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मेरठ की प्रियंका को अर्जुन अवार्ड: पिता ने मकान बेचा, रोडवेज की नौकरी छोड़ी, संघर्ष से भरी है परिवार की कहानी
Tue, 18 Aug 2026 10:27 PM IST
Mohd Mustakim
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
Published by: Mohd Mustakim
Updated Tue, 18 Aug 2026 10:27 PM IST
सार
Meerut News: माधवपुरम निवासी पैदल चाल की एथलीट प्रियंका गोस्वामी को अर्जुन अवार्ड देने की घोषणा से परिजनों में हर्ष का माहौल है। प्रियंका ने बताया कि पिता के त्याग और कान्हा के आशीर्वाद ने उन्हें यह सम्मान दिलाया है। प्रियंका का परिवार मूल रूप से मुजफ्फरनगर का रहने वाला है।
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प्रियंका गोस्वामी एथलीट, पैदल चाल।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एथलीट (पैदल चाल) प्रियंका गोस्वामी को अर्जुन अवार्ड की घोषणा सिर्फ एक सम्मान नहीं, बल्कि उनके साथ ही पिता के कड़े संघर्ष का भी परिणाम है। बेटी को ओलंपिक से लेकर अर्जुन अवार्ड तक पहुंचाने के लिए पिता मदन गोस्वामी को मकान बेचना पड़ा। रोडवेज में परिचालक की नौकरी छोड़कर टैक्सी चलानी पड़ी। साकेत में किराए पर मकान लिया। खराब आर्थिक हालात में भी बेटी के सपने को नहीं टूटने दिया। प्रियंका का कहना है कि पिता के त्याग और कान्हा के आशीर्वाद ने ही यह सम्मान दिलाया है।
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इन दिनों प्रियंका का परिवार माधवपुरम में रह रहा है। वर्ष 2006 में मुजफ्फरनगर के सागड़ी गांव से मदनपाल गोस्वामी, पत्नी अनीता गोस्वामी और दोनों बच्चों कपिल व प्रियंका को लेकर मेरठ आ गए थे। वर्ष 2010 में उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी। किराए पर टैक्सी चलाई, किराना स्टोर खोला। डेयरी चलाकर भी पढ़ाई और खेल में बाधा नहीं आने दी। प्रियंका ने कनोहरलाल गर्ल्स स्कूल और बीके माहेश्वरी से स्कूली शिक्षा पूरी की। बीए की पढ़ाई पटियाला में की।
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यह सम्मान ही नहीं, बड़ी जिम्मेदारी भी है : प्रियंका गोस्वामी
अर्जुन अवार्ड के लिए चुनी जाने वाली मेरठी एथलीट प्रियंका गोस्वामी का कहना है कि यदि सिर्फ एक सम्मान नहीं बल्कि उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी भी है। खुद के साथ ही वह अन्य युवाओं को भी आगे बढ़ाने में हरसंभव मदद का प्रयास करेंगी। बंगलूरू साई सेंटर में प्रशिक्षण ले रहीं प्रियंका ने अमर उजाला से फोन पर बातचीत में ये बातें कहीं। प्रियंका ने कहा कि पिता और परिवार के त्याग के साथ ही कान्हा (लड्डू गोपाल) के आशीर्वाद ने उन्हें यह सम्मान मिला है।
अर्जुन अवार्ड के लिए चुनी जाने वाली मेरठी एथलीट प्रियंका गोस्वामी का कहना है कि यदि सिर्फ एक सम्मान नहीं बल्कि उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी भी है। खुद के साथ ही वह अन्य युवाओं को भी आगे बढ़ाने में हरसंभव मदद का प्रयास करेंगी। बंगलूरू साई सेंटर में प्रशिक्षण ले रहीं प्रियंका ने अमर उजाला से फोन पर बातचीत में ये बातें कहीं। प्रियंका ने कहा कि पिता और परिवार के त्याग के साथ ही कान्हा (लड्डू गोपाल) के आशीर्वाद ने उन्हें यह सम्मान मिला है।
17 खिलाड़ियों को मिलेगा अर्जुन पुरस्कार
केंद्र सरकार की ओर से मंगलवार को ही राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2025 की घोषणा की गई। इसमें 17 खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार के लिए चुना गया है। इसमें मेरठ के माधवपुरम निवासी प्रियंका का भी नाम शामिल है। अब सरकार की ओर से उन्हें अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। यह पुरस्कार खेल के क्षेत्र में पिछले चार वर्षों में अच्छे प्रदर्शन और नेतृत्व, खेल-भावना और अनुशासन की भावना दिखाने वाले एथलीट को दिया जाता है। क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी जितेंद्र यादव, शुरुआती दिनों के कोच गौरव त्यागी सहित अन्य ने इस उपलब्धि पर खुशी जताई।
केंद्र सरकार की ओर से मंगलवार को ही राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2025 की घोषणा की गई। इसमें 17 खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार के लिए चुना गया है। इसमें मेरठ के माधवपुरम निवासी प्रियंका का भी नाम शामिल है। अब सरकार की ओर से उन्हें अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। यह पुरस्कार खेल के क्षेत्र में पिछले चार वर्षों में अच्छे प्रदर्शन और नेतृत्व, खेल-भावना और अनुशासन की भावना दिखाने वाले एथलीट को दिया जाता है। क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी जितेंद्र यादव, शुरुआती दिनों के कोच गौरव त्यागी सहित अन्य ने इस उपलब्धि पर खुशी जताई।
जिम्नास्टिक से की खेलों में शुरुआत
प्रियंका गोस्वामी ने खेल जीवन की शुरुआत जिम्नास्टिक से की। बाद में 2010 में स्टेडियम में कोच गौरव त्यागी के कहने पर उन्होंने 20 किमी पैदल चाल में प्रतिभाग करना शुरू किया। 2011 में पहला पदक हासिल करने के बाद प्रियंका ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2015 में नेशनल रिकॉर्ड बनाया। पटियाला में 2014-15 में ग्रेजुएशन करने के बाद बंगलूरू साई सेंटर में चयन होने पर उन्हें निशुल्क प्रशिक्षण मिलना शुरू हुआ। इसके बाद वर्ष 2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स में भी उन्होंने देश के लिए रजत पदक जीता। इस बार भी कोमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने हिस्सा लिया और 10 हजार मीटर पैदल चाल में वह चौथे स्थान पर रहीं।
प्रियंका गोस्वामी ने खेल जीवन की शुरुआत जिम्नास्टिक से की। बाद में 2010 में स्टेडियम में कोच गौरव त्यागी के कहने पर उन्होंने 20 किमी पैदल चाल में प्रतिभाग करना शुरू किया। 2011 में पहला पदक हासिल करने के बाद प्रियंका ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2015 में नेशनल रिकॉर्ड बनाया। पटियाला में 2014-15 में ग्रेजुएशन करने के बाद बंगलूरू साई सेंटर में चयन होने पर उन्हें निशुल्क प्रशिक्षण मिलना शुरू हुआ। इसके बाद वर्ष 2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स में भी उन्होंने देश के लिए रजत पदक जीता। इस बार भी कोमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने हिस्सा लिया और 10 हजार मीटर पैदल चाल में वह चौथे स्थान पर रहीं।