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UP: 'दो नंबर से टूटी उम्मीद, जिद और हौसले ने टॉपर बनाया', UPPSC टॉपर का इंटरव्यू; खुद बताया कैसे रचा इतिहास

अमर उजाला नेटवर्क, बड़ौत/बागपत Published by: Sharukh Khan Updated Tue, 31 Mar 2026 01:11 PM IST
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सार

यूपीपीएससी टॉपर नेहा पांचाल से विशेष बातचीत हुई। उन्होंने बताया कि दो नंबर से उम्मीद टूट गई थी। लेकिन जिद और हौसले ने उन्हें टॉपर बनाया गया। अटूट विश्वास ने उन्हें वह मुकाम दिला दिया।

Exclusive Conversation with UPPSC Topper Neha Panchal Determination and Courage Made the Topper
up pcs result - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

कभी दो नंबर से सपना टूट गया था, आंखों में आंसू थे। दिल में दर्द भी कम नहीं था, मगर हौसला जिंदा था। अंदर एक जिद भी थी। इस हौसले व जिद के सहारे नेहा पांचाल ने यूपीपीएससी में पहली रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया।
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मूलरूप से बागपत के फतेहपुर पुट्ठी गांव के रहने वाले सुनील दत्त पांचाल वर्तमान में अपने परिवार के साथ शाहदरा के रामनगर में रहते हैं। वह शाहदरा स्थित एक फैक्टरी में काम करते हैं। उनकी बेटी नेहा पांचाल ने जिस सपने को देखा था, उसको पूरा करना आसान नहीं था।
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नेहा की शादी से कुछ दिन पहले हुई थी भाई की मौत
घर की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी, लेकिन सपने बड़े थे। इस बीच बड़ा झटका तब लगा, जब उनके भाई विनीत पांचाल को वर्ष 2012 में कैंसर हो गया। परिवार ने हर संभव कोशिश की, लेकिन वर्ष 2015 में नेहा की शादी से मात्र कुछ दिन पहले भाई की मौत हो गई। इससे पूरा परिवार टूट गया।

 

भाई को खोने का दर्द नेहा के जीवन में एक गहरा जख्म छोड़ गया। इस दर्द ने नेहा को तोड़ा नहीं, बल्कि ज्यादा मजबूत बना दिया। उन्होंने अपने आंसुओं को अपनी ताकत बनाया और पढ़ाई को अपना हथियार। नेहा ने वर्ष 2018 से यूपीपीएससी की तैयारी शुरू की। 

रोजाना 8 से 9 घंटे पढ़ाई और परीक्षा के समय 10 से 12 घंटे की मेहनत ने उनके इरादों को मजबूत किया। वर्ष 2023 में वह इंटरव्यू तक पहुंचीं, लेकिन महज दो नंबरों से चूक गईं।

 

नेहा ने हार मानने से इन्कार कर दिया
यह पल किसी को भी तोड़ सकता था, लेकिन नेहा ने हार मानने से इन्कार कर दिया। उन्होंने खुद को संभाला, फिर से खड़ी हुईं और फिर से तैयारी में जुट गईं। लगातार मेहनत और अटूट विश्वास ने उन्हें वह मुकाम दिला दिया, जिसका सपना उन्होंने वर्षों पहले देखा था और वह सपना है, पहली रैंक के साथ पीसीएस अधिकारी बनना।



 

हर दर्द से चुनौती और जिम्मेदारी से प्रेरणा मिलने पर आगे बढ़ी
नेहा ने फोन पर बातचीत में बताया कि यह सब कुछ बहुत मुश्किल था, कभी भाई के कैंसर के दर्द ने मुझे रोका, कभी घर की तंगी ने। मैंने सोचा कि अगर मैं खुद अपने सपने के लिए नहीं लडूंगी, ती कौन लड़ेगा? बेटी आयुषी की मुस्कान और अपने परिवार का नाम रोशन करने की चाह ने मुझे हर दिन पढ़ाई के लिए उठाया। दर्द और जिम्मेदारियों के बीच हर पन्ना मेरे लिए एक चुनौती और एक प्रेरणा बन गया।
 

सरकारी स्कूल में पढ़ीं बचपन से थीं होनहार
नेहा पांचाल के दादा गुरुदत्त वर्ष 1962 में गांव छोड़कर शाहदरा रामनगर आ गए थे। नेहा का जन्म भी शाहदरा में हुआ, मगर परिवार के अन्य सदस्य फतेहपुर पुट्ठी गांव में रहते हैं। नेहा ने कक्षा 5 तक की पढ़ाई शाहदरा के प्राइवेट स्कूल में की। इसके बाद इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई सरकारी स्कूल में की। इंटरमीडिएट के बाद बीकॉम और होम साइंस से एमए किया।

 

हार कभी नहीं माननी चाहिए, प्रयास करते रहो
नेहा कहती हैं कि कभी खुद को छोटा मत समझो। आप खुद के लिए नहीं लड़ोगी तो कोई आपकी मदद नहीं करेगा। लगातार प्रयास करो, हार कभी मत मानी। मुश्किलें आएंगी, दर्द आएगा, लेकिन जब हौसला मजबूत होगा तो कोई भी कठिनाई तुम्हें रोक नहीं सकती।
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