वेस्ट यूपी में मौसम: दिन में गर्मी और रात में बढ़ रही ठंड, मेरठ में प्रदूषण बढ़ा, एक्यूआई 300 के करीब पहुंचा
वेस्ट यूपी में अक्टूबर के अंतिम दिनों में सुबह-शाम ठंड बढ़ रही है, जबकि दिन में तापमान 30 डिग्री से ऊपर बना है। मेरठ में एक्यूआई 300 के करीब पहुंचने से प्रदूषण की चिंता बढ़ी।
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वेस्ट यूपी में अक्टूबर के अंतिम दिनों में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। दिन में तेज धूप के कारण गर्मी का असर बना हुआ है, जबकि सुबह और रात के समय हल्की ठंड महसूस होने लगी है। इसी बीच एनसीआर और मेरठ में वायु प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मेरठ का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 300 के करीब पहुंच रहा है। हालांकि, प्रदूषण की मौजूदा स्थिति का सटीक आकलन करने के लिए ताजा आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि जरूरी है।
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दिन में गर्मी, सुबह-शाम बढ़ रही ठंड
अक्टूबर के अंतिम दिनों में वेस्ट यूपी के मौसम में दिन और रात के तापमान का अंतर साफ महसूस हो रहा है। दोपहर में तेज धूप निकलने के कारण तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है। वहीं, सुबह और शाम के समय मौसम अपेक्षाकृत ठंडा रहने लगा है।
रात के तापमान में गिरावट के साथ सर्दी का असर धीरे-धीरे बढ़ रहा है। मौसम के इस बदलाव के बीच लोगों को दिन में गर्मी और सुबह-शाम ठंड दोनों का सामना करना पड़ रहा है।
मेरठ समेत एनसीआर में वायु गुणवत्ता खराब होने की चिंता बनी हुई है। एक्यूआई 300 के करीब पहुंचने पर प्रदूषण का असर स्वास्थ्य के लिहाज से गंभीर हो सकता है। हालांकि, किसी खास समय और स्थान का वास्तविक एक्यूआई जानने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या संबंधित आधिकारिक निगरानी केंद्र के ताजा आंकड़े देखना जरूरी है।
हवा में प्रदूषक कणों की मात्रा बढ़ने से कुछ लोगों को आंखों में जलन, खांसी और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी बीमारी से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
मौसम शुष्क रहने और हवा की गति कम होने की स्थिति में प्रदूषक कण वातावरण में अधिक समय तक बने रह सकते हैं। इससे वायु गुणवत्ता और खराब होने की आशंका रहती है। दीपावली के आसपास प्रदूषण को लेकर भी चिंता बनी रहती है, लेकिन आने वाले दिनों में एक्यूआई कितना बढ़ेगा, यह मौसम और उत्सर्जन सहित कई कारकों पर निर्भर करेगा।
लोगों को खुले में कूड़ा या अन्य अपशिष्ट जलाने से बचना चाहिए। प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर बाहर लंबे समय तक रहने और तेज शारीरिक गतिविधियों को सीमित करना उपयोगी हो सकता है। दिन में गर्मी के बावजूद रात के तापमान में गिरावट को देखते हुए मौसम के अनुसार कपड़े पहनना भी जरूरी है।