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जहां ज्ञान रुकता है वहां से आरंभ होती है प्रेम यात्रा : गोपाल कृष्ण
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औघड़नाथ मंदिर में चल रही श्री राधे पुराण कथा में राधा कृष्ण पुनर्मिलन का प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
- उद्धव राधा संवाद के माध्यम से प्रेम की महिमा का हुआ दिव्य वर्णन
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। नमामि राधे ट्रस्ट मोदीनगर के तत्वावधान में औघड़नाथ मंदिर में आयोजित श्री राधे पुराण कथा महोत्सव के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास गोपाल कृष्ण भारद्वाज ने श्रीकृष्ण एवं श्रीराधा के दिव्य पुनर्मिलन तथा उद्धव राधा संवाद का अत्यंत मार्मिक एवं भावपूर्ण वर्णन किया। इसे सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे।
कथा व्यास ने बताया कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने अपने परमप्रिय सखा एवं महान ज्ञानी उद्धव जी को ब्रज में श्रीराधा एवं गोपियों के पास संदेश लेकर भेजा। तब उन्हें अपने ज्ञान पर गर्व था लेकिन ब्रज में पहुंचकर जब उन्होंने श्रीराधा एवं गोपियों के निष्काम, निष्कपट और अनन्य प्रेम का अनुभव किया, तब उन्हें ज्ञात हुआ कि जिस परम सत्य की प्राप्ति वे ज्ञान के माध्यम से करना चाहते थे, उसे ब्रजवासियों ने पहले ही सहजता से प्राप्त कर लिया है।
व्यास जी ने कहा कि राधा और कृष्ण का मिलन केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि जीव और परमात्मा के शाश्वत ऐक्य का प्रतीक है। श्रीराधा का जीवन हमें सिखाता है कि प्रेम में अधिकार नहीं, समर्पण होता है। अपेक्षा नहीं, अर्पण होता है। यही प्रेम भक्त को भगवान तक पहुंचाने का सबसे सरल और श्रेष्ठ मार्ग है।
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पूजन में मुख्य यजमान के रूप में समीर जैन एवं मुक्त जैन उपस्थित रहे। कथा के उपरांत भजन कीर्तन एवं महाआरती का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महापौर हरिकांत अहलूवालिया, विधायक अमित अग्रवाल, कमल दत्त शर्मा, संगीता पंडित, मधु बाजपेयी, विवेक वाजपेयी, ज्योति आदि मौजूद रहे।
- उद्धव राधा संवाद के माध्यम से प्रेम की महिमा का हुआ दिव्य वर्णन
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। नमामि राधे ट्रस्ट मोदीनगर के तत्वावधान में औघड़नाथ मंदिर में आयोजित श्री राधे पुराण कथा महोत्सव के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास गोपाल कृष्ण भारद्वाज ने श्रीकृष्ण एवं श्रीराधा के दिव्य पुनर्मिलन तथा उद्धव राधा संवाद का अत्यंत मार्मिक एवं भावपूर्ण वर्णन किया। इसे सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे।
कथा व्यास ने बताया कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने अपने परमप्रिय सखा एवं महान ज्ञानी उद्धव जी को ब्रज में श्रीराधा एवं गोपियों के पास संदेश लेकर भेजा। तब उन्हें अपने ज्ञान पर गर्व था लेकिन ब्रज में पहुंचकर जब उन्होंने श्रीराधा एवं गोपियों के निष्काम, निष्कपट और अनन्य प्रेम का अनुभव किया, तब उन्हें ज्ञात हुआ कि जिस परम सत्य की प्राप्ति वे ज्ञान के माध्यम से करना चाहते थे, उसे ब्रजवासियों ने पहले ही सहजता से प्राप्त कर लिया है।
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व्यास जी ने कहा कि राधा और कृष्ण का मिलन केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि जीव और परमात्मा के शाश्वत ऐक्य का प्रतीक है। श्रीराधा का जीवन हमें सिखाता है कि प्रेम में अधिकार नहीं, समर्पण होता है। अपेक्षा नहीं, अर्पण होता है। यही प्रेम भक्त को भगवान तक पहुंचाने का सबसे सरल और श्रेष्ठ मार्ग है।
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