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दलित महिला की हत्या: बेटी के अपहरण को लेकर तनाव, गांव सील, कब क्या हुआ-यहां देखे हर पल का अपडेट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: डिंपल सिरोही Updated Fri, 09 Jan 2026 12:47 PM IST
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सार

Meerut Kapsad Case Latest Update: मेरठ के कपसाड़ गांव में दलित महिला की हत्या और नाबालिग बेटी के अपहरण से तनाव। नगीना विधायक चंद्रशेखर के कपसाड़ जाने की संभावना, विधायक अतुल प्रधान को गांव जाने से रोका गया, गांव के रास्ते सील, भारी पुलिस बल तैनात। कब क्या हुआ- यहां पढ़ें पूरा अपडेट।

Kapsad Murder Case: Dalit Woman Killed, Minor Daughter Abducted; MLA Stopped, Village Turned Into Fortress
कपसाड़ मामला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुनीता मर गई...यह सुनते ही एसडीएस अस्पताल में अफरातफरी मच गई। वहां पर गम, दहशत और आक्रोश फूट पड़ा। अपनी मां को खो चुका बेटा मनदीप बोला कि मां को मार डाला, बहन को दबंग उठाकर ले गए और अब हमें भी मार देंगे।

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गुरुवार सुबह कपसाड़ गांव में महिला सुनीता की हत्याकर बेटी रूबी के अपहरण की घटना से लोग आक्रोशित थे, तभी वहां मौजूद एसपी देहात अभिजीत कुमार ने कहा- हम आपको पूरी सुरक्षा देंगे, यह मेरी जिम्मेदारी है। भाई ने गुहार लगाई की बहन को वापस दिला दो, दबंगों के घरों पर बुलडोजर चलना चाहिए और एनकाउंटर की सजा दी जाए। मनदीप की बात सुनकर परिवार की महिलाएं रोने लगी। आक्रोश देखते अस्पताल को छावनी में पुलिस ने तब्दील कर लिया। 
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https://www.youtube.com/watch?si=i39mDT-3LR0iBLBs&v=xuXyaxYKHVc&feature=youtu.be

Kapsad Murder Case: Dalit Woman Killed, Minor Daughter Abducted; MLA Stopped, Village Turned Into Fortress
महिला पर हमला - फोटो : अमर उजाला

एसडीएस अस्पताल का गलियारा उस समय गम और दहशत की आवाजों से थर्रा उठा जब उपचार के दौरान घायल सुनीता की मौत की खबर आई। पत्नी के शव के पास खड़ा पति सतेंद्र व बेटा मनदीप इस कदर टूट गए कि वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। दोनों फूट-फूटकर रो रहे थे और उनकी सिसकियां रुकने का नाम नहीं ले रही थीं। 

रोते-बिलखते बेटा मनदीप ने अधिकारियों के सामने हाथ जोड़कर अपना दर्द बयां किया। उसने कहा, मेरी मां इस दुनिया से चली गई, मेरी बहन को वे जबरन उठा ले गए। अब हमें भी अपनी जान का डर है। वे लोग हमें भी मार देंगे। मेरी बहन को वापस दिला दो साहब, उन दरिंदों के घर पर बुलडोजर चलना चाहिए, उन्हें एनकाउंटर की सजा मिलनी चाहिए। इन बातों को सुनकर वहां मौजूद परिवार की अन्य महिलाएं भी दहाड़े मारकर रोने लगीं। 

एसपी देहात ने दिया आश्वासन, कहा- हम आपको पूरी सुरक्षा देंगे 
जब पति सतेंद्र और बेटा मनदीप अपनी सुरक्षा की गुहार लगाते हुए अधिकारियों के सामने बेसुध होने लगे तो एसपी देहात अभिजीत सिंह और एसडीएम सरधना उदित कुमार सेंगर ने उन्हें संभाला। एसपी ने परिवार को ढांढस बंधाया और कहा, सुरक्षा का जिम्मा मेरा है, हम आपको पूरी सुरक्षा देंगे। आप खुद को अकेला मत समझिए, परिवार की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी पुलिस की है। पुलिस दोषियों के खिलाफ ऐसी मिसाल कायम करेगी जिसे वे ताउम्र याद रखेंगे। एसपी ने भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों को शासन तक पहुंचाया जाएगा और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Kapsad Murder Case: Dalit Woman Killed, Minor Daughter Abducted; MLA Stopped, Village Turned Into Fortress
सुनीता की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

मेरी बेटी को बचा लो, मैं उसे देखूंगी तो ठीक हो जाऊंगी...
मौत सामने खड़ी थी, शरीर पर घाव गहरे थे और असहनीय दर्द से सांसें उखड़ रही थीं, लेकिन सुनीता की जुबान पर सिर्फ बेटी का ही नाम था। वह बार-बार बोल रही थी- मेरी बेटी को बचा लो, मैं उसे देखूंगी तो अपने आप ठीक हो जाऊंगी। मां की ममता का यह रूप देख वहां मौजूद डॉक्टर भी अपनी आंखों के आंसू नहीं रोक पाए। दर्द से कराहती हुई सुनीता बस अपनी अपहृत बेटी की सलामती की दुआ मांगती रही।

