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Meerut News: स्क्रूटनी के बाद 6 से बढ़कर 60 हाे गए नंबर
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उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्याकंन में लापरवाही का आरोप लगा छात्रों ने किया परीक्षा नियंत्रक का घेराव
छात्र नेता का दावा-स्क्रूटनी के बाद बढ़े कई परीक्षार्थियों के अंक
कॉपियों के अंदर और बाहर दिए गए अंकों में अंतर
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के परीक्षा परिणामों में खामियों का आरोप लगाते हुए छात्र नेता शान मुहम्मद ने छात्रों के साथ परीक्षा नियंत्रक कार्यालय का घेराव किया। उन्होंने दावा किया कि एक छात्र को मुख्य परीक्षा परिणाम में केवल छह अंक देकर अनुत्तीर्ण घोषित कर दिया गया था, उसने स्क्रूटनी कराई तो उसके अंक बढ़कर 60 हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय की लापरवाही से छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
शान मुहम्मद ने बताया कि बीएससी के एक अन्य छात्र को मुख्य परिणाम में पांच अंक मिले थे, लेकिन स्क्रूटनी के बाद उसके अंक बढ़कर 59 हो गए। एलएलएम के एक छात्र के 25 अंक संशोधित होकर 35 हो गए। उनका आरोप है कि परीक्षकों और डेटा फीडिंग एजेंसी की लापरवाही का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि कई छात्रों ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां प्राप्त कीं, जिसमें पाया गया कि परीक्षकों ने कॉपी के अंदर तो सही अंक दिए थे, लेकिन मुख्य पृष्ठ पर अंकों के योग गलत थे। कई मामलों में अंदर और बाहर दर्ज प्राप्तांकों में 10 नंबर तक का अंतर मिला है। इस दौरान शहरयाब मुखिया, अजय चौधरी, अक्षय बैसला, राहुल स्याल, हेवीन खान और खुशी तोमर समेत अन्य छात्र मौजूद रहे।
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परीक्षक ब्लैक लिस्ट, एजेंसी का टेंडर निरस्त करने की मांग
छात्र नेता ने आरोप लगाया कि यह सामान्य मानवीय त्रुटि नहीं बल्कि गंभीर लापरवाही है, जिससे छात्रों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि ऐसे परीक्षकों की पहचान कर उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही डेटा फीडिंग करने वाली एजेंसी का टेंडर निरस्त कर उस पर आर्थिक दंड लगाया जाए।
छात्र नेता का दावा-स्क्रूटनी के बाद बढ़े कई परीक्षार्थियों के अंक
कॉपियों के अंदर और बाहर दिए गए अंकों में अंतर
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के परीक्षा परिणामों में खामियों का आरोप लगाते हुए छात्र नेता शान मुहम्मद ने छात्रों के साथ परीक्षा नियंत्रक कार्यालय का घेराव किया। उन्होंने दावा किया कि एक छात्र को मुख्य परीक्षा परिणाम में केवल छह अंक देकर अनुत्तीर्ण घोषित कर दिया गया था, उसने स्क्रूटनी कराई तो उसके अंक बढ़कर 60 हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय की लापरवाही से छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
शान मुहम्मद ने बताया कि बीएससी के एक अन्य छात्र को मुख्य परिणाम में पांच अंक मिले थे, लेकिन स्क्रूटनी के बाद उसके अंक बढ़कर 59 हो गए। एलएलएम के एक छात्र के 25 अंक संशोधित होकर 35 हो गए। उनका आरोप है कि परीक्षकों और डेटा फीडिंग एजेंसी की लापरवाही का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
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उन्होंने कहा कि कई छात्रों ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां प्राप्त कीं, जिसमें पाया गया कि परीक्षकों ने कॉपी के अंदर तो सही अंक दिए थे, लेकिन मुख्य पृष्ठ पर अंकों के योग गलत थे। कई मामलों में अंदर और बाहर दर्ज प्राप्तांकों में 10 नंबर तक का अंतर मिला है। इस दौरान शहरयाब मुखिया, अजय चौधरी, अक्षय बैसला, राहुल स्याल, हेवीन खान और खुशी तोमर समेत अन्य छात्र मौजूद रहे।
परीक्षक ब्लैक लिस्ट, एजेंसी का टेंडर निरस्त करने की मांग
छात्र नेता ने आरोप लगाया कि यह सामान्य मानवीय त्रुटि नहीं बल्कि गंभीर लापरवाही है, जिससे छात्रों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि ऐसे परीक्षकों की पहचान कर उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही डेटा फीडिंग करने वाली एजेंसी का टेंडर निरस्त कर उस पर आर्थिक दंड लगाया जाए।