सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Fraud committed by selling old stamps by erasing the writing and seal with chemicals.

Meerut News: केमिकल से लिखावट-मुहर मिटाकर पुराने स्टांपों की बिक्री कर किया फर्जीवाड़ा

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 30 Mar 2026 02:47 AM IST
विज्ञापन
Fraud committed by selling old stamps by erasing the writing and seal with chemicals.
विज्ञापन
मेरठ। इस्तेमाल किए जा चुके स्टांपों से केमिकल की मदद से लिखावट और मुहर मिटाकर फिर से बिक्री कर दस हजार करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया। भारतीय प्रतिभूति मुद्रणालय नासिक की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। बैनामा लेखक विशाल वर्मा और उसके चार साथियों ने संगठित अपराध सिंडिकेट बनाकर राजस्व को क्षति पहुंचाई। इस मामले में पूर्व में भी प्राथमिकी दर्ज कर आरोपियों को जेल भेजा गया था। अब रविवार को आरोपियों के खिलाफ एक और प्राथमिकी दर्ज की गई है।
Trending Videos

सिविल लाइन थाना प्रभारी सौरभ शुक्ला ने दर्ज कराई गई प्राथमिकी में कहा है कि यह गिरोह सिंडिकेट बनाकर पुराने लिखे हुए स्टांपों को विभिन्न माध्यमों से प्राप्त करता था। इसके बाद केमिकल के जरिए उनकी लिखावट और मुहरों को साफ कर दिया जाता था। एआईजी स्टाम्प ने 2020 से 2023 के बीच हुए 997 विलेखों की जांच की। इस जांच में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा सामने आया। संदेह होने पर आठ विलेखों के 38 मूल स्टांपों को परीक्षण के लिए भारतीय प्रतिभूति मुद्रणालय नासिक महाराष्ट्र भेजा गया था। वहां की रिपोर्ट में स्टांप पेपरों के साथ छेड़छाड़ की पुष्टि हुई। आरोपी पांच हजार रुपये से अधिक के 15 हजार से 25 हजार तक के भौतिक स्टांप सीधे कोषागार से खरीदते थे। केमिकल से लिखावट व मुहर मिटाकर गिरोह के सदस्य खरीदारों से आरटीजीएस या नकद भुगतान लेकर बेच देते थे। आरोपी इसमें अपने ही कार्यालय के कर्मचारियों के हस्ताक्षर करवाते थे। आरोपियों का नेटवर्क आसपास के जिलों तक फैला है।
विज्ञापन
विज्ञापन



इन आरोपियों पर दर्ज हुई प्राथमिकी
पुलिस ने इस संगठित अपराध सिंडिकेट में बीएनएस की धारा 111 (2) (बी) और 111 (4) के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की है। प्राथमिकी में सरगना बैनामा लेखक विशाल वर्मा (सम्राट पैलेस निवासी), उसके साथी अक्षय गुप्ता (सूरजकुंड), राहुल वर्मा (शताब्दी नगर), राहुल वर्मा (प्रवेश विहार) और यश सिंह (पांडव नगर) को नामजद किया गया है। आरोपियों पर पहले भी प्राथमिकी दर्ज की गईं थीं। जनवरी 2025 में विशाल वर्मा को 25 हजार का इनाम घोषित होने के बाद गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों से तीन लैपटॉप, चार मोबाइल, एक एंडेवर कार और फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए थे। उस दौरान रजिस्ट्री व कोषागार कार्यालय के कर्मचारियों पर भी आरोपियों से मिलीभगत के आरोप लगे थे।

एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि विशाल वर्मा और उसके साथियों पर कई मामले दर्ज हैं। वर्तमान में इस मामले की आंशिक जांच आर्थिक अपराध शाखा भी कर रही है। गिरोह के पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।
----------------------
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed