मिर्जापुर। शहर में लोगों को पेयजल आपूर्ति के लिए वर्ष 2018 में शुरू हुई 124 करोड़ रुपये की अमृत योजना आठ साल बाद भी धरातल पर पूरी नहीं हो सकी है। हालात यह है कि ढांचा तैयार होने के बावजूद अब तक घरों तक पानी नहीं पहुंचा है।
योजना के तहत गंगा में इंटेकवेल, 60 एमएलडी क्षमता का जल शोधन संयंत्र (डब्ल्यूटीपी) और शहर को आठ जोन में बांटकर पानी टंकी और वितरण नेटवर्क विकसित किया जाना था। अधिकांश निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया। वर्ष 2023 तक पाइपलाइन भी बिछा दी गई, लेकिन जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी।
गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई से मिली जानकारी के मुताबिक अमृत योजना की कार्यदायी कंपनी गैनन डैक्कर्ले एंड कंपनी लिमिटेड पिछले तीन वर्षों से पाइपलाइन की टेस्टिंग तक पूरी नहीं कर पाई। कई स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से लीकेज की समस्या बढ़ गई है।
गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने कार्यदायी कंपनी को कई नोटिस जारी किए और 5 करोड़ 57 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया, जुर्माना न चुकाने कार्य में सुधार नहीं होने पर कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया है।