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Meerut News: 50 गायों की विशेष यूनिट से दुग्ध उत्पादन में सुधार की योजना
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सरधना। नानू स्थित गौशाला का निरीक्षण करते मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी। विभाग
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संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। पारंपरिक गोशालाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और दूध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से उन्हें आधुनिक दुग्धशालाओं में परिवर्तित करने की पहल शुरू हो गई है। प्रदेश सरकार की प्राथमिकता के अनुरूप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. पवित्र जीत सिंह ने बृहस्पतिवार को बदरुद्दीन नगर नानू गांव स्थित गोशाला का निरीक्षण किया। उनके साथ डॉ. शरद शर्मा और पशुधन प्रसार अधिकारी सुधीर मलिक भी मौजूद रहे।
निरीक्षण के दौरान गोशाला में मौजूद पशुओं की स्थिति, पोषण स्तर और प्रजनन क्षमता का आकलन किया गया। सीवीओ ने बताया कि चयनित 50 मादा गोवंशों की विशेष दुग्ध उत्पादन यूनिट तैयार की जाएगी। इसमें वैज्ञानिक पद्धति से गर्भधारण नियंत्रित किया जाएगा जिससे नियमित अंतराल पर दूध उत्पादन सुनिश्चित होगा। निरीक्षण में कुछ गायों में हार्मोनल असंतुलन, ओवेरियन सिस्ट और पोषक तत्वों की कमी पाई गई। संबंधित कर्मचारियों को पशुओं के स्वास्थ्य का रिकॉर्ड बनाने और नियमित चिकित्सकीय निगरानी के निर्देश दिए गए।
सीवीओ ने कहा कि अब गोशालाओं में केवल सेक्स्ड सीमन तकनीक का प्रयोग होगा, जिससे अधिकतर मादा बछिया पैदा होंगी। संतुलित आहार, हरा चारा, मिनरल मिक्सचर और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। गोशाला के पास की खाली भूमि पर नेपियर घास उगाने और चारा आत्मनिर्भर बनाने के निर्देश दिए गए। सीवीओ ने कहा कि यह पहल गोशालाओं को आश्रय स्थल से आय सृजन के केंद्र में बदल देगी, जिससे रोजगार और दुग्ध उत्पादन दोनों में वृद्धि होगी।
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सरधना। पारंपरिक गोशालाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और दूध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से उन्हें आधुनिक दुग्धशालाओं में परिवर्तित करने की पहल शुरू हो गई है। प्रदेश सरकार की प्राथमिकता के अनुरूप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. पवित्र जीत सिंह ने बृहस्पतिवार को बदरुद्दीन नगर नानू गांव स्थित गोशाला का निरीक्षण किया। उनके साथ डॉ. शरद शर्मा और पशुधन प्रसार अधिकारी सुधीर मलिक भी मौजूद रहे।
निरीक्षण के दौरान गोशाला में मौजूद पशुओं की स्थिति, पोषण स्तर और प्रजनन क्षमता का आकलन किया गया। सीवीओ ने बताया कि चयनित 50 मादा गोवंशों की विशेष दुग्ध उत्पादन यूनिट तैयार की जाएगी। इसमें वैज्ञानिक पद्धति से गर्भधारण नियंत्रित किया जाएगा जिससे नियमित अंतराल पर दूध उत्पादन सुनिश्चित होगा। निरीक्षण में कुछ गायों में हार्मोनल असंतुलन, ओवेरियन सिस्ट और पोषक तत्वों की कमी पाई गई। संबंधित कर्मचारियों को पशुओं के स्वास्थ्य का रिकॉर्ड बनाने और नियमित चिकित्सकीय निगरानी के निर्देश दिए गए।
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सीवीओ ने कहा कि अब गोशालाओं में केवल सेक्स्ड सीमन तकनीक का प्रयोग होगा, जिससे अधिकतर मादा बछिया पैदा होंगी। संतुलित आहार, हरा चारा, मिनरल मिक्सचर और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। गोशाला के पास की खाली भूमि पर नेपियर घास उगाने और चारा आत्मनिर्भर बनाने के निर्देश दिए गए। सीवीओ ने कहा कि यह पहल गोशालाओं को आश्रय स्थल से आय सृजन के केंद्र में बदल देगी, जिससे रोजगार और दुग्ध उत्पादन दोनों में वृद्धि होगी।