एसडीएस अस्पताल में भर्ती सुनीता की हालत गंभीर थी।  वह बार-बार वहां मौजूद परिजनों और पुलिस अधिकारियों के हाथ जोड़कर बस एक ही विनती कर रही थी, मेरी बेटी को बचा लो साहब... वह अभी बहुत नासमझ है, बच्ची है उसने किसी का क्या बिगाड़ा है... मेरी परवाह छोड़ो, बस मेरी बच्ची को सकुशल मेरे पास ले आओ।

उपचार के दौरान जब सुनीता की हालत बिगड़ने लगी और वह धीरे-धीरे अचेत होने लगी, तब भी उसकी जुबान पर अपनी बेटी का ही नाम था। देर शाम जैसे ही सुनीता की सांसों ने साथ छोड़ा, वैसे ही अस्पताल परिसर चीख-पुकार से गूंज उठा। इस खबर के बाद परिजनों और ग्रामीणों का आक्रोश सातवें आसमान पर पहुंच गया। 
 
यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और नारी सम्मान एवं सुरक्षा के लिए गम्भीर चेतावनी है। दोषी कोई भी हो, उन्हें सख्त से सख्त दंड मिलेगा। पीड़ित परिवार को शासन स्तर पर हर संभव मदद दी जाएगी। -संगीत सोम, पूर्व विधायक

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कपसाड़ मामला - फोटो : अमर उजाला
चंद्रशेखर आजाद के कपसाड़ पहुंचने की संभावना
कपसाड़ में महिला की हत्या और युवती के अपहरण के मामले में आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद भी आज कपसाड़ पहुंच सकते हैं। पार्टी के पदाधिकारियों ने बताया कि चंद्रशेखर आजाद आज गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार से मिल सकते हैं।

चंद्रशेखन ने एक्स प्लेटफाॅर्म पर पोस्ट करते हुए लिखा कि यह घटना सिर्फ एक आपराधिक कृत्य नहीं बल्कि जातिगत हिंसा और महिलाओं की असुरक्षा के प्रति अपराध का भयावह उदाहरण है। हम सरकार से मांग करते हैं कि जातंकवादियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए। बेटी की शीघ्र व सुरक्षित बरामदगी सुनिश्चित की जाए और पीड़ित परिवार को सरकारी सुरक्षा व उचित मुआवजा प्रदान किया जाए। 

परिवार को 50 लाख मुआवजा दे सरकार
सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान पहले एसडीएस अस्पताल और फिर देर रात पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचे और पीड़ित परिवार को सांत्वना दी। विधायक अतुल प्रधान ने कहा कि ऐसी घटना में त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए। लड़की को पुलिस जल्द बरामद करें, पीड़ित परिवार को 50 लाख का मुआवजा और मृतक के बेटे को सरकारी नौकरी दे। हम पीड़ित परिवार को न्याय दिलाकर रहेंगे।

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कपसाड़ मामला - फोटो : अमर उजाला

आरोपी हो गए फरार, घरों में लगे मिले ताले
कपसाड़ की घटना ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है। घटना के बाद से पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। पुलिस ने आरोपियों के घरों में दबिश भी दी लेकिन मुख्य आरोपी पारस सोम और उसके साथियों के घरों में ताले लगे मिले। आरोपी पुलिस से बचने के लिए घर छोड़कर चले गए हैं। वहीं युवती भी आरोपियों के कब्जे में है। 

पुलिस की सर्विलांस टीम लगातार दोनों ट्रेस करने में जुटी है। एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि मुख्य आरोपी पारस सोम और उसके साथियों की तलाश में पुलिस संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। 

पुलिस का कहना है कि युवती की साक्ष्य और बयान ही इस आपराधिक घटना के मुख्य पहलुओं को स्पष्ट करेंगे। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि युवती का बयान लेने के बाद ही पुलिस यह तय कर पाएगी कि हत्या और अपहरण की घटना में किसका कितना हाथ है।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि रूबी और पारस सोम पहले से परिचित थे। विवाद के चलते दोनों पक्षों के बीच पंचायत भी हुई थी। एसएसपी ने भी बताया कि युवक और युवती पहले से ही एक दूसरे के परिचित है।

सतेंद्र-सुनीता का सबसे बड़ा बेटा नरसी, इसके बाद मनदीप, शिवम और छोटी बेटी रूबी है। सतेंद्र मजदूरी करता है। रूबी इंटर तक पढ़ी है। इसके बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। वहीं आरोपी पारस गांव में ही एक डॉक्टर के पास कंपाउंडर है। सीओ सरधना आशुतोष कुमार ने बताया कि युवती का रिश्ता हो चुका है। अप्रैल में उसकी शादी होनी है।

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धरने पर बैठे अतुल प्रधान - फोटो : अमर उजाला

एंबुलेंस में की तोड़फोड़, चालक को खींचकर पीटा
सुनीता की मौत की खबर मिली तो एसडीएस अस्पताल में मौजूद परिजनों, भीम आर्मी व आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। कार्यकर्ताओं ने अस्पताल के बाहर खड़ी एंबुलेंस में तोड़फोड़ कर चालक की पिटाई कर दी। 

