मेरठ के बहसूमा क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव निवासी अमित कश्यप उर्फ मिक्की कश्यप हत्याकांड में शुक्रवार को अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-12) जयवीर सिंह नागर की अदालत ने अमित की हत्या और साक्ष्य मिटाने के मामले में दोषी पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मृत्युदंड की सजा सुनाई। दोनों दोषियों की पेशी जेल से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कराई गई।
रविता और अमरदीप को फांसी की सजा: 87 तारीखें-12 गवाह, 13 महीने बाद मिला न्याय, एडीजे-12 कोर्ट ने सुनाया फैसला
अमित कश्यप हत्याकांड में फांसी की सजा: एडीजे-12 जयवीर सिंह नागर की अदालत ने पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मृत्युदंड सुनाया। अमित की गला दबाकर हत्या करने के बाद शव के नीचे जिंदा घोड़ा पछाड़ सांप छोड़कर मौत को सर्पदंश दिखाने की कोशिश की गई थी।
मां-भाई, सपेरे की गवाही अहम रही
अभियोजन पक्ष ने बताया, मुकदमे की सुनवाई के दौरान 12 गवाहों के कोर्ट में बयान दर्ज कराए गए। इनमें अमित के भाई मोनू, मां मुनेश मुख्य गवाह रहे। उन्होंने अदालत में अमरदीप को हत्या वाली रात घर में प्रवेश करते देखने की बात कही। इनके अलावा सपेरे कीर्तन की गवाही भी अहम रही। उसने अदालत में अमरदीप की पहचान करते हुए बताया कि अमरदीप ने माता के जागरण में पूजा के लिए उससे एक हजार रुपये में सांप खरीदा था। साथ ही पुलिस ने कोर्ट में दाखिल आरोप पत्र में कहा था कि रविता ने अमित का हाथ पकड़ा था, जबकि अमरदीप ने उसका गला दबाया गया। साक्ष्य छिपाने और घटना को दूसरा रूप देने के लिए शव के पास चारपाई पर सांप छोड़ा था।
अभियोजन के अनुसार, दोनों ने अमित की गला दबाकर हत्या की थी। इसके बाद वारदात को सर्पदंश से मौत दिखाने के लिए उसके बिस्तर पर जिंदा घोड़ा पछाड़ सांप छोड़ दिया था। 13 अप्रैल 2025 को अमित का शव बिस्तर पर मिला था। शव के नीचे सांप दबा हुआ था और उसके शरीर पर सांप के डसने के 10 निशान थे। शुरुआत में पत्नी रविता ने दावा किया था कि अमित की मौत सांप के डसने से हुई है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मामले में नया मोड़ आया।
13 अप्रैल 2025 की सुबह अमित का शव उसके बिस्तर पर मिला था। शव के नीचे जिंदा घोड़ा पछाड़ सांप मिलने और शरीर पर डसने के निशान होने के कारण मौत को सर्पदंश से जोड़कर देखा गया। पत्नी रविता ने भी यही दावा किया था।
हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह सांप का काटना नहीं, बल्कि दम घुटना बताई गई। रिपोर्ट के मुताबिक, अमित का गला, नाक और मुंह दबाया गया था। गला दबाने के कारण उसकी गर्दन की हायॉइड बोन और थायरॉइड कार्टिलेज टूट गई थीं। इसके बाद मामले में हत्या के पहलू से जांच आगे बढ़ी।
अमित के भाई मोनू कश्यप ने 16 अप्रैल 2025 को रविता और अमरदीप के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच के दौरान दोनों की भूमिका की पड़ताल की और साक्ष्य जुटाए।
एडीजीसी फरजाना मकसूद के अनुसार, पुलिस जांच में सामने आया कि रविता और अमरदीप ने अमित को अपने संबंधों में बाधा मानते हुए उसकी हत्या की साजिश रची थी। आरोप था कि हत्या के बाद मामले को सर्पदंश का रूप देने की कोशिश की गई, ताकि किसी को शक न हो।
जांच में सांप की खरीद से जुड़ी जानकारी भी सामने आई। अमरदीप ने कथित तौर पर माता के जागरण के बहाने सपेरे कृष्ण से एक हजार रुपये में सांप खरीदा था। कृष्ण यह सांप अपने नाना प्रीतमनाथ से लेकर आया था। पुलिस के मुताबिक, इसी सांप को अमित के शव के नीचे छोड़कर मौत को सांप के काटने से हुई घटना दिखाने का प्रयास किया गया।
26 जून 2025 को दाखिल हुआ था आरोप-पत्र
पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद 26 जून 2025 को अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने 12 गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद रविता और अमरदीप को अमित की हत्या और साक्ष्य छिपाने का दोषी ठहराया।
शुक्रवार को अदालत ने दोनों दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। बहसूमा के अकबरपुर सादात गांव में 13 अप्रैल 2025 को सामने आए इस मामले में अदालत के फैसले के साथ हत्या को सर्पदंश दिखाने की साजिश से जुड़े मुकदमे की सुनवाई का अहम पड़ाव पूरा हुआ।