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Mirzapur News: बाण सागर परियोजना के मुख्य अभियंता ने सिंचाई व्यवस्था का लिया जायजा
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किसानों ने बताया कि खरबूजे की फसल को वाराणसी, मिर्जापुर, रीवां और मध्य प्रदेश के अन्य बाजारों में भेजा जाता है
संवाद न्यूज एजेंसी
लालगंज। बाणसागर परियोजना से सिंचित क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही व्यावसायिक खेती का जायजा लेने के लिए बुधवार को परियोजना के मुख्य अभियंता विजय कुमार श्रीवास्तव ने अधिकारियों के साथ चार से पांच किलोमीटर पैदल भ्रमण किया। मेजा-जरगो लिंक नहर क्षेत्र के तेंदुआ, बहुती, कठवार समेत विभिन्न गांवों में किसानों से संवाद कर सिंचाई व्यवस्था और कृषि में आए बदलावों की जानकारी ली।
भ्रमण के दौरान वाराणसी-रीवां राजमार्ग के समीप पांडेपुर में पुरुषोत्तम पट्टी के किसान परमेश्वर मौर्य के साथ विशेष बैठक की। बैठक में मुख्य अभियंता ने व्यावसायिक खेती के मॉडल, उत्पादन, विपणन व्यवस्था तथा किसानों की आय में हुई वृद्धि के संबंध में विस्तृत जानकारी ली। परमेश्वर मौर्य ने बताया कि बाणसागर परियोजना से पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिलने के बाद क्षेत्र में खेती का स्वरूप बदल गया है। बताया कि खरबूजे की फसल को वाराणसी, मिर्जापुर, रीवां और मध्य प्रदेश के अन्य बाजारों में भेजा जाता है। वर्तमान में वे क्राफ्टिंग बैंगन के पौधों की रोपाई करा रहे हैं।किसानों ने अधिकारियों को बताया कि रानीबारी, सहिरा, तिखोर, अमहा, हर्दिहा और पुरुषोत्तम पट्टी जैसे गांवों में कभी सिंचाई संकट के कारण लोगों को रोजगार की तलाश में महानगरों का रुख करना पड़ता था। लेकिन बाणसागर परियोजना के पानी ने हालात बदल दिए हैं। मुख्य अभियंता विजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि बाणसागर परियोजना का कमांड क्षेत्र अब व्यावसायिक खेती का महत्वपूर्ण हब बनता जा रहा है। इस दौरान अधीक्षण अभियंता ओपी मौर्य, शशि प्रकाश शुक्ला, अधिशासी अभियंता मेराज अहमद, अशोक यादव, श्याम किशोर गुप्ता तथा आशुतोष मिश्रा सहित अन्य अधिकारी और किसान मौजूद रहे।
संवाद न्यूज एजेंसी
लालगंज। बाणसागर परियोजना से सिंचित क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही व्यावसायिक खेती का जायजा लेने के लिए बुधवार को परियोजना के मुख्य अभियंता विजय कुमार श्रीवास्तव ने अधिकारियों के साथ चार से पांच किलोमीटर पैदल भ्रमण किया। मेजा-जरगो लिंक नहर क्षेत्र के तेंदुआ, बहुती, कठवार समेत विभिन्न गांवों में किसानों से संवाद कर सिंचाई व्यवस्था और कृषि में आए बदलावों की जानकारी ली।
भ्रमण के दौरान वाराणसी-रीवां राजमार्ग के समीप पांडेपुर में पुरुषोत्तम पट्टी के किसान परमेश्वर मौर्य के साथ विशेष बैठक की। बैठक में मुख्य अभियंता ने व्यावसायिक खेती के मॉडल, उत्पादन, विपणन व्यवस्था तथा किसानों की आय में हुई वृद्धि के संबंध में विस्तृत जानकारी ली। परमेश्वर मौर्य ने बताया कि बाणसागर परियोजना से पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिलने के बाद क्षेत्र में खेती का स्वरूप बदल गया है। बताया कि खरबूजे की फसल को वाराणसी, मिर्जापुर, रीवां और मध्य प्रदेश के अन्य बाजारों में भेजा जाता है। वर्तमान में वे क्राफ्टिंग बैंगन के पौधों की रोपाई करा रहे हैं।किसानों ने अधिकारियों को बताया कि रानीबारी, सहिरा, तिखोर, अमहा, हर्दिहा और पुरुषोत्तम पट्टी जैसे गांवों में कभी सिंचाई संकट के कारण लोगों को रोजगार की तलाश में महानगरों का रुख करना पड़ता था। लेकिन बाणसागर परियोजना के पानी ने हालात बदल दिए हैं। मुख्य अभियंता विजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि बाणसागर परियोजना का कमांड क्षेत्र अब व्यावसायिक खेती का महत्वपूर्ण हब बनता जा रहा है। इस दौरान अधीक्षण अभियंता ओपी मौर्य, शशि प्रकाश शुक्ला, अधिशासी अभियंता मेराज अहमद, अशोक यादव, श्याम किशोर गुप्ता तथा आशुतोष मिश्रा सहित अन्य अधिकारी और किसान मौजूद रहे।
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