उन्होंने मांग उठाई कि आरोपियों को जल्द पकड़कर एनकाउंटर किया जाए और उनके घर पर बुलडोजर चलाया जाए। गुस्साए कार्यकर्ताओं ने 48 घंटे, 72, 84 और फिर 85 घंटे का पुलिस को समय देकर कहा कि आरोपियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन किया जाएगा। 

घायल सुनीता को इलाज के लिए मोदीपुरम स्थित एसडीएस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उपचार के दौरान शाम को पांच बजे मौत हो गई। यह खबर मिलते परिजनों, भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष चरणसिंह, प्रदेश संगठन मंत्री संजीव पाल, शाहजेब रिजवी व अन्य लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। 

पुलिस जब शव को ले जाने का प्रयास कर रही थी तब उग्र भीड़ ने एंबुलेंस को घेर लिया। भीड़ ने चालक दीपक को गिरेबान पकड़कर एंबुलेंस से बाहर खींचकर पीटा और एंबुलेंस में तोड़फोड़ की। अस्पताल के मैनेजर मनोज गोयल भीड़ के बीच घुस गए और मुश्किल से दीपक को बचाकर लाए। बीच-बचाव करने के दौरान मनोज के हाथ में कांच लगने से काफी चोट आई है। 

पुलिस ने संभाली स्थिति
तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए एसपी देहात अभिजीत कुमार, एसडीएम सरधना उदित नारायण सेंगर और सीओ दौराला भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत और आश्वासन के बाद परिजन शांत हुए और शव को पोस्टमार्टम के लिए जाने दिया गया।

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कपसाड़ मामला - फोटो : अमर उजाला
गिरफ्तारी तक अंतिम संस्कार से इनकार
शुक्रवार सुबह मृतका का शव जैसे ही गांव पहुंचा तो ग्रामीणों ने हंगामा कर दिया। घटना से आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने साफ कह दिया है कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती और अपहृत नाबालिग बेटी को सकुशल बरामद नहीं किया जाता, तब तक महिला का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। इस फैसले के बाद गांव में माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया है।

विधायक को गांव के बाहर रोका, गांव सील, बढ़ा तनाव
थाना सरधना क्षेत्र के गांव कपसाड़ में दलित महिला की हत्या और नाबालिग बेटी के अपहरण के मामले को लेकर हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। इसी बीच सरधना विधायक अतुल प्रधान जब पीड़ित परिवार से मिलने गांव पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें गांव के बाहर ही रोक दिया। सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देकर पुलिस ने आगे बढ़ने नहीं दिया, जिससे मौके पर हंगामा हो गया।

पुलिस और समर्थकों में धक्का-मुक्की
विधायक को रोके जाने के दौरान पुलिस और समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने अतिरिक्त बल बुला लिया। माहौल गर्माने के बाद प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया।

धरने पर बैठे विधायक, लगाए गंभीर आरोप
पुलिस कार्रवाई से नाराज विधायक अतुल प्रधान मौके पर ही धरने पर बैठ गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। विधायक ने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार से मिलने से रोका जाना गलत है और यह सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी और अपहृत नाबालिग की बरामदगी नहीं होती, वह पीछे नहीं हटेंगे।

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धरने पर बैठे अतुल प्रधान - फोटो : अमर उजाला

गांव के सभी रास्ते सील, बाहरी लोगों की एंट्री बंद
इधर हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने गांव कपसाड़ के चारों ओर से रास्ते सील कर दिए हैं। गांव में भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात की गई है। किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। वरिष्ठ अधिकारी लगातार मौके पर डटे हुए हैं।

अंतिम संस्कार से इंकार, मांगों पर अड़े परिजन
पीड़ित परिजन अब भी आरोपियों की गिरफ्तारी और अपहृत नाबालिग बेटी की सकुशल बरामदगी की मांग पर अड़े हुए हैं। परिजनों ने महिला का अंतिम संस्कार करने से साफ इंकार कर दिया है। पुलिस और प्रशासन लगातार वार्ता कर स्थिति संभालने की कोशिश में जुटे हैं।

पुलिस का दावा-स्थिति नियंत्रण में
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हालात नियंत्रण में हैं। नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी और किशोरी की बरामदगी के लिए विशेष टीमें लगाई गई हैं। गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती फिलहाल जारी रहेगी।

गांव के बाहर आकर विधायक संग बैठा पीड़ित परिवार, पुलिस ने समझाया
पीड़ित परिवार के पास विधायक अतुल प्रधान को जाने से रोकने पर पीड़ित परिवार खुद विधायक के पास गांव के बाहर आकर बैठ गया। इसके बाद का सरधना द्वारा पीड़ित परिवार को समझाया गया और विधायक समेत कार्यकर्ताओं को भी गांव के अंदर जानने के लिए कहा गया। जिसके बाद सीओ ने पीड़ित परिवार को पुलिस की गाड़ी में बैठाकर गांव में भिजवाया

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