मेरठ: हाईकोर्ट बेंच को लेकर अधिवक्ताओं का बड़ा एलान, भाजपा के सांसद-विधायक और मंत्री के कचहरी प्रवेश पर रोक
मेरठ में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर अधिवक्ताओं की आम सभा में कई फैसले लिए गए। भाजपा के सांसद, विधायक और मंत्रियों के कचहरी प्रवेश पर रोक, भाजपा से जुड़े अधिवक्ताओं को नोटिस और जनप्रतिनिधियों के वकालतनामे वापस लेने का निर्णय लिया गया।
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मेरठ में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर अधिवक्ताओं की आम सभा में आंदोलन को लेकर कई अहम निर्णय लिए गए। सभा में तय किया गया कि भाजपा के किसी भी प्रतिनिधि, चाहे वह सांसद, विधायक या मंत्री हो, को कचहरी में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। मेरठ बार एसोसिएशन में भाजपा से जुड़े प्रतिनिधि सदस्य होने पर उन्हें नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण लिया जाएगा और जवाब के आधार पर सदस्यता समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा के जनप्रतिनिधियों के कचहरी प्रवेश पर रोक
हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर हुई आम सभा में निर्णय लिया गया कि भारतीय जनता पार्टी के किसी भी प्रतिनिधि को कचहरी परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसमें सांसद, विधायक और मंत्री शामिल हैं। अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया।
सभा में तय किया गया कि मेरठ बार एसोसिएशन में यदि भाजपा का कोई प्रतिनिधि सदस्य है तो उसे नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। स्पष्टीकरण मिलने के बाद उसकी सदस्यता समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही एमपी-एमएलए कोर्ट में जनप्रतिनिधियों की ओर से अधिवक्ताओं द्वारा दाखिल वकालतनामे वापस लेने का निर्णय भी लिया गया।
अधिवक्ताओं ने कचहरी के प्रत्येक प्रवेश द्वार पर भाजपा के विरुद्ध बैनर लगाने का निर्णय लिया। बुधवार को संयुक्त व्यापार संघ के साथ संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की जाएगी। इसमें हाईकोर्ट बेंच की मांग से जुड़े मुद्दों और आंदोलन के आगामी कार्यक्रम की जानकारी दी जाएगी।
मुख्यमंत्री के बयान को लेकर भी जताई नाराजगी
बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस कथित बयान का भी मुद्दा उठाया गया, जिसमें सेंट्रल मार्केट प्रकरण की तरह हाईकोर्ट बेंच का समाधान सुप्रीम कोर्ट से कराने की बात कही गई। बैठक में मुख्यमंत्री और सभी जनप्रतिनिधियों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर भाजपा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी से भी अपना वकालतनामा वापस लेने का निर्णय लिया गया।
बुधवार को 22 जिलों के अधिवक्ता न्यायिक कार्य से रहेंगे विरत
बैठक में निर्णय लिया गया कि मुख्यमंत्री के बयानों को लेकर बुधवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों के अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे। हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने आंदोलन को आगे भी जारी रखने का फैसला किया है।