इरादतन हत्या के मामले में सगे भाइयों सहित तीन को सुनवाई के बाद दोषी पाया। तीनों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
मामला कोपागंज थाना क्षेत्र के कोटवा कोपड़ा गांव का है। अभियोजन के अनुसार, कोटवा कोपड़ा गांव निवासी ब्रम्हानंद पुत्र सहवल राम की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज हुई। इसमें कोटवा कोपड़ा गांव निवासी अनिल व अनुज पुत्रगण विजेंदर तथा चंद्रशेखर पुत्र अर्जुन को नामजद किया गया।
वादी का कथन था कि 14 अप्रैल 2014 की रात 7:45 बजे आरोपीगण ने बल्ब व तार तोड़ने के विवाद को लेकर उसके भतीजे गौतम पुत्र रामविलास को मारपीट कर गंभीर चोटें पहुंचाईं। इलाज के दौरान गौतम की मौत हो गई।
पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। न्यायालय में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी फौजदारी धीरेंद्र प्रताप सिंह ने कुल आठ गवाहों को पेश कर अभियोजन का पक्ष रखा। बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है।
जिला जज ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपीगण अनिल, अनुज और चंद्रशेखर को गैर इरादतन हत्या का दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद तीनों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा के साथ ही 10 हजार रुपये अर्थदंड लगाया।
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मामला कोपागंज थाना क्षेत्र के कोटवा कोपड़ा गांव का है। अभियोजन के अनुसार, कोटवा कोपड़ा गांव निवासी ब्रम्हानंद पुत्र सहवल राम की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज हुई। इसमें कोटवा कोपड़ा गांव निवासी अनिल व अनुज पुत्रगण विजेंदर तथा चंद्रशेखर पुत्र अर्जुन को नामजद किया गया।
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वादी का कथन था कि 14 अप्रैल 2014 की रात 7:45 बजे आरोपीगण ने बल्ब व तार तोड़ने के विवाद को लेकर उसके भतीजे गौतम पुत्र रामविलास को मारपीट कर गंभीर चोटें पहुंचाईं। इलाज के दौरान गौतम की मौत हो गई।
पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। न्यायालय में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी फौजदारी धीरेंद्र प्रताप सिंह ने कुल आठ गवाहों को पेश कर अभियोजन का पक्ष रखा। बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है।
जिला जज ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपीगण अनिल, अनुज और चंद्रशेखर को गैर इरादतन हत्या का दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद तीनों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा के साथ ही 10 हजार रुपये अर्थदंड लगाया।