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Mau News: 15 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से चलीं हवाएं, छाए रहे बादल
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जनपद में शुक्रवार को मौसम ने अचानक करवट ले ली। सुबह से ही आसमान पर काले बादल छाए रहे। तेज हवाओं के साथ गरज-चमक भी हुई, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई।
मौसम विभाग ने हालात को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया है। तेज आंधी, बिजली गिरने और ओलावृष्टि की चेतावनी दी गई है। जनपद में शुक्रवार को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
पूरे दिन लगभग 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलती रही। पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी और एनसीआर में बारिश के बाद मौसम का रुख बदल गया है। मौसम के मिजाज में बदलाव से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
किसानों का कहना है कि बीते रविवार को तेज हवा और हल्की बूंदाबांदी से खड़ी दलहन और तिलहन की फसल खेतों में गिर गई थी। देर से बोई गई सरसों की फसल को तैयार होने में अभी एक सप्ताह का समय है। ऐसे में ओलावृष्टि होने पर दलहन, तिलहन और आलू की फसल को नुकसान हो सकता है।
किसान आशीष, रविंद्र पांडेय, विवेकानंद, बबलू, आलोक, हरेराम, कृष्णकांत, दिलीप, शिवधन, राजू और पंकज ने बताया कि गेहूं की फसल भी लगभग तैयार है।
तेज हवा और ओलावृष्टि से फसल गिर सकती है, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा। आम के पेड़ों पर बौर आ चुके हैं, तेज हवा चलने से बौर झड़ने की आशंका है। साथ ही चना, मटर और अरहर की फसल को भी नुकसान हो सकता है।
कृषि विज्ञान केंद्र, पिलखी के प्रभारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार सिंह ने बताया कि मार्च माह में दूसरी बार मौसम खराब हुआ है। पहले केवल हल्की बूंदाबांदी हुई थी, जिससे अधिक प्रभाव नहीं पड़ा था। अब मौसम में बदलाव के कारण सभी प्रकार की फसलों को नुकसान होने की आशंका है।
उन्होंने सलाह दी कि जिन किसानों की सरसों की फसल तैयार हो गई है, वे दो दिन बाद कटाई और मड़ाई करें। जिन किसानों की फसल कट चुकी है, वे उसकी तुरंत मड़ाई कर लें। उन्होंने यह भी बताया कि गेहूं की पछेती खेती करने वाले किसान सिंचाई न करें, क्योंकि इससे फसल गिरकर रोगग्रस्त हो सकती है।
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मौसम विभाग ने हालात को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया है। तेज आंधी, बिजली गिरने और ओलावृष्टि की चेतावनी दी गई है। जनपद में शुक्रवार को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
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पूरे दिन लगभग 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलती रही। पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी और एनसीआर में बारिश के बाद मौसम का रुख बदल गया है। मौसम के मिजाज में बदलाव से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
किसानों का कहना है कि बीते रविवार को तेज हवा और हल्की बूंदाबांदी से खड़ी दलहन और तिलहन की फसल खेतों में गिर गई थी। देर से बोई गई सरसों की फसल को तैयार होने में अभी एक सप्ताह का समय है। ऐसे में ओलावृष्टि होने पर दलहन, तिलहन और आलू की फसल को नुकसान हो सकता है।
किसान आशीष, रविंद्र पांडेय, विवेकानंद, बबलू, आलोक, हरेराम, कृष्णकांत, दिलीप, शिवधन, राजू और पंकज ने बताया कि गेहूं की फसल भी लगभग तैयार है।
तेज हवा और ओलावृष्टि से फसल गिर सकती है, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा। आम के पेड़ों पर बौर आ चुके हैं, तेज हवा चलने से बौर झड़ने की आशंका है। साथ ही चना, मटर और अरहर की फसल को भी नुकसान हो सकता है।
कृषि विज्ञान केंद्र, पिलखी के प्रभारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार सिंह ने बताया कि मार्च माह में दूसरी बार मौसम खराब हुआ है। पहले केवल हल्की बूंदाबांदी हुई थी, जिससे अधिक प्रभाव नहीं पड़ा था। अब मौसम में बदलाव के कारण सभी प्रकार की फसलों को नुकसान होने की आशंका है।
उन्होंने सलाह दी कि जिन किसानों की सरसों की फसल तैयार हो गई है, वे दो दिन बाद कटाई और मड़ाई करें। जिन किसानों की फसल कट चुकी है, वे उसकी तुरंत मड़ाई कर लें। उन्होंने यह भी बताया कि गेहूं की पछेती खेती करने वाले किसान सिंचाई न करें, क्योंकि इससे फसल गिरकर रोगग्रस्त हो सकती है।