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Mirzapur News: 736 वर्ग किमी जंगल में 72 वनकर्मी और रिवाल्वर एक....बहुत नाइंसाफी है

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 10 Jan 2026 01:19 AM IST
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72 forest guards and one revolver in 736 sq km of forest...this is very unfair.
जंगल में लाठी-डंडे के सहारे निगहबांनी करते वनककर्मी -- सोशल मीडिया। - फोटो : हादसे में जान गंवाने वाले स्टेशन मास्टर श्रवण कुमार।
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मिर्जापुर। 736 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला मिर्जापुर का वन क्षेत्र। एक तरफ तेंदुआ, भालू, लकड़बग्घा जैसे खूंखार जानवर हैं तो दूसरी तरफ आधुनिक असलहों से लैस शिकारी, खनन माफिया हैं। वहीं वन जीवों को नुकसान पहुंचाने वाले भी हैं लेकिन इन सबसे निपटने के लिए वन विभाग की उत्साही फौज के पास सिर्फ लाठी-डंडे हैं। आठ रेंज में तैनात 72 वनकर्मियों के पास हथियार के नाम पर मात्र एक रिवाल्वर है, वो भी जिला मुख्यालय के लाॅकर में वर्षों से सुरक्षित है। जंग लगीं आठ राइफलें हैं जो वर्षों से नहीं चलीं। कई कारतूस भी एक्सपायरी हो चुकी हैं। वन विभाग में चयन के बाद भले ही वनकर्मियों को बकायदा हथियारों का प्रशिक्षण दिया गया था लेकिन फील्ड में तैनाती के बाद से उनके हाथ केवल लाठी ही लगी है। चार हजार 405 वर्ग किलोमीटर फैले जिले में 736.91 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में जंगल है। उत्तर प्रदेश में वन क्षेत्रफल के मामले में सोनभद्र, श्रावस्ती और पीलीभीत के बाद मिर्जापुर चौथे नंबर पर है। मिर्जापुर, लालगंज, मड़िहान, चुनार, ड्रमंडगंज, पटेहरा, सुकृत व विंढमफाल आठ रेंज को मिलाकर जिले में कुल 29 वन चौकियां हैं। क्षेत्रीय वनाधिकारी, उप क्षेत्रीय वनाधिकारी, वन दरोगा व वन रक्षक को मिलाकर क्षेत्र में 72 वनककर्मी हैंं। इनके कंधे पर वनों के अवैध कटान, शिकार, अवैध खनन व परिवहन को नियंत्रण करने जैसी तमाम चुनौतियां हैं। गौर करने वाली बात ये है कि पुलिस और पीएसी के पास अत्याधुनिक असलहे हैं तो वहीं घने अंधेरे के बीच जंगलों में सेवा देने वाले कर्मियों के आत्म रक्षार्थ प्रत्येक रेंज को मिलाकर सिर्फ आठ राइफल है,जो जंग और जाम होने से खुद समस्या बन चुकी हैं। कारतूस भी कभी प्रयोग में न आने से खराब हो चुकी हैं।
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पुलिस विभाग पर होना पड़ रहा आश्रित-अतिक्रमण हटाने या फिर अवैध खनन जैसे कार्य रोकने के लिए वनकर्मियों को पुलिस विभाग पर आश्रित होना पड़ रहा है। कभी मामला फंसने पर जबतक पुलिसकर्मी पहुंचते हैं तब तक वनकर्मी मुकाबले मेें घायल हो चुके रहते हैं या जान बचाकर भागना पड़ता है। अभी कुछ दिन पहले लालगंज में अतिक्रमण हटाने गई वन विभाग पर हुए हमले प्रत्यक्ष उदाहरण है। हालांकि इससे पहले भी चुनार में अवैध खनन रोकने पहुंचे वन टीम पर हमले हो चुके हैं।
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कहीं बैरियर गायब तो कहीं पुलिस ने किया कब्जा-मिर्जापुर। जिले में अवैध परिवहन को रोकने के लिए वन विभाग की तरफ से जगह-जगह बैरियर बनाया गया है। पिछले कुछ सरकारों में ऐसे बैरियर हटा दिए गए। शास्त्री सेतु के पास बैरियर है। इस पर अब पुलिसकर्मी बैठने लगे। इसी तरह विंध्याचल, भुजवा चौकी के पास भी कभी वन विभाग की तरफ से बैरियर स्थापित कर अवैध परिवहन पर नियंत्रण किया जाता रहा है।



रेंज में जितने आग्नेयास्त्र आवंटित किए गए हैं, उन्हें डिवीजन में मंगाया जा रहा है। उनकी साफ-सफाई व मेंटनेंस कराया जाएगा। कारतूसों की स्थिति की जांच के लिए प्रतिसार निरीक्षक को भेजा जाएगा।-राकेश कुमार, प्रभागीय वनाधिकारी।